मोदी की आलोचना देश की आलोचना नहीं: राजदीप सरदेसाई




राजदीप सरदेसाई अपने पुस्तक 'न्यूज़मैन: ट्रैकिंग इंडिया इन मोदी एरा' के लांच के दौरान पटना में

 

राजदीप सरदेसाई ने कहा कि आज आप सिनेमा में राष्ट्रगान के समय खड़े हो जाइए यही देशप्रेम है चाहे आपका अकाउंट स्विस बैंक में ही क्यों न हो. आप राष्ट्रगान में खड़े हो गए बस आपको देशप्रेमी का सर्टिफिकेट मिल गया. महाराष्ट्र में आप बीफ खाते हैं तो आप देशद्रोही और हिन्दू विरोधी हो गए लेकिन यही बीफ आप गोवा में खाते हैं तो ठीक है. नार्थईस्ट में आप बीफ़ खाते हैं तो कोई बात नहीं. उनहोंने कहा कि यह राष्ट्र विरोध की बात नहीं और न ही हिन्दू विरोध की कोई बात है. यह बस राजनीति है. जहाँ बीफ खिला कर वोट मिल सकते हैं वहां बीफ खिलाएंगे, जहाँ बीफ पर वोट नहीं मिलेंगे वहां बीफ बंद कराएंगे.

“आज चैनल हर रोज़ देशद्रोही बना रहे हैं. आज हम हर दिन इसी तलाश में रहते हैं कि किस मुर्गे को देशद्रोही बनाया जाए. सिद्धू किसी से पाकिस्तान में गले मिल लेते हैं और वह देशद्रोही बन जाते हैं. आज हमसे जब लोग कहते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ तो हम तो कहते हैं कि हम चले जाएंगे लेकिन पकिस्तान हाई कमीशन हमें वीज़ा नहीं देता. वहां के लिए एक ही फ्लाइट है. अहमदाबाद के टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एडिटर पर देशद्रोह का मामला हो जाता है. नामी समाजशास्त्री आशीष नंदी पर देशद्रोह का मामला लगा दिया जाता है. नवजोत सिद्धू पर एफआईआर कर दिया जाता है. महात्मा गांधी पर आज़ादी से पहले देशद्रोह का मामला लगा था. तब महात्मा गांधी ने कहा था कि देश की आज़ादी के बाद सबसे पहले देशद्रोह के कानून को खत्म करेंगे. अँगरेज़ देश छोड़ कर चले गए कानून अब तक है.” यह बात रविवार को इंडिया टुडे समूह के वरिष्ठ और चर्चित पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कही.

राजदीप सरदेसाई आज बिहार कलेक्टिव द्वारा आयोजित अपने बुक न्यूज़मैन: ट्रैकिंग इंडिया इन मोदी एरा के लांच के कार्यक्रम में यह बात बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सभागार में सैकड़ों की संख्या में आए श्रोता से कह रहे थे.

उनहोंने कहा कि आज पत्रकार बंट गए हैं. आज किसी मामले को लेकर कोई नहीं बोलता. हम पत्रकार ही बंट गए हैं. उनहोंने राजीव गांधी के मानहानि क़ानून का हवाला देते हुए कहा कि जब राजीव ने 1988 में यह कानून लाया था तब पत्रकार सड़क पर आए थे. उस वक़्त राजीव की सरकार को वह क़ानून हटाना पड़ा. आज वह नहीं है. आज हम सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलते हैं. हम सब बंटे हुए हैं और डरे हुए हैं.

उनहोंने कहा कि आज आप सरकार की सराहना करते हैं तो कहा जाता है कि आप बिक गए हैं. मोदी जी ने खरीद लिया है. सरकार की आलोचना करते हैं तो कहते हैं कांग्रेसी है. बाग़ी है. पत्रकारिता कैसे की जाए? पत्रकारिता तो बग़ावत का ही नाम है. पत्रकार को तो बाग़ी ही होना चाहिए.

उनहोंने कहा कि एक साल पहले मेरी मित्र गौरी लंकेश को मार दिया गया. हमने उनके लिए शोक सभा दिल्ली के प्रेस क्लब में किया था. बहुत कम पत्रकार आए. मेरे पत्रकार दोस्त जो नहीं आए उनहोंने कहा कि वह तो नक्सली थी. बहुत सारे पत्रकारों ने कहा कि अच्छा हुआ मर गयी. ऐसे लोगों का हश्र ऐसा ही होना चाहिए. प्रधानमंत्री ऐसे लोगों को ट्विटर पर फॉलो करते हैं. क्या प्रधानमंत्री को ऐसे ही लोग मिलते हैं फॉलो करने के लिए.

पहले इस तरह की बात किसी पार्टी का छोटा मोटा व्यक्ति कहता था. अब तो पार्टी के बड़े नेता ऐसी बात कहते हैं. हमें प्रधानमंत्री न्यूज़ ट्रेडर कहते हैं. हमें कारोबारी कहते हैं. हमें प्रेस्टीटयूट कहा जाता है.

कांग्रेस की सरकार में भी ऐसा होता था लेकिन इतना नहीं होता था. आज सरकार में तानाशाही आ गयी है. आज सरकार किसी एंकर से नाखुश है तो उसको चैनल से निकलवा देती है. उसके प्रोगाम के दौरान स्क्रीन को ब्लैक कर दिया जाता है. आज सरकारों को पत्रकार की ज़रुरत नहीं. आज सरकार मालिकों से बात करती है.

आज चैनल का बायकाट किया जाता है. पहले भी होता था यह सब लेकिन यह नहीं कहा जाता था कि हम इस चैनल का बायकाट करेंगे. आज सरकार का कोई जॉइंट सेक्रेटरी भी फ़ोन करके कह सकता है कि आप इस चैनल में नहीं जाएंगे. आज सरकार के स्तर पर चैनल का बायकाट किया जा रहा है.

आज आप से कहा जाता है कि आप सवाल मत पूछिए. 4 साल हो गए आज तक प्रधानमंत्री ने कोई प्रेस कांफ्रेंस नहीं किया. वह मन की बात करते हैं जन की बात करते ही नहीं हैं. वह देश के महाराजा बन गए हैं. वह देश की बात सुनना नहीं चाहते बल्कि अपनी बात देश को सुनाते हैं.

उनहोंने कहा कि यह केवल मोदी जी के साथ ही नहीं बल्कि यह नीतीश कुमार के साथ भी है. वह भी डिक्टेटर की तरह पत्रकारों पर काबू करना चाहते हैं. वह भी पत्रकारों को सवाल पूछने नहीं देते हैं.

उनहोंने एबीपी चैनल का हवाला देते हुए कहा कि एबीपी न्यूज़ चैनल ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई खबर चला दी तो दुसरे दिन रामदेव एबीपी को धमकी देते हैं कि वह एबीपी से अपना सारा विज्ञापन ले लेंगे. वह तो एडवरटाइजर हैं उनका क्या काम सरकार की अच्छाई और बुराई से. वह तो व्यापारी हैं. लेकिन नहीं. उनकी सरकार से सांठ गाँठ है. दोनों में कनेक्शन है. इसी को क्रोनिज्म कहते हैं.

सवाल यह है कि हम पत्रकार चुप क्यों हैं? उनहोंने कहा कि हम चुप इसलिए हैं क्योंकि हमारी रीढ़ कमज़ोर हो गयी है. उनहोंने कहा कि आडवाणी ने 75 की इमरजेंसी के दौरान सही कहा था कि सरकार ने हमें कहा कि झुको तो हम लेट गए. आज हम लेट गए हैं. आज हम सब लेटे हुए हैं.

अभी दो दिन पहले पटना हाई कोर्ट के जज आदेश दे देते हैं कि मीडिया मुज़फ्फ़रपुर केस को कवर नहीं करेगा. कोई मीडिया का आदमी इस पर कुछ नहीं बोला. पत्रकार इसको लेकर सड़क पर नहीं आए. 48 घंटे हो गए. अब तक पत्रकारों को सड़क पर आकर इसका विरोध करना चाहिए था लेकिन यह नहीं हुआ.

सरदेसाई ने कहा कि आज सभी संस्थाओं को ख़त्म किया जा रहा है. मीडिया भी एक संस्था है. इसे भी ख़त्म किया जा रहा है. उनहोंने संसद के बारे में कहा कि संसद आज कम बैठती है. इसको ज्यादा बैठना चाहिए था. उनहोंने कहा कि इस साल फ़रवरी में देश का बजट किसी बहस के बगैर 25 मिनट में पास हो गया. भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि कोई फाइनेंसियल डॉक्यूमेंट बिना बहस के पास हो गया. देश का बजट 25 मिनट में बिना किसी बहस के पास हो गया. किसी ने उस पर आवाज़ नहीं उठाई.

नोटबंदी पर उनहोंने कहा कि इस देश की कैबिनेट एक बहुत बड़ा फैसला ले लेती है और संसद को खबर नहीं होती यहाँ तक कि पूरी कैबिनेट को खबर नहीं होती. इस फैसले का प्रभाव हम पर सबसे ज्यादा होता है. रिज़र्व बैंक को आखरी मिनट में बताया जाता है. वह रिज़र्व बैंक जो देश का सबसे बड़ा बैंक है. जहाँ हमारे पैसे जमा होते हैं. कहा गया था कि इससे कैश फ्लो कम हो जाएगा. आतंकवाद कम हो जाएगा. क्या कम हुआ? इस फैसले के चलते देश के सबसे बड़े इकोनॉमिस्ट को नज़रअंदाज़ कर दिया गया.

उनहोंने कहा कि मैं कर्नाटक के चुनाव में था. वहां अगर आप मेरे साथ होते तो देखते कि कैसे कैश का इस्तेमाल हुआ. उनहोंने कहा कि मुझसे ऑफ द रिकॉर्ड कई उम्मीदवारों ने कहा कि एक एक चुनाव में करोड़ों खर्च हुए. पूरा का पूरा काला धन. काला धन अगर खत्म हो गया नोटबंदी के बाद तो यह कहाँ से आया? उनहोंने कहा कि आज नेता कैश खर्च करेंगे और जनता क्रेडिट और डेबिट कार्ड से खर्च करेगी. आज 1000 के बदले 2000 के नोट का इस्तेमाल हो रहा है. लिफ़ाफ़े छोटे हो गए हैं. नक़दी का चलन वहीँ का वहीँ है. काला धन वहीँ का वहीँ है.

उन्होंने कहा कि आज न्यायपालिका को देख लीजिए. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एक इमानदार जज का नाम मोदी सरकार को भेजते हैं और मोदी सरकार उस ईमानदार जज का नाम तीन बार बेईज्ज़त कर के वापस कर देती है. आज चीफ जस्टिस पर बेईमानी का आरोप लगता है. न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि चार जज प्रेस कांफ्रेंस करके चीफ जस्टिस के खिलाफ बोलते हैं. आज यह सब हो रहा है.

सवाल यह है कि आप सरकार पर सवाल नहीं करेंगे, आप न्यायपालिका पर सवाल नहीं करेंगे, आप पत्रकारिता कर रहे हैं और आप एंटी एस्टाब्लिश्मेंट नहीं हैं तो आप कर क्या रहे हैं?

उनहोंने कहा कि आज आप सिनेमा में राष्ट्रगान के समय खड़े हो जाइए यही देशप्रेम है चाहे आपका अकाउंट स्विस बैंक में ही क्यों न हो. आप राष्ट्रगान में खड़े हो गए बस आपको देशप्रेमी का सर्टिफिकेट मिल गया. महाराष्ट्र में आप बीफ खाते हैं तो आप देशद्रोही और हिन्दू विरोधी हो गए लेकिन यही बीफ आप गोवा में खाते हैं तो ठीक है. नार्थईस्ट में आप बीफ़ खाते हैं तो कोई बात नहीं. उनहोंने कहा कि यह राष्ट्र विरोध की बात नहीं और न ही हिन्दू विरोध की कोई बात है. यह बस राजनीति है. जहाँ बीफ खिला कर वोट मिल सकते हैं वहां बीफ खिलाएंगे, जहाँ बीफ पर वोट नहीं मिलेंगे वहां बीफ बंद कराएंगे.

आजका मुद्दा लव जिहाद का है. मुख्तार अब्बास नकवी किसी और समुदाय की लड़की से विवाह कर सकते हैं वह लव जिहाद नहीं है. लेकिन केरल की एक 22 साल की लड़की अपने पसंद के किसी लड़के से शादी कर ले तो वह लव जिहाद है. 22 साल की लड़की को अपने पसंद के लड़के से शादी करने के लिए उसके बाप की इजाज़त चाहिए.

उनहोंने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट का हाल यह है कि वहां लव जिहाद के मामले सुने जा रहे हैं. जहाँ बड़े बड़े मामले आने चाहिए वहां यह मामले आते हैं कि किसी लड़की का किसी दुसरे धर्म के लड़के से शादी करना गलत है या सही.

उनहोंने कहा कि आज इक्कीसवी सदी में हम मंदिर और मस्जिद के लिए लड़ रहे हैं. हो सकता है कि अगले महीने बाबरी मस्जिद पर निर्णय आ जाए. फैसला आ जाएगा और हेडलाइंस होगा हिन्दू की जीत या मुस्लमान की जीत. आज हम इस बात पर लड़ रहे हैं कि उस ज़मीन का मालिक कौन है – हिन्दू या मुस्लमान. बाबर ने 1526 में क्या किया था उस पर आज हम लड़ रहे हैं. उनहोंने कहा कि अगर मैं जज होता तो उस जगह पर मंदिर और मस्जिद बनाने के बजाए अस्पताल और स्कूल बनवा देता.

आज कब्रिस्तान और शमसान का मुद्दा उठाया जा रहा है. इससे ही उन्हें वोट मिलेगा.

उनहोंने कहा कि देश में जब ऐसे हालात हैं तो आपको तय करना होगा कि आपको कैसा देश चाहिए? यह देश बहुत अद्भुत है. इस देश में आज ईद मनाई जाती तो कल दीवाली और फिर क्रिसमस.

उनहोंने कहा कि इस देश को कैसा होना चाहिए यह हमें केरल के मछुआरे से सीखना चाहिए. वहां के मुस्लिम, हिन्दू और इसाई मछुआरों ने मिलकर सब को बचाया. उनहोंने कोई सेल्फी नहीं ली. वहां के असल हीरो न आरएसएस है न लेफ्ट. वहां के असली हीरो वहां के मछुआरे हैं. हमें वैसा ही देश चाहिए.

एक सवाल के जवाब में राजदीप ने कहा कि मोदी की आलोचना देश की आलोचना नहीं है. हमें समझना चाहिए कि मोदी या उनकी सरकार देश नहीं है. हम लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करते हैं और करना चाहिए.

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