बिहार बना क्राइम का गढ़, चौबीस घंटे तीन मर्डर




बिहार में जहां एक तरफ राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं वहीँ दूसरी तरफ आपराधिक घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा रहा है. 2018 के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से लेकर मई तक रेप और मर्डर जैसे जघन्य अपराध लगातार बढ़े हैं.

सभी हत्याओ के केस तो दर्ज हुए लेकिन अभी भी क्षेत्र में दहशत व्याप्त हैं. अधिकारी चुप्पी साधे हैं तो राजनेता भी आँख बंद किये हैं. कहने को तो राजनीती दलित-महादलित, अल्पसंख्यक के उत्थान के लिए हो रही हैं लेकिन हत्या के सिलसिले रुक नहीं रहे हैं.

इसी हफ्ते मंगलवार से बुधवार के बीच बिहार में तीन मर्डर की घटनाए हुई. बिहार के बेगूसराय जिले में शुक्रवार को भीड़ ने तीन युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. इतना ही नहीं बिहार के रोहतास जिले के डेहरी में भीड़ द्वारा एक महिला ही हत्या कर दी है.

इस मामले में बिहार के नवादा जिले की बात करें तो पिछले दो महीने में एक ही जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 21 दलितों की हत्या हुई वहीँ दुष्कर्म के 4 मामले दर्ज हुए. नवादा जिले के प्रशासनिक थाना अध्यक्ष ने मई महीने में 12 हत्याओं की घटनाओं के विषय में बताया.

हालांकि बिहार के नवादा जिले में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओ और हत्याओं के विषय में नवादा जिला प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

पिछले एक महीने में राजधानी के कम से कम चार दारोगा सस्पेंड हो चुके हैं और दो थानों के पुलिसकर्मी लाइन हाजिर हो चुके हैं. इसके बावजूद एसएसएसपी मनु महाराज के क्राइम कंट्रोल की कोशिशें फेल हो जाती हैं.

बिहार की राजधानी हो या अन्य जिलों की स्थिति सभी एक सामान ही है जहाँ समस्तीपुर, बेगूसराय जैसे इलाकों से हर दिन लूट, डकैती और मर्डर की खबरें आती हैं. पटना के खाजेकलां में सरेआम दो दिन पहले एक व्यापारी की हत्या कर दी गई.

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