ओपिनियन

मप्र निकाय चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए उम्मीद भरे?

–ऋतुपर्ण दवे मध्य प्रदेश के हालिया निकाय चुनावों के नतीजों को भाजपा के लिए खतरे की घंटी कहें या कांग्रेस के आंगन में किलकारी, नहीं पता। अलबत्ता, दोनों ही दलों को 9-9 स्थानों पर जीत […]

ओपिनियन

महान संस्थाएं दरक रही हैं, भटक रही हैं

-मनीष शांडिल्य शुक्रवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने परंपराएं तोड़ते हुए आजाद भारत के इतिहास में पहली बार प्रेस-कांफ्रेस कर यह बताया कि उनके मुताबिक देश का लोकतंत्र खतरे में […]

ओपिनियन

धर्मो के रास्ते अलग, ध्येय किंतु एक : स्वामी विवेकानंद

 –जितेंद्र गुप्ता  नई दिल्ली, 11 जनवरी । ‘उठो, जागो और तब तक रुको नहीं, जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए’, ‘यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दूसरों के लिए […]

ओपिनियन

ठंडा क्यों पड़ गया है चिपको आंदोलन?

–सरोज कुमार नई दिल्ली, 9 जनवरी | वर्ष 1970 के दशक के चिपको आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हिमालय में वनों की कटाई पर 15 साल के लिए रोक लगाने, 1980 का वन […]

ओपिनियन

लोकतांत्रिक देश में पार्टियां प्राइवेट लिमिटेड!

–ऋतुपर्ण दवे पटना, 7 जनवरी|इसमें कोई शक नहीं कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिस पर गर्व भी है। सच्चाई भी है कि सरकार केंद्र या राज्य कहीं भी हो, पार्टियों के अंदर […]

ओपिनियन

सोच पर पहरा

–कृष्ण मुरारी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जब कांग्रेस मुक्त भारत अपने हालिया चुनावी भाषणों में बोलते हैं, तो मेरे जैसे आदमी को पता नहीं क्यों, विपक्ष मुक्त भारत सुनाई देता है। एक समय कांग्रेस देश-समाज […]

ओपिनियन

पुरखों की शहादत याद करने का भी दिन है पहली जनवरी

-मनीष शांडिल्य तथ्यात्मक रूप से महारों और पेशवा फौजों के बीच हुए इस युद्ध को विदेशी आक्रांता अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय शासकों के युद्ध के तौर पर भी देखा जाता है. कुछ इस घटना को […]

ओपिनियन

गुजरात के नतीजे साफ हैं कि लोकतंत्र संभल रहा है

-मनीष शांडिल्य कल इस वक्त तक बहुचर्चित गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजे संभवतः साफ हो जांएगे. लेकिन सीटों के आंकड़ों से इतर गुजरात चुनावों का एक नतीजा पहले से ही साफ है कि भारतीय लोकतंत्र […]

ओपिनियन

बिहार में आधी आबादी और हिंसा : एन.सी.आर.बी. के आंकड़े से

–रणविजय राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) ने वर्ष 2016 में हुए अपराध के आंकड़े जारी किया है. इस रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो बिहार दहेज़ हत्या के मामले में दूसरे स्थान पर है. […]

ओपिनियन

राम जन्मभूमि विवाद पर क्या अमित शाह भागवत से भी सवाल पूछेंगे?

-मनीष शांडिल्य माना जाता है कि चुनावी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी आज जिस बुलंदी पर खड़ी है उस मकाम तक उसे पहुंचाने में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की बहुत अहम भूमिका रही है. ऐसे […]