देश क्यों पढ़ेगा जब पकौड़ा ही तलेगा




जेएनयू के एक छात्र के साथ गुदगुदी करते पुलिसकर्मी (चित्र साभार: चन्द्रयान 2)

-समीर भारती

आज सुबह सुबह मेरे एक अंध भक्त मित्र आए और कहने लगे कि आज मोदी जी का करामत आपने सुना, भारत मुक्त आकाश में झाड़ा फिरने से मुक्त हो गया. अब कोई आपको मुक्त आकाश में झाड़ा फिरते हुए नहीं मिलेगा. मैंने कहा कि क्या होगा अगर रास्ते में लग जाए तो? इतना सुनना था कि वह बिदक गया. बोला कि तुम सालों नहीं सुधरोगे. मैंने कहा भाई. सुधर तो आज जाएं अगर तुम मुझे ठीक ठीक तरह समझा दो.

मैंने कहा कि देखो अब तो झाड़ा लगेगा ही नहीं. खाने ही को नहीं है. तुमने सुना क्या कि वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत कितना नीचे आ गया है. क्या तुम्हें पता है गांड से निकालने के लिए मुंह में कुछ डालना पड़ता है? इस पर वह एकदम से उछल गया.

बोला कि कैसी गंदी बात करते हो. सभ्यता तो तुम भूल ही गए. मैंने कहा कि भाई यह राष्ट्रीय बोलचाल की भाषा है. ऐसे ही तो आजकल हमारे नेता भी बोलते हैं.

मैंने अपने अंधभक्त मित्र से पूछा कि यह बताओ कि तुमने सुना कि जेएनयू के छात्रों को मोदी जी की पुलिस ने खूब पीटा है. इस पर उसने कहा कि नहीं मैंने तो यह नहीं सुना कि उनकी पिटाई हुई है, हाँ यह सुना कि उनहोंने बहुत बदतमीजी की है.

जेएनयू बद्तमीजों का अड्डा है शुरू से. जी न्यूज़ बता रहा था कि यह सब राजनीति चमकाने का तरीका बन गया है. सब कन्हैया कुमार बनना चाह रहा है. मैंने पुछा कि कन्हैया कुमार बनना चाह रहा है का क्या मतलब है भाई? तो उसने कहा कि अरे सब का सब अपनी राजनीति चमका रहा है, और क्या? मैंने कहा कि कन्हैया कुमार तो बेचारा पहले पीटा, उसके बाद एमपी के चुनाव में भी हार गया. उस गरीब को तो जनता ने अपना पैसा देकर क्राउडफंडिंग से लडवाया.

अरे तुम नहीं समझते हो यार. यह जेएनयू वाले न, बड़े बदतमीज़ इंसान हैं. तो इस पर मैंने कहा कि अरे क्या तुम्हारा इशारा वर्तमान वित्त मंत्री की तरफ तो नहीं? इस पर वह फिर से बिदका. कहने लगा कि वर्तमान वित्त मंत्री कैसे बदतमीज़ हो गईं. वह तो पढ़ी लिखी महिला हैं. सभ्य हैं. भारत की इज्जतदार मंत्री है. तो मैंने कहा कि अच्छा, तो तुमको पता है यह सब उनहोंने जेएनयू से ही सीखा है. और यह सब उन्हें जेएनयू ने शान्ति काल में दिया. सब चुप चाप दिया. बिना किसी मार-पीट के. वह सब कुछ सीतारमण को दिया जिसकी मांग आज यह बच्चे कर रहे हैं. तो अब बताओ कि यह बदतमीज़ कैसे हो गए?

इतना सुनना था कि वह चुप हो गया. मैंने सोचा कि आज इसका मत परिवर्तन कर ही देते हैं. एक तो मोगाम्बो की गुलामी से आज़ाद होगा. मैंने कहा कि जानते हो जेएनयू से निकले बच्चे पूरे देश के बेहतरीन पदों पर हैं. कैबिनेट सचिव से लेकर कैबिनेट मंत्री तक जेएनयू के यही बदतमीज छात्र हैं.

तुम्हें क्या लगता है कि भारत के वर्तमान विदेश सचिव Subrahmanyam Jaishankar भी बदतमीज हैं. कभी सुना है उनको बोलते हुए? देखा है कभी उनका चेहरा गौर से? वह भी जेएनयू से ही पढ़े हैं.

अरविन्द गुप्ता तुमको बदतमीज लगते हैं? पता है वह कौन हैं? वह भारत के डिप्टी नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर हैं. देखा है कभी उनका चेहरा? सुना है कभी उनकी बात? साक्षी महाराज जैसे बदतमीज कभी लगे क्या वह?

और सुनो, हारून रशीद खान का नाम सुना है. नहीं न सुना है? वह बदतमीज़ इन्सान आज आरबीआई के डिप्टी गवर्नर हैं. वह भी जेएनयू से ही बदतमीजी सीख कर आए हैं और देश की सेवा कर रहे हैं.

और सुनो वेणु राजामोनी का नाम सुना है? भारत के राष्ट्रपति के वह प्रेस सचिव हैं. लगता है कि वह बदतमीज हैं? उनहोंने भी जेएनयू से ही बदतमीजी सीखी है.

सैकड़ों नाम हैं मेरे पास जिन्होंने जेएनयू से बदतमीजी सीखी है और भक्तों को सभ्यता सीखा रहे हैं.

और सुनो यह बच्चे जो आज प्रदर्शन कर रहे हैं वह बच्चे कल वहीँ बैठेंगे जहाँ आज जय शंकर और सीतारमण बैठे हैं. और यह बच्चे भारत की असल तस्वीर हैं, यह वह हैं जो हमारे ही घरों से गए हैं एक सपना लेकर. और यह बदतमीजी नहीं कर रहे हैं. यह हक़ मांग रहे हैं. पढना उनका हक है. वह देश की आत्मा है. वह सड़कों पर संविधान की बात कर रहे हैं. वह जता रहे हैं कि भारत का जो है वह अदानी, अम्बानी और माल्या का ही नहीं है बल्कि उनका भी है. वह बता रहे हैं कि हमको पढाओ क्योंकि हम पढना चाहते हैं. उनके पास रिलायंस के जिओ यूनिवर्सिटी में पढने लायक पैसा नहीं है जिसे मोदी जी ने ज़बरदस्ती Institution of Eminence का अस्तित्व से पहले ही तमगा दे दिया.

और हाँ सुनो मेरे प्यारे पतंजलि च्यवनप्राश के प्रशंसक जो नहीं बिकता है वही टीवी पर दीखता है. इसलिए ज़ी टीवी पर पतंजली च्यवनप्राश का गुलाटी मार विज्ञापन देखकर मत इस्तेमाल करो. जिह्वा से चखो, मस्तिष्क से सोचो और फिर खरीदो. आखिर भगवान ने यह जो सोचने, समझने की शक्ति दी है वह किस दिन काम आएगी. और बेटा, जुलाब आने से पेट साफ नहीं होता है वह फ़ूड पाइजनिंग भी हो सकता है.

अच्छा यह बताओ कि नौकरी लगी कि नहीं? इस पर भक्त रो पड़ा और कहा कि अरे भाई बाबूजी कह रहे हैं कि नौकरी तो मिलने वाली नहीं. एयर इंडिया और BPCL बिक रहा है. अब प्राइवेट रेलगाड़ियाँ सरकारी पटरी पर चल रही हैं. सरकारी बैंकों को भी अब मर्ज ही किया जा रहा है तो ऐसा करो कि पकौड़ा ही 2024 तक बेचो. फिर देखा जाएगा. मोदी जी अगर फिर से आ गए और कुछ नया धंधा सजेस्ट किया तो इसको बदल देंगे.

मैंने कहा कि एकदम सही सोचा है बेटा. आखिर देश कैसे बढेगा जब तक पकौड़ा नहीं तलेगा? बस इतना ख्याल रखना कि तेल बढ़िया वाला इस्तेमाल करना. टीवी देखकर तेल का चयन मत कर लेना.

(डिस्क्लेमर: यह किसी की शान में  कोई गुस्ताखी नहीं है. इसे कोई दिल पर न ले. लेना ही है तो गुर्दे पर ले और पेशाब के रास्ते बाहर कर दे.)

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