JNU: प्रवेश परीक्षा पैटर्न में बदलाव पिछड़े तबके के छात्रों को और पिछड़ा बनाकर छोड़ने की कवायद




JNU ने अपने इंटरेंस परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया किये जाने के बाद अब यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए ऑनलाइन टेस्ट देने के साथ इस साल से ‘मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन’ आधारित होने की घोषणा की है।

यूनिवर्सिटी ने एक नोटिफिकेशन में जानकारी दी है कि इस बार परीक्षा 27-30 दिसंबर के बीच हो सकती हैं। हालांकि इससे पहले एडमिशन फॉर्म सितंबर तक आ जाते थे, लेकिन इस बार ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने की वजह से एडमिशन फॉर्म भी अब तक नहीं आ सका है।

इस मामले में जेएनयू छात्रसंघ ने ऑनलाइन परीक्षाओं का विरोध करते हुए ये आरोप लगाया है कि ये पिछड़े तबके के छात्रों को और पिछड़ा बनाकर छोड़ने की कवायद है। हजारों गांव के बच्चे जेएनयू में पढ़ते हैं, उन्हें परीक्षाओं के समय सेंटर का पता होता है, वो आकर एग्जाम देते हैं, अब ऑनलाइन एग्जाम के इस दौर में कभी टेक्नोलॉजी उनके लिए बाधा बनेगी, तो कभी इंफ्रास्ट्रक्चर। ऐसे में इन परीक्षाओं से जेएनयू का सोशल स्ट्रक्चर ही बिगड़ जाएगा।



बता दें कि अब तक जेएनयू इसी साल बनी 12 मेंबर वाली कमेटी के जरिए जेएनयू के वाइस चांसलर ने ये फैसला किया है। लेकिन इस फैसले पर भी सवाल खड़े होते हैं। अगर इसी साल से पैटर्न में बदलाव करना था, तो जेएनयू में दाखिले की तैयारी करने वाले छात्रों को पहले से क्यों नहीं बताया गया? हड़बड़ी में फैसला लेने का क्या मतलब है?

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