आम आदमी बनाम ख़ास आदमी




-शब्बीर आलम

(शब्बीर आलम फुलवारी शरीफ़ के खलीलपुरा बस्ती के रहने वाले हैं. फुलवारी शरीफ़, पटना से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.)

आम आदमी होना बहुत ही दुखद है – ऊपर से गरीब हों तो फिर तो आपको इंसान न होने का प्रमाण-पत्र ही मिल जाता है. इसका मुझे आज पक्का एहसास हो गया.

आज मैं अपने लिए पटना के फुलवारी शरीफ़ ब्लाक गया था. फुलवारी शरीफ़ ब्लाक बिहार की राजधानी पटना से 7 किलो मीटर दूर है. मैं काफ़ी दिनों से बीमार हूँ. मुझे ऑपरेशन के लिए बैंगलोर जाना है. पैसे के लिए प्रधान मंत्री को भेजना था जिसके लिए मुझे आय और आवासीय चाहिए था. मैंने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. कल यानी 26 फ़रवरी का राईट टू सर्विस के अंतर्गत समय दिया गया था. समय पूरा होने के बाद मेरे मोबाइल पर सन्देश नहीं आया तो आज मैं गया. काउंटर नंबर 2 पर गया तो बैठे बाबू ने ऑनलाइन आवेदन का प्रिंट माँगा जो मेरे पास नहीं था. मैंने कहा कि मेरे पास आवेदन की प्रति नहीं है लेकिन डिजिटल इंडिया अभियान का प्रशंसक होने के नाते मेरे पास उसकी डिजिटल पावती मौजूद है. बाबू ने कहा कि नहीं होगा. कल 11 बजे प्रिंट लेकर आना होगा. साथ में ज़मीन की रसीद भी लानी होगी. और पहचान पत्र भी. मैंने बन्धु से आग्रह किया कि मामला थोड़ा ज़रूरी है – मुझे ऑपरेशन के लिए जाना है, आप कृपा करें. इस पर बाबू को थोड़ा गुस्सा आया. उनहोंने कहा कि नहीं आपको लाना ही होगा. मैंने कहा कि ठीक है ले आता हूँ प्रिंट. लेकिन यह बताइए कि एक घंटे में आऊँ तो मिल जाएगा तो उन्होंने कहा कि नहीं तीन बजे के बाद कंप्यूटर लॉक हो जाता है. कल 11 बजे ही अब मिलेगा. यह थी आम आदमी की कहानी जिसे दुत्कार कर काउंटर से भगा दिया गया.

मैं बहुत मायूस हो कर निकल ही रहा था कि मुझे मेरे जान पहचान के एक नेता जी मिल गए. मैं ने उनसे कहा कि मुझे आय और आवासीय अभी चाहिए मैं इस हाल में बार बार आ जा नहीं सकता. मुझे प्रधान मंत्री को अपने ऑपरेशन के लिए सहायता पाने के लिए इसे दिल्ली भेजना है. मेरा एक दिन का समय बच जाएगा. उनहोंने कहा कि चलिए. अंदर आए और वह बड़ा बाबू के पास गए जिनका नाम भूषण था. कहा कि भूषण जी, इनका आय और आवासीय है थोड़ा निकलवा दीजिए. बस क्या था बड़े बाबू ने छोटे बाबू से कहा और मुझे बिना पहचान पत्र और ज़मीन की रसीद दिए हुए ही दोनों पत्र मिल गए.

आज मुझे एहसास हुआ कि भारत में आम आदमी रहने का मतलब दरिद्रता, बेचारगी के सिवा कुछ नहीं है. काम करवाना है तो ख़ास बनना होगा या ख़ास का इस्तेमाल करना होगा.

(आम आदमी के तौर पर अगर आपकी कोई समस्या हो तो हमें बताएं, हम आपकी समस्या को लोगों को बताएंगे, हो सकता है कि आपकी बात बड़े अधिकारियों तक पहुंचे और आपकी मुश्किल आसान हो जाए. हमें लिखने का पता tmcdotin@gmail.com है.)

 

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