कैग रिपोर्ट ने खोले भाजपा सरकार के झूठे दावे




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्तूबर, 2014 को ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया था. उसके तहत ग्राम पंचायतों को वर्ष 2019 तक खुले में शौच से मुक्ति के संकल्प तक पहुंचने की जल्दबाजी में सरकार ने राज्य को ओडीएफ घोषित कर दिया. लेकिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने सरकार के इस दावे को झुठला दिया है.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में गंगा नदी के जीर्णोद्धार, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के संबंध में भी खुलासे किए. कैग के मुताबिक, गंगा की सफाई के लिए 25 से 58 फीसदी बजट इस्तेमाल ही नहीं हुआ, 132 ग्राम पंचायतों में 265 गांवों के खुले में शौच से मुक्ति का दावा गलत था और वर्ष 2017 में 50 फीसदी के मुकाबले 14.71 प्रतिशत बस्तियों (आबादी) को ही 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन मिल पाया.



कैग की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि शराब का उत्पादन करने वाली प्रदेश की तीन डिस्टिलरियों (शराब फैक्ट्री) ने पर्यावरणीय मानकों की धज्जियां उड़ाईं लेकिन उनसे सरकार ने निर्धारित जुर्माना तक नहीं वसूला. इससे प्रदेश को 346.53 करोड़ रु. के राजस्व की चपत लगी.

वहीँ रिपोर्ट में 132 ग्राम पंचायतों के 265 गांवों के खुले में शौच से मुक्त होने का दावा गलत बताया है।

(इनपुट इंडिया टुडे)

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