बेवड़े पार कराएंगे डूबती अर्थव्यवस्था की नैया?




दिल्ली में शराब की एक सरकारी दुकान पर जुटी भीड़ (साभार: ट्विटर)

कोरोना वायरस को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए लॉक डाउन में अब धीरे धीरे ढील दी जा रही है. लेकिन इस ढील से विवाद बढ़ता जा रहा है. पहले अप्रवासी मजदूरों से रेल का किराया वसूलने पर केंद्र सरकार की आलोचना थमी नहीं थी कि शराब की दुकाने खोल कर एक नई मुसीबत सामने आई लगती है.

राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में शराब की दुकानें 22 मार्च से बंद थीं. लेकिन अब केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद कई प्रदेश की सरकारों ने शराब की दुकानों के खुलने को मंज़ूरी दे दी है.

शराब की दुकानें तीनों ज़ोन यानी रेड, ऑरेंज और ग्रीन में खुलेंगी. हालाँकि रेड ज़ोन में शराब की दुकानें खुलने को लेकर कुछ शर्तें भी लागू हैं. सरकार ने लोगों से शराब की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का ख़याल रखने को कहा है.

सोशल डिस्टेंसिंग के इस नियम के तहत दो व्यक्तियों के बीच कम से कम छह फ़ीट की दूरी रखने और एक समय में पाँच से अधिक व्यक्तियों की मौजूदगी नहीं होने की बात कही गई है.लेकिन सोमवार को देश के विभिन्न हिस्सों से जो वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर आ रही हैं, उसमें संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गयी है.

कुछ दुकानों पर सुबह होते-होते लाइन एक किलोमीटर तक पहुंच गई है और सोशल मीडिया के नियमों को ताक पर रख दिया गया है. राजधानी दिल्ली में कई जगह शराब की दुकानों के बाहर सुबह से ही लंबी लाइनें देखी गई.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक कश्मीरी गेट इलाके में सोशल डिस्टेंसिंग नियमों की अनदेखी होने पर पुलिस को मामूली लाठीचार्ज भी करना पड़ा है.

आंध्र प्रदेश में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शराब की दूकानों के बाहर लंबी लाइनों का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “आंध्र प्रदेश में शराब की दुकानों के बाहर लंबी लाइनें देखकर स्तब्ध हूँ. हर कोई जानता था कि लोग बड़ी संख्या में आएंगे, लेकिन सरकार के पास सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए कोई योजना नहीं थी.”

कर्नाटक में भी भारी संख्या में शराब की दुकानों पर भीड़ दिखाई दी.

कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने ट्वीट कर कहा है कि “शराब बेचने से बेहतर होता कि उत्तर प्रदेश सरकार शराब की होम डिलीवरी की करवा देती.”

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने योगी सरकार से शराब बेचने का फ़ैसला वापस लेने की मांग की है.

आप के पूर्व नेता और कवि डॉ कुमार विश्वास ने शराब की दुकाने खुलने पर एक शेर कह कर अपनी बात कही.

शराब की दुकानें खोलने के कई प्रदेश सरकारों के फ़ैसले को अर्थव्यवस्था से जोड़ने का कई लोग विरोध भी कर रहे हैं. हरियाणा के आईपीएस पंकज ने ट्ववीट कर कहा कि “क्या ये कहा जाए कि जिन्हें बेवड़े समझते थे वो अर्थव्यवस्था के चौथे स्तंभ हैं.”

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