26/11 को हिन्दू आतंक की साजिश बताने वाले कांग्रेसी मुख्यमंत्री के बेटा शिवसेना में शामिल




मुंबई में नावेद अंतुले शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ शिव सेना का झंडा लिए हुए (फोटो साभार: ट्विटर)
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ए. आर. अंतुले (A. R. Antulay) के बेटे नावेद अंतुले (Naved Antulay) ने शिवसेना की सदस्यता ली. सीनियर अंतुले ने 26 जुलाई, 2008 के मुंबई आतंकी हमले और हेमंत करकरे की हत्या को हिंदुत्व आतंक की साज़िश बताया था 

अपने जमाने के कद्दावर कांग्रेस नेता और राज्य के पहले और अकेले मुस्लिम मुख्यमंत्री अब्दुल रहमान अंतुले (Abdul Rahman Antulay) के बेटा नवेद अंतुले बुधवार को शिवसेना में शामिल हो गए. इन्हें शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में शिव धागा पहना कर सदस्यता दिलाई.

पार्टी ने कहा कि नावेद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन रायगड निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना के उम्मीदवार अनंत गीते के लिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच अभियान करेंगे.

हालाँकि नावेद राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं थे, लेकिन सीनियर अंतुले के राजनैतिक शिष्य सुनील तटकरे के एनसीपी (NCP) में शामिल होने के बाद खुद को अलग थलग महसूस करने के बाद उनहोंने यह क़दम उठाया. सुनील तटकरे एनसीपी से रायगड से गीते के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में तटकरे को गीते से मामूली अंतर से हार मिली थी।

मुंबई में हुए 26 जुलाई के हमले समय कांग्रेस सरकार के कैबिनेट में अंतुले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री थे. हमले में कई नागरिकों की जान गयी थी और तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे शहीद ही गए थे. यह पूरा मामला तब विवाद का विषय बना जब अब्दुल रहमान अंतुले ने कहा कि मुंबई आतंकवादी हमलों में हिन्दू चरमपंथी संगठनों का हाथ हो सकता है. उनहोंने तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे की हत्या की जांच की मांग भी उठाई थी। हेमंत करकरे के एटीएस चीफ रहते हुए कई हिन्दू आतंकियों के नाम सामने आए थे. उनहोंने मालेगांव ब्लास्ट मामले में असीमानंद और अन्य को अभियुक्त बनाया था.

उसके बाद कांग्रेस के अंदर और विपक्ष द्वारा उनकी आलोचना शुरू हो गयी. जिसका कारण उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा और बाद में फिर अंतुले को उस पार्टी द्वारा दरकिनार कर दिया गया, जिसके वे कभी कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री थे।

ए.आर. अंतुले आखरी दम तक अपने बयान पर कायम रहे. उनहोंने कहा कि हेमंत करकरे की मौत पर सवाल उठाकर उनहोंने अपनी पार्टी और देश का गौरव बढ़ाया।

2 दिसंबर, 2014 को उनकी मृत्यु हो गई और राजनैतिक गलियारे में यह नाम कहीं गुम गया।

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