सीएजी एक राजनितिक शस्त्र की तरह कार्य करती हैं : हफीज़




-प्रेस विज्ञप्ति

लखनऊ, 28 अक्टूबर : कल 27 अक्टूबर को लखनऊ के आल इंडिया कैफ़ी आज़मी अकेडमी में सेन्ट्रल फॉर सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्था (CSRD) द्वारा “ऐसे बना हैं देश मेरा” नामक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया| गोष्ठी के आयोजन का उद्देश्य संविधान और संवैधानिक संस्थाओ के ऊपर चर्चा करना था | गोष्ठी के मुख्य वक्ता रिटायर्ड न्यायाधीश श्री हैदर अब्बास रज़ा ने कहा देश आम आदमी को बराबरी और न्याय दिलाने के लिए ही न्यायपालिका गठन किया गया था | युवा नेत्री आस्था तिवारी ने कहा की आज के दौर के चुनाव आयोग का गठन निष्पक्ष चुनाव करने के लिए जाना जाता हैं, लेकिन कुछ एक मामलो में धन बल के कारण अपराधिक छवि के लोग जीत जाते हैं | युवा नेता हसीब खान ने कहा की चुनाव आयोग में पूर्व निर्वाचन आयुक्त श्री टी एन शेसन ने जिस तरह से चुनाव में सुधार किये हैं वो काबिले तारीफ़ हैं | हफीज किदवई ने कहा की जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओ का गठन आम लोगो के जीवन में सामाजिक न्याय और समाजवाद स्थापित करने के लिए किया जाता हैं लेकिन कुछ एक मामलो में देखे ये संस्थाए राजनितिक पार्टियों की मशीनरी की तरह कार्य करती नजर आती हैं, जैसे हम सीएजी को ही ले लें |

पूर्व सीएजी टी एन चतुर्वेदी जिनको पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गाँधी की सरकार के ऊपर बोफोर्स घोटाले की रिपोर्ट दी थी,और राजनितिक गलियारों में तूफ़ान सा मच गया था लेकिन आज तक उस पर कोई ठोस प्रमाण न दे सके | रिपोर्ट के बाद ऐसा क्या हो जाता हैं की श्री चतुर्वेदी के रिटायर होने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करती हैं और भारतीय जनता पार्टी उन्हें राज्यसभा की सदस्यता और कई राज्यों राज्यपाल बना देती हैं | उसके बाद आते सीएजी विनोद राय पर जिन्होंने 2 जी घोटाले पर रिपोर्ट दी और नै सरकार आने के बाद उन्हें भी पदम विभूषण जैसे पुरूस्कार से सम्मानित किया जाता हैं |उनकी भी कई मंत्रियो से बचपन से ताल्लुकात रहे | इसलिए हमे लगता वर्तमान परिदृश्य में संवैधानिक संस्थाओ का रजनीतिक शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करके देश में राजनैतिक रूप से अस्थिरता पैदा करते हैं | मौके दर मौके संवैधानिक संस्थाओ के मुखियाओ को उच्च पदों पर शुसोभित करके उनके द्वारा किये गये एहसान का ऋण चुकाया जाता हैं | श्री किदवई ने आगे कहा की आम जनता से ये उम्मीद की जाती हैं की वे संवैधानिक संस्थाओ पर सवाल न उठाये क्यूंकि ये संस्थाए सभी के अधिकारों से ऊपर हैं | हम ये मानते हैं की संवैधानिक संस्थाओ पर सवाल न उठाया जाए पर उनके निर्णय,रिपोर्ट और बयान लोगो के कभी कभी भरोसे को कम कर देते हैं |उसपर बात की ही जानी चाहिए.देश का एक ज़िम्मेदार नागरिक सदैव अपनी संस्थाओ,संविधान पर चर्चा करता रहेगा.आजतक देश में जो लोकतंत्र जिंदा है इसमें बड़ा हाथ इन संवैधानिक संस्थाओ का ही हाथ है.

ऐसे बना है देश मेरा के अंतर्गत संवैधानिक संथाओ पर परिचर्चा में वक्ता अविनिश मिश्र,सलमान चौधरी,संदीप वर्मा,बिभास श्रीवास्तव,विशाल,मनीष आदि थे.सभी ने अलग अलग संस्थाओ पर जानकारी,उनके प्रयोग और वर्तमान परिस्थिति पर बोला साथ ही आगाह किया की हम सबकी ज़िम्मेदारी है की हम अपनी संवैधानिक संस्थाओ को जाने उनपर नज़र रखे ताकि अपने देश के लोकतंत्र की बुनियाद को आने वाले भविष्य में मजबूत बनाए रखें. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश हैदर अब्बास राजा जी ने की और मुख्या वक्ता ताहिरा हसन जी और डा रमेश दिक्षित जी थे.इन्होने संवैधानिक संस्थाओ की निरपेक्षता और कार्यों और इनके इतिहास पर प्रकाश डाला.कार्यक्रम का संचल मशहूर आरजे मनीषा चौधरी ने किया. और साथ ही सुप्रीम कोर्ट की बनावट और फैसलों पर अपने विचार रखे.

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