व्यंग: कनाडाई नागरिक अक्षय के सवाल और अभिनेता मोदी के जवाब




प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का अक्षय कुमार के साथ साक्षात्कार कल से मीडिया में चर्चा का विषय है. आरोप लगता रहा है कि नरेंद्र मोदी ने आज तक न ही प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और न ही ऐसे किसी पत्रकार को साक्षात्कार दिया जो उनसे उनके विकास के बारे, राफेल मामले में उन पर आरोप, नोटबंदी के लाभ और हानि, आदि पर प्रश्न कर सके. अपने पांच साल के कार्यकाल में यह दूसरा अवसर है जब उनहोंने किसी फ़िल्मी हस्ती को अपना साक्षात्कार दिया या फिर बात-चीत की. इससे पहले भी उनहोंने एक फिल्म निर्देशक को अपना साक्षात्कार दिया था. इस साक्षात्कार पर आधारित यह व्यंग्य प्रस्तुत है. यह महज व्यंग है. इसका उद्देश्य हास्य है. इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या पार्टी की भावना को आहत करना नहीं है.

अक्षय कुमार: मैं कोई पॉलिटिकल प्रश्न नहीं करूंगा. बस चुनाव का जमाना है मन नहीं लग रहा था बहलाने के लिए चला आया.

नरेंद्र मोदी: राजनितिक प्रश्नों का मैं जवाब देता भी नहीं हूँ. 5 सवाल में मैंने यह बेवकूफी की ही नहीं. और तुम क्या मन बहलाओगे मैं ने 5 साल जितना मन बहलाया है शायद ही किसी ने जनता का मन बहलाया है



अक्षय कुमार: सर मेरे ड्राईवर की बेटी ने जानना चाहा है कि क्या हमारे प्रधान मंत्री जी आम खाते हैं और अगर खाते हैं तो काट कर खाते हैं कि गुठली के साथ खाते हैं.

नरेंद्र मोदी: मुझे आप ने आम आदमी समझा है क्या? मैं आम हमेशा गुठली के साथ ही खाता हूँ. मेरे पेट में इतनी आग है कि वह गुठली एकदम से पिघल जाता है. अगर आप मेरे शौच पर कभी शोध कीजिएगा तो पता चलेगा यह सब बात.

अक्षय कुमार: कभी आपने सोचा था कि आप कभी प्रधान मंत्री बनेंगे

नरेंद्र मोदी: मैं ने ऐसा कभी नहीं सोचा था. मैं तो मगरमच्छ पालन करने की सोच रहा था. क्योंकि मैं बचपन में मगरमच्छ बहुत पकड़ता था.

अक्षय कुमार: मैंने सुना है कि आप सन्यासी या सेना के जवान बनना चाहते थे.

नरेंद्र मोदी: यह आपने सही नहीं सुना है. मैं कभी भी जवान नहीं बनना चाहता था. मैं मरने से बहुत डरता हूँ. हाँ, सन्यासी बनना चाहता था. एक बार मैं हिमालय चला गया वहां मेरी पोलर बेयर से मुलाक़ात हो गयी. उसने जो अपना खान पान बताया वह मुझे पसंद नहीं आया. फिर मैंने सोचा इसमें तो बहुत कष्ट भी है. एक ही कपड़े पहनकर घूमना आदि. मुझे नए नए सूट पहनने का बहुत शौक़ था इसलिए यह विचार त्याग दिया.

अक्षय कुमार: आपने प्रधानमंत्री बनने का सोचा नहीं तो बन गए कैसे?

नरेंद्र मोदी: भटकते भटकते बन गया. हिमालय से आया तो गुजरात में एक दिन केशु भाई पटेल मिल गए उनहोंने कहा कि गुजरात के मुख्य मंत्री बन जाओ तो मैंने कहा कि ठीक है बन जाता हूँ. उसी तरह से एक दिन डॉ मनमोहन सिंह से अनायास मुलाक़ात हो गयी चौपाटी पर. मैं वहां भी भटक ही रहा था. मनमोहन सिंह ने कहा कि आप प्रधानमंत्री बन जाइए. तो मैंने कहा कि ठीक है बन जाते हैं. मैं जिस परिवार से आता हूँ वहां बड़ों की इज्ज़त करना मुझे बहुत सिखाया गया है. आप आडवाणी जी और मुरली मनोहर जी से यह बात पता कर सकते हैं.



अक्षय कुमार: आपको गुस्सा आता है. मुझे पता है कि गुस्सा तो सबको आता है. आप को अगर गुस्सा आता है तो आप क्या करते हैं?

नरेंद्र मोदी: मुझे गुस्सा नहीं आता है. यह आम आदमी के लक्षण हैं. लेकिन मैं लोगों को गुस्सा दिलाने में शुरू से माहिर रहा हूँ. और इसी लिए मैं ने मन की बात शुरू की. मैंने सुना है कि मेरी ‘मन की बात’ सुन कर लोगों को गुस्सा बहुत आता है. मैं इसका भरपूर आनंद लेता हूँ.

अक्षय कुमार: मैं तो गुस्सा उतारने के लिए समंदर किनारे चला जाता हूँ और चीख लेता हूँ. मन हल्का हो जाता है.

नरेंद्र मोदी: वही मैं भी करता हूँ. बस तरीका थोडा अलग है. आप चीखते हो लेकिन अकेले में. मैं रेडियो पर वही काम करता हूँ.

अक्षय कुमार: आपका इतना बड़ा घर है. जैसे मैं अपने घर पर अपनी माँ के साथ रहता हूँ. क्या आपका मन करता है कि आपके घर पर भी आपकी माँ, आपके भाई, आपके रिश्तेदार आपके साथ रहें.

नरेंद्र मोदी: नहीं जी. इससे प्राइवेसी बहुत भंग होती है. और गरीबों से मुझे बहुत एलर्जी है. इसीलिए मैंने अपने गरीब रिश्तेदारों से एक दम से दूरी बनाए रखा है. यहाँ की बात नहीं बल्कि गुजरात में भी मैं उन्हें आपने पास फटकने नहीं देता था. हाँ, जब जनता से वोट मांगने होते हैं तो कभी कभी माँ से मिलने जाता हूँ. उनका आशीर्वाद लेते हुए फोटो डाल देता हूँ. इससे फायदा तो बहुत होता है.

अक्षय कुमार: आपके बारे में सुना है कि आप लोगों से काम बहुत करवाते हो.

नरेंद्र मोदी: देखो. मैं जब काम नहीं करूंगा तो दुसरे लोगों को तो काम करना ही होगा. मजबूरी है. फकीर आदमी हूँ. काम करने का कभी अभ्यास रहा ही नहीं.

अक्षय कुमार: विपक्षी पार्टी में आपके दोस्त हैं.उनके साथ कभी खाना पीना होता है.

नरेंद्र मोदी: बहुत अच्छे अच्छे दोस्त हैं. मैं जेल नहीं गया गुजरात दंगे के बाद, अभी राफेल में भी बचा हुआ हूँ यह सब उनकी ही वजह से तो है. और उनके साथ खाना पीना तो छोडिए हम तो बड़े बड़े डील करते हैं. सब इसी का तो कमाल है. विपक्ष के साथ जब तक अच्छे संबंध नहीं होंगे आप सरकार चला ही नहीं सकते. डॉ मनमोहन सिंह ने वही तो गलती की. वरना आज वह प्रधानमंत्री बने रहते.

अक्षय कुमार: अगर आपको अलाउद्दीन का चिराग मिल जाएगा तो आप अपनी तीन कौन सी इच्छा पूरी करेगे?

नरेंद्र मोदी: मेरी तो बस एक ही इच्छा मैं 2019 का चुनाव किसी तरह जीत जाऊं लेकिन दुर्भाग्य है कि भारत में ऐसे किस चिराग की कल्पना ही नहीं है. मुझे लगता है कि यह चिराग आखिर अलाउद्दीन खिलजी के पास ही क्यों था. इस पर मैंने शोध नहीं किया है लेकिन सोचता हूँ कि योगी जी को बोलूँ कि इसके नामकरण के बारे में कुछ सोचें.

अक्षय कुमार: रिटायरमेंट के बाद आपका क्या प्लान है?

नरेंद्र मोदी: देखिए मैं आडवाणी जी का भक्त हूँ. रिटायरमेंट के बारे में कभी सोचा ही नहीं. हाँ, यह डर है कि कहीं मुझे ज़बरदस्ती रिटायर न कर दिया जाए.

अक्षय कुमार: अच्छा मैंने सुना है कि आप सिर्फ साढ़े तीन घंटे ही सोते हैं? 7 घंटे तो सोना ही चाहिए सबको?

नरेंद्र मोदी: यह बात आप की सही है. असल में आधा काम करने का अभ्यस्त हो चुका है. मैंने आज तक अपने जीवन में कभी कोई काम पूरा नहीं किया. इसीलिए मैं सोता भी आधा ही हूँ. अब आप मेरी शादी पर मत जाना. ओबामा ने भी मुझसे यही प्रश्न पूछा था. हम दोनों एक दुसरे से तू ताम करके बोलते हैं. तो उनहोंने मुझसे पुछा था कि ‘तू इतना कम क्यों सोता है?.

अक्षय कुमार: अच्छा लेकिन आप कैसे समझ जाते हैं कि वह अंग्रेजी में तू बोल रहा है. अंग्रेजी में तू ताम के लिए तो ऐसा कोई शब्द है ही नहीं?

नरेंद्र मोदी: पैक-अप….

अक्षय कुमार: सर, ऐसा मत करो. एक सवाल आखरी, प्लीज. आप को जुकाम होता है तो आप क्या करते हैं?

नरेंद्र मोदी: मुझे ज़ुकाम होता ही नहीं. मैं ने कहा न कि मैं आम आदमी हूँ ही नहीं.

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