महाभारत का “शंखनाद” हो चुका है, इंद्रप्रस्थ का सिंघासन “कौरवों” के कुकर्मों से “कराह” रहा है, परिवर्तन सुनिश्चित् है, चुनाव की घोषणा हो जाने के बाद किसने कहा, जानिए




सबसे बायीं ओर आचार्य प्रमोद (साभार: ट्विटर)

कल यानी रविवार को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव की घोषणा हो चुकी है. मुख्य निर्वाचन आयोग ने शाम को घोषणा करते हुए 7 चरणों में लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी है. इसकी शुरुआत 11 अप्रैल से होकर 19 मई तक चलेगी और 23 मई को नतीजे आएंगे.

बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चुनाव 7 चरण में होंगे.

लोक सभा चुनाव की घोषणा के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने ट्वीट में लिखा कि “महाभारत का “शंखनाद” हो चुका है, इंद्रप्रस्थ का सिंघासन “कौरवों” के कुकर्मों से “कराह” रहा है, परिवर्तन सुनिश्चित् है.”

कौन हैं आचार्य प्रमोद?

आचार्य प्रमोद कृष्णम श्री कल्कि पीठाधीश्वर हैं. श्री कल्कि पीठ संभल जनपद में है. उनका जन्म भी यहीं हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि पुराणों का उद्घोष है कि भगवान श्री हरिविष्णु का दसवां व अंतिम अवतार श्री कल्कि के रूप में इसी संभल नमक स्थान पर होगा। पुराणों की इस उद्घोषणा को जन जन तक पहुंचने का महानतम कार्य करने का श्रेय आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम जी को ही दिया जाता है। यूँ तो विश्व में अनेको पीठ और धाम स्थापित है, परन्तु श्री कल्कि पीठ एक ऐसा सिद्ध स्थान है जिसकी स्थापना भगवान के अवतरण से पूर्व हुई है।

2 नवंबर 2007 को भारत के प्रमुख संतो की उपस्थिति में श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी ने श्री कल्कि धाम के निर्माण का संकल्प लेते हुए यह घोषणा की, कि श्री कल्कि धाम विश्व का एक अनूठा धाम होगा जिसमे भगवान श्री हरी विष्णु के दसावतार के 10 अलग अलग गर्भ गृह होंगे।

आचार्य प्रमोद कृष्णम विश्वबंधुत्व और वसुधेव कुटुंबकम के भाव को आत्मसात करते हुए हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। ऋषि परंपरा में श्री आचार्य प्रमोद एक ऐसे विलक्षण संत है जिनके लाखों अनुयायी ईसाई और इस्लाम धर्म के मानने वाले है हालांकि उन्हें अपने कार्यो को लेकर कई बार विरोध भी झेलना पड़ा है।

आचार्य ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर भी सक्रीय रहते हैं.

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