दलित-मुस्लिम कवायत पर ही चलेगा कांग्रेस का फारवर्ड कार्ड




बिहार में जिस तरह सियासत की रंगमंच तैयार की जा रही है कांग्रेस ने बिहार में भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की पूरी तैयारी कर चुकी है. कांग्रेस का यह सवर्ण कार्ड तभी चल पायेगा, जब उसके साथ पिछड़े और अतिपिछड़े व मुस्लिम वोटरों की ताकत होगी.

कांग्रेस में हाल के दिनों में छह बड़ी नियुक्तियां हुई हैं. इनमें एक ब्राह्मण, दो भूमिहार, एक राजपूत, एक मुस्लिम और एक दलित नेता को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. प्रदेश कांग्रेस की कमान विधान परिषद के सदस्य मदन मोहन झा को सौंपी गयी है. इनका कार्यकाल 2020 में खत्म हो रहा है.

लोकसभा की 40 सीटों पर एनडीए को पटखनी देने की योजना के तहत जो ताना बाना बुना गया है, उसी के तहत सवर्ण नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है. हालांकि पिछली विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ आया था.

अगर पिछली विधानसभा चुनाव पर नज़द डालें तो चंपारण की नरकटियागंज की सीट पर विनय वर्मा की जीत हुई. यहां भी उनकी बिरादरी के उम्मीदवार के मुकाबले कांग्रेस को अधिक वोट मिले. बक्सर की सीट पर कांग्रेस के मुन्ना तिवारी को भाजपा के प्रदीप दुबे के मुकाबले अधिक वोट मिले.

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