नाग पंचमी का त्यौहार आज, जानिए क्या है इसकी मान्यताएँ




चित्र साभार: विकिपीडिया

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की भी परम्परा है जो शास्त्रों में सिद्ध नहीं है। शास्त्रों में दूध से स्नान का उल्लेख आता है लेकिन दूध पिलाने का कहीं कोई उल्लेख नहीं है।

नाग पंचमी के दिन नाग और अन्य (ख़ास कर जो ज़हरीले हैं) सांपो की पूजा दूध, मिठाई, फूल, बत्ती इत्यादि से की जाती है। नाग की चांदी, पत्थर, लकड़ी या पेंटिंग की प्रतिमा को पानी या दूध से स्नान कराकर दीवार पर टांगा जाता है। प्रतिमा स्थापन करते समय यह मन्त्र पढ़ा जाता है।

नाग प्रीता भवन्ति शान्तिमाप्नोति बिअ विबोह्

सशन्ति लोक मा साध्य मोदते सस्थित समः

इस मन्त्र का शाब्दिक अर्थ है कि “हे नाग देवता, सबको अपना आशीष दीजिए, सबको शान्ति दीजिए, सबको बिना किसी विक्षोभ के अपना जीवन जीने दीजिए”।  

इस दिन उपवास रखा जाता है और ब्राहमणों को खाना खिलाया जाता है। इस दिन सभी साँपों के प्रति दया दिखाई जाती है ताकि पूरा वर्ष सर्पदंश से सुरक्षा हो सके। कई स्थानों पर, जीवित साँपों की पूजा की जाती और मेलों का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन ज़मीन की खुदाई करने से बचा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे धरती के अंदर रह रहे सांप मर सकते हैं या इनको नुकसान हो सकता है।

इस दिन हिन्दू औरतों द्वारा साँपों को अपना भाई बनाने की भी परंपरा है जिसकी अपनी कथा है। कहा जाता है कि इससे स्त्रियों को धन की प्राप्ति होती है। इसके पीछे की कहानी यह है कि किसी समय में एक साहूकार हुआ करते थे जिनके सात बेटे थे। सातों का विवाह हो चुका था। साहूकार की सबसे छोटी वधू श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, लेकिन उसका कोई भाई नहीं था।

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने के लिए पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को चलने को कहा। इस पर बाकी सभी बहुएं उनके साथ चली गईं और डलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगीं। तभी वहां एक नाग निकला। इससे ड़रकर बड़ी बहू ने उसे खुरपी से मारना शुरू कर दिया। इस पर छोटी बहू ने उसे रोका। इस पर बड़ी बहू ने सांप को छोड़ दिया। वह नाग पास ही में जा बैठा। छोटी बहू उसे यह कहकर चली गई कि हम अभी लौटते हैं तुम जाना मत। लेकिन वह काम में व्यस्त हो गई और नाग को कही अपनी बात को भूल गई।

अगले दिन उसे अपनी बात याद आई। वह भागी-भागी उस ओर गई, नाग वहीं बैठा था। छोटी बहू ने नाग को देखकर कहा- सर्प भैया नमस्कार! नाग ने कहा- ‘तूने भैया कहा तो तुझे माफ करता हूं, नहीं तो झूठ बोलने के अपराध में अभी डस लेता। छोटी बहू ने उससे माफी मांगी, तो सांप ने उसे अपनी बहन बना लिया।

कुछ दिन बाद वह सांप इंसानी रूप लेकर छोटी बहू के घर पहुंचा और बोला कि ‘मेरी बहन को भेज दो।’ सबने कहा कि ‘इसका तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के संबंध में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी वधू को उसके साथ भेज दिया।

रास्ते में नाग ने छोटी बहू को बताया कि वह वही नाग है और उसे ड़रने की जरूरत नहीं। जहां चला न जाए मेरी पूंछ पकड़ लेना। बहन ने भाई की बात मानी और वह जहां पहुंचे वह सांप का घर था, वहां धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई।

एक दिन भूलवश छोटी बहू ने नाग को ठंडे की जगह गर्म दूध दे दिया। इससे उसका मुंह जल गया। इस पर सांप की मां बहुत गुस्सा हुई। तब सांप को लगा कि बहन को घर भेज देना चाहिए। इस पर उसे सोना, चांदी और खूब सामान देकर घर भेज दिया गया।

सांप ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उसकी प्रशंसा खूब फैल गई और रानी ने भी सुनी। रानी ने राजा से उस हार की मांग की। राजा के मंत्रि‍यों ने छोटी बहू से हार लाकर रानी को दे दिया।

छोटी बहू ने मन ही मन अपने भाई को याद किया ओर कहा- भाई, रानी ने हार छीन लिया, तुम ऐसा करो कि जब रानी हार पहने तो वह सांप बन जाए और जब लौटा दे तो फिर से हीरे और मणियों का हो जाए। सांप ने वैसा ही किया।

रानी से हार वापस तो मिल गया, लेकिन बड़ी बहू ने उसके पति के कान भर दिए। पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर पूछा – यह धन तुझे कौन देता है? छोटी बहू ने सांप को याद किया और वह प्रकट हो गया। इसके बाद छोटी बहू के पति ने नाग देवता का सत्कार किया। उसी दिन से नागपंचमी पर स्त्रियां नाग को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

ऐसी और भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। 1972 में पृथ्वी राज कपूर ने सबसे पहले इस त्यौहार पर नाग पंचमी नाम से फ़िल्म भी बनाई थी। नागों पर बॉलीवुड ने कई फिल्म बनाई है और उन फिल्मों में नागों की सुरक्षा और इनके महत्व को लेकर जागरूकता भी पैदा की गयी है।

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