ज़रा संभल के! 2019 में सोशल मीडिया की रहेगी कड़ी निगरानी..




सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों और नफरत फैलाने वाले संदेशों का वाहक बनने का आरोप है, जिसके चलते भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मौत के घाट उतारे जाने की घटनाएं हुयी। अब उनके लिए सरकारी नियमों में सख्ती, अधिक जवाबदेही और कड़ी नियामकीय जांच पड़ताल की प्रक्रिया से गुजारे जाने की संभावना है।

साल 2018 में सोशल मीडिया मंचों ने देश की जरुरतों को ध्यान में रखते कई बदवाल किये। जिनमें एक संदेश को फॉरवर्ड करने की सीमा निर्धारित करना और फर्जी खबरों के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाना जैसी चीजें शामिल हैं। यही नहीं ये प्लटेफॉर्म भारतीय उपयोगकर्ताओं के आंकड़ों (डेटा) को भी भारत में संग्रहित करने पर राजी हुये हैं।

दरअसल साल की शुरुआत में डेटा लीक मामले में फेसबुक की जमकर आलोचना हुयी। क्रैंबिज एनालिटिका पर बिना उपयोगकर्ताओं की अनमुति के उनकी फेसबुक जानकारियां जुटाने का आरोप भी लगा। हालांकि इसके बाद सोशल मीडिया पर अविश्वसनीय सामग्री को लेकर उच्चतम न्यायालय की ओर से चिंता जताये जाने के बाद सरकार ने आईटी अधिनियम के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया।



बताते चलें इन सबके के बीच फेसबुक ने 2019 में होने वाले चुनावों को देखते हुये राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के लिये कदम उठाये हैं। इसके तहत इस तरह के विज्ञापन देने के लिये विज्ञापनदाता को अपनी पहचान और स्थान की जानकारी देनी होगी।

(इनपुट पीटीआई)

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