नीतीश कुमार के अखाड़ा से निकले ददन ‘पहलवान’, नहीं मिलेगा इस बार विधान सभा का टिकट




नीतीश कुमार ने बक्सर ज़िला के डुमरांव सीट से जेडीयू विधायक ददन पहलवान का इस बार टिकट काट दिया है। इस बार डुमरांव सीट से पार्टी ने अपने प्रवक्ता अधिवक्ता अंजुम आरा को चुनावी मैदान में उतारा है। ददन पहलवान बिहार के कई सियासी दलों में रहे हैं। पहले वह पहलवानी करते थे। अब सियासी अखाड़े में दांव अजमाते हैं। टिकट कटने पर ददन पहलवान की सूत्रों के अनुसार वह स्वतंत्र चुनाव लड़ेंगे।

ऐसा माना जा रहा है कि इसकी वजह डुमरांव में 2018 में समीक्षा यात्रा के दौरान नीतीश कुमार के ऊपर पत्थरबाजी होना है।

इसकी दूसरी वजह नोटबंदी के दौरान ददन पहलवान का गलत कारणों से सुर्खियों में रहना भी हो सकता है। उन्होंने एक कंपनी से लिए लोन को नहीं चुकाया था। जवाब में ददन ने कहा था कि वो राशि 2014 के लोकसभा चुनाव में हेलीकॉप्टर उड़ाने में खर्च कर दिया।

पहलवानी अखाड़े से सियासी अखाड़े तक का सफ़र

दरअसल, यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की तरह ही ददन यादव भी पहलवानी से राजनीति में आए हैं। वह सपा, आरजेडी और जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। राबड़ी सरकार में ददन पहलवान वित्त और वाणिज्य राज्य मंत्री रह चुके हैं। ददन पहलवान का असली नाम ददन यादव है।

ददन पहलवान हेलीकॉप्टर के शौकीन है। 2014 के लोकसभा चुनाव में ददन ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया था। उनका बेटा भी बाप की ही तरह हेलीकॉप्टर का शौकीन है। छोटे बेटे निर्भय यादव अपनी शादी के दौरान दुल्हनिया को लाने के लिए हेलीकॉप्टर गए थे। उस वक्त भी ददन पहलवान की चर्चा खूब हुई थी।

एसपी अमिताभ कुमार दास ने 2005 में नहीं बनने दिया था मंत्री

2005 के दौरान वहां के चुनावी ड्यूटी पर लगाए गए एसपी ने ददन पहलवान की पूरी पहलवानी निकाल दी थी. हुआ यह था कि अमिताभ कुमार दास को चुनाव आयोग ने बक्सर का एसपी बना कर भेजा था जहाँ के विधान सभा क्षेत्र …. से ददन पहलवान स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे.

चुनाव ख़त्म होने के बाद ददन पहलवान ने एक पोलिटिकल वर्कर को बुरी तरह से पीट दिया था और इसकी खबर एसपी अमिताभ कुमार को हो गयी. इसके बाद पहलवान पर एफ़आईआर हुआ और वह जेल भेजे गए. जेल ही में उनके जीत की खबर आई और मंत्री बनने की लालसा भी जगी. लेकिन अमिताभ कुमार की धारा 307 सख्ती ने उनका मंत्री बनने का सपना चूर चूर कर दिया.

Liked it? Take a second to support द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी टीम on Patreon!




Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*