भारतीय सैन्य अकादमी के दो सैनिक छात्र (कैडेट) की मौत और अन्य 5 अस्पताल में भर्ती




भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून

दो दिनों के अंदर, भारतीय सैन्य अकादमी के दो सैनिक छात्र नबीन कुमार छेत्री और दीपक शर्मा की भर्ती के बाद होने वाले प्रथम चरण के प्रशिक्षण के दौरान मृत्यु हो गयी.


टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमए के स्रोतों ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की कि 10 किलोमीटर की रूटीन दौड़ के दौरान सात सैनिक छात्र बेहोश हो कर गिर पड़े थे जिनमें पांच को सैन्य अस्पताल, देहरादून में भर्ती किया गया था जिनकी हालत अब ठीक बताई जा रही है. छेत्री की मौत रविवार रात्रि को हो गयी थी जिसकी वजह अस्पताल के सूत्रों के अनुसार एक से अधिक अंग का कार्य करना बंद होना (multiple organ failure) बताया गया. सैनिक छात्र ‘पहला क़दम’ नामी प्रशिक्षण कैंप में थे जिसे उत्तर प्रदेश के सहारनपुरपुर ज़िला के बादशाही बाग़ के सामान्य क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा था. यह कैंप उन नए सैनिक छात्रों के लिए होता है जिनकी भर्ती स्नातक के बाद सीधे प्रवेश के तौर पर अकादमी में शामिल होने के लिए लिया जाता है.

सेना की विज्ञप्ति के अनुसार, अभ्यास के रन बैक के दौरान, सात सैनिक छात्र डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के कारण गिर पड़े. सभी छात्रों को उसी समय मेडिकल ऑफिसर द्वारा प्राथमिक उपचार देने के बाद पैरामेडिक देखभाल में विशेष एम्बुलेंस से सैन्य अस्पताल, देहरादून भेज दिया गया.

सेना की विज्ञप्ति के अनुसार, दीपक शर्मा जिनकी स्थिति नाज़ुक बनी हुई थी उन्हें सबसे नजदीकी मेडिकल सेण्टर, विकास नगर के लेहमान अस्पताल भेजा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और उनकी मृत्यु हो गयी. दीपक शर्मा की मृत्यु 18 अगस्त को डेढ़ बजे दिन में और छेत्री की मृत्यु 20 अगस्त को 11.50 रात्रि में हो गयी.

दो दिनों में दो सैनिक छात्रों की मौत और वह भी प्रतिष्ठित सैन्य अकादमी में होना उस प्रक्रिया पर सवाल उठाता है जिसके तहत सैनिक छात्रों की भर्ती के समय जांच की जाती है. सेना विशेषज्ञों ने इस पर दुःख प्रकट करते हुए कहा कि इस घटना से यह स्पष्ट है कि “कैडेट की शारीरिक जांच में गंभीर चूक हुई है और यह प्रवेश स्तर पर ही उनकी ठीक से जांचे करने में अधिकारियों की विफलता को दिखाती है”.

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिर्वित्त) गंभीर नेगी जो आईएमए के पूर्व कमांडेंट हैं ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि “ऐसा कोई भी मामला तब कभी नहीं आया जब मैं कैडेट था और तब भी नहीं जब मैं कमांडेंट था. प्रशिक्षण के दौरान हम थक तो ज़रूर जाते थे लेकिन बेहोश हो कर गिरने की नौबत कभी नहीं आई. मुझे लगता है कि हमें शारीरिक जांच के लिए अधिक कठोर जांच अपनाने चाहिए और उसके बाद ही प्रशिक्षण अकादमी में लिया जाना चाहिए.”

इसे खतरनाक घटना बताते हुए कर्नल (सेवानिर्वित्त) एस. सी त्यागी ने कहा कि “इस समस्या की जांच आवश्यक है क्योंकि इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि सेना के भावी अधिकारियों में ताक़त और शारीरिक सहनशक्ति की कमी है. इससे पता चलता है कि आज के नौजवानों की जीवन शैली का उनपर घातक प्रभाव हो रहा है. भर्ती की प्रक्रिया को भी अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता है.

सेवारत अधिकारी ने इसमें जोड़ते हुए कहा कि ‘पहला क़दम’ अकादमी का सबसे आसान कैंप है. “यह कैंप छात्रों के अकादमी में शामिल होने के तीन महीने के बाद किया जाता है. संभवतः, उनके मानसिक और शारीरिक सहनशीलता उस समय बहुत उच्च स्तर के न हों लेकिन सहनशीलता का यह प्रशिक्षण भी बहुत कठिन नहीं होता है. इस प्रशिक्षण में कैडेट को मानचित्र पढने, गश्त लगाने इत्यादि जैसे विषयों की थ्योरी और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दी जाती है और इस कैंप में शारीरिक थकान बहुत ही मामूली होती है.”

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