सादगी के पीछे प्रताप चन्द्र सारंगी का क्रूर चेहरा




प्रताप चन्द्र सारंगी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ (चित्र: सोशल मीडिया)

-समीर भारती

ग्राहम स्टेंस के हत्यारे दारा सिंह के गुरु हैं प्रताप सारंगी जिसे सोशल मीडिया और गोदी मीडिया के साथ साथ कनधैया मीडिया हीरो बना रही है

प्रताप चंद्र सारंगी (Pratap Chandra Sarangi). ओडिशा से इस बार सांसद  चुने गए हैं और मोदी सरकार 2 में इन्हें मंत्री पद मिला है. बृहस्पतिवार को प्रताप चंद्र सारंगी जब शपथ ले रहे थे तब तालियों की गड़गड़ाहट से राष्ट्रपति भवन परिसर गूंज रहा था. तालियाँ बजा कर सारंगी का हौसला बढ़ाते खुद प्रधान मंत्री मोदी (ज्ञात रहे कि इस बार सबका साथ सबका विकास में एक और मन्त्र जुड़ा है सबका विश्वास का मन्त्र) नज़र आए.

सोशल मीडिया पर और मुख्य धारा की मीडिया और चैनलों पर सारंगी का महिमामंडन लगातार किया जा रहा है. इससे पहले ओडिशा के एक प्रांत में सिकुड़े सारंगी को इन दिनों नेशनल हीरो की तरह पेश किया जाने लगा है.

कौन हैं प्रताप चन्द्र सारंगी?

64 वर्षीय प्रताप चंद्र सारंगी (Pratap Chandra Sarangi) लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे हैं और इस बार के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बालासोर संसदीय सीट से बीजू जनता दल के प्रत्याशी रबींद्र कुमार जेना को 12,956 मतों से हरा दिया. बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सारंगी दो बार ओडिशा विधानसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं.

मोदी सरकार 2 में प्रताप चंद्र सारंगी को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री; और पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है.

प्रताप चन्द्र सारंगी की कुल संपत्ति लगभग 10 लाख है जिसमें 7.5 लाख का कृषि लायक ज़मीन, पौने दो लाख के जेवरात और 1 लाख से अधिक बैंक में नकद जमा है.

ओडिश के मोदी हैं सारंगी

सारंगी को ओडिशा का ‘मोदी’ कहा जाता है. नरेंद्र मोदी की जिस तरह से अल्प संख्यक विरोधी छवि है ठीक उसी तरह की छवि ओडिशा में सारंगी ने अपनी बनाई है. ओडिशा में वह इसाई समुदाय के विरुद्ध अपने ज़हरीले और कट्टर रवैये के लिए जाने जाते हैं.

सादगी के पीछे सारंगी का क्रूर चेहरा

चुनाव सुधारों पर नजर रखने वाली संस्था नेशनल इलेक्शन वॉच और एडीआर (एसोसिएशन फॉर ड्रेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) के मुताबिक सारंगी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने, वैमनस्य पैदा करने समेत अन्य धाराओं में कुल 10 मामले दर्ज हैं. विश्लेषण के मुताबिक सारंगी पर जो 10 मामले दर्ज हैं, उनमें 7 गंभीर धाराएं हैं, जबकि 15 अन्य धाराएं लगाई गई हैं.

अगर मीडिया सारंगी की सादगी को लेकर हीरो बना रही है तो आपको बता दें कि भारत के राजनेताओं में इसकी कमी नहीं रही. खुद कांग्रेस के नेता और प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सादगी बेमिसाल रही है. इसी तरह सैकड़ों कम्युनिस्ट नेता ऐसे रहे हैं जिनकी सादगी की कसम खाई जा सकती हैं. इसमें त्रिपुरा के पूर्व मुख्य मंत्री मानिक सरकार की सादगी की मिसाल दिया जाता रहा है. उनके बारे में यह चर्चित रहा कि वह मुख्य मंत्री रहते हुए त्रिपुरा की सड़कों पर रिक्शा पर देखे जा सकते थे.

लेकिन सारंगी के इस सादगी के पीछे एक क्रूर चेहरा है जो ईसाईयों, जनजातियों, और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए भयावह है.

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड से अप्त्यक्ष रूप से जुड़ा है सारंगी का नाम

1999 में जब ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे फिलिप (10 वर्ष) और टिमोथी (6) वर्ष को दारा सिंह नाम के बजरंग दल के सदस्य ने जिंदा जला दिया था. यह तब हुआ था जब वह अपने कार में सोए थे. ग्राहम स्टेंस कोढ़ से पीड़ीत रोगियों के इलाज में लगे थे. उन पर आरोप था कि वह ऐसा करके धर्मांतरण कर रहे थे. दारा सिंह को व्यवहार न्यायालय से फांसी की सज़ा हुई थी बाद में ओडिशा उच्च न्यायालय ने और फिर सुप्रीम कोर्ट ने फाँसी की सज़ा को बदलकर आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. ऐसा स्टेंस की विधवा ग्लेडिस के एफिडेविट के कारण हुआ था जिन्होंने फांसी की सज़ा को आजीवन कारवास में बदलने की मांग थी और यह भी कहा था मैंने हत्यारों को माफ़ कर दिया.

1999 में जब यह हत्या हुई थी तब सारंगी ओडिशा (तब उड़ीसा) बजरंग दल इकाई के प्रमुख थे.

 

(समीर भारती लखनऊ स्थित शौकिया पत्रकार हैं. उनकी राय यहाँ उनके निजी है.)

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