‘निगरानी की खुली छूट’ कानून की दृष्टि से गलत




नई दिल्ली : किसी भी कंप्यूटर प्रणाली से सूचनाएं निकालने, उनकी निगरानी और कूट भाषा का विश्लेषण करने के लिये 10 केन्द्रीय एजेन्सियों को अधिकृत करने संबंधी अधिसूचना को चुनौती देते हुये सोमवार को उच्चतम न्यायालय में दो जनहित याचिकायें दायर की गयीं।

ये जनहित याचिकायें अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और अधिवक्ता अमित साहनी ने दायर की हैं। इन याचिकाओं में सरकार की 20 दिसंबर की अधिसूचना को चुनौती देते हुये न्यायालय से इसे निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।



दोनों याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये अधिसूचना ‘असंवैधानिक’ है और ‘निगरानी की खुली छूट’ कानून की दृष्टि से गलत है।

इस याचिका में दावा किया गया है कि अधिसूचना का मकसद अघोषित आपातस्थिति के तहत आगामी आम चुनाव जीतने के लिये राजनीतिक विरोधियों, विचारकों और वक्ताओं का पता लगाकर पूरे देश को नियंत्रण में लेना है। याचिका में कहा गया है कि हमारे देश का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है।

(PTI)

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