आधार पर SC का कल आ सकता है फैसला




आधार कार्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोर्ट की तरफ से यह फैसला सुनाया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील है कि आधार कार्ड बनाने के लिए बायोमेट्रिक्स जुटाना सीधे सीधे निजता के अधिकार का हनन है।अगर कोई अपना फिंगर प्रिंट नहीं देना चाहता तो सरकार उसे आखिर कैसे बाध्य कर सकती है? इस योजना के बाद सरकार सर्वशक्तिमान नज़र आती है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुनवाई के दौरान डेटा लीक की आशंका भी जताई।

कई बार UIDAI से आंकड़े लीक होने की खबरें आई हैं लंबे समय तक इकट्ठा डाटा किसी ख़ास व्यक्ति या समुदाय की प्रोफाइलिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल पॉलिटिकल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा सकता है। यह एक सर्विलांस स्टेट को जन्म देगा, जिसकी संविधान अनुमति नहीं देता है। यहां तक की संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं। सैनिकों के डेटा लीक से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

वहीँ सरकार की ओर से अटॉनी जनरल ने दलीलें रखते हुए ये कहा था कि आधार से सरकारी योजनाओं का लाभ उसके असली हकदारों तक पहुंच रहा है। पहले बिचौलिये हज़ारों करोड़ रुपए खा जाते थे। 58% खाद्यान्न बीपीएल लोगों तक नहीं पहुँच पाते थे। 1.93 करोड़ राशन कार्ड फ़र्ज़ी पाये गए।

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