फिल्म निर्माता अरिबम श्याम ने नागरिकता बिल के विरोध में लौटाया पद्म श्री अवार्ड




मणिपुरी फिल्म निर्माता अरिबम श्याम

पडोसी देशों के मुस्लिम नागरिक को छोड़कर बाक़ी किसी भी धर्म के नागरिकों को भारत की नागरिकता देने वाले नागरिकता संशोधन बिल (citizen amendment bill 2019) का देश के पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध बढ़ता ही जा रहा है. अभी कुछ दिनों पहले ही मिज़ोरम की राजधानी ऐज़वाल में कुछ ऐसा देखने को मिला जो पहले नहीं देखा गया था. लगभग 30 हजार की संख्या में मिज़ोरमवासियों ने अपने विरोध मार्च में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुतले जलाए और साथ ही भारत से नाराज़गी वाले प्ले कार्ड जिन पर Hello China, Bye Bye India लिखा था भी देखने को मिला.

विरोध की इस कड़ी में अब मणिपुर के एक फिल्म निर्माता का नाम भी जुड़ गया है। फिल्म निर्माता अरिबम श्याम शर्मा ने नागरिकता विधेयक के विरोध में पद्म श्री अवार्ड वापस कर दिया है। शर्मा को 2006 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया था।



अरिबम मणिपुर के जाने माने फिल्मकार और कम्पोजर हैं। रविवार को इंफाल स्थित अपने आवास से ऐलान करते हुए अरिबम ने कहा कि नागरिकता बिल के विरोध में वह यह सम्मान वापस कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक- 2016 पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान आठ जनवरी को लोकसभा में पारित हुआ था। इस दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सदन से वाकआउट किया था।

इस प्रस्तावित कानून का मकसद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आए हिंदू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करना है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम प्रभारी हरीश रावत ने रविवार को विधेयक को ‘संविधान, असम समझौते और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ’ करार देते हुए आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए भाजपा ‘समाज में अशांति पैदा कर’ राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा, इस विधेयक के विरोध के पीछे हमारे कुछ आधार हैं। पहली बात यह है कि कोई भी कानून धर्म के आधार पर भेद करने वाला नहीं होना चाहिए। यह भेद कर रहा है जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। ऐसा लगता है कि यह विधेयक चुनाव को देखते हुए लाया गया है।

उन्होंने कहा, दूसरा आधार यह है कि पूर्वोत्तर के लोगों को लगता है कि यह प्रस्तावित कानून उनकी संस्कृति को नष्ट कर देगा। तीसरी बात यह है कि यह विधेयक असम समझौते के खिलाफ है। असम समझौता 24 मार्च, 1971 तक भारत में आने वाले लोगों को नागरिकता देने की बात करता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ भी है।

Liked it? Take a second to support द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी टीम on Patreon!