राफेल डील: पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने किया खुलासा, दसॉल्ट ने किया था अंबानी के साथ करार




राफेल सौदे पर मोदी सरकार के झूठ का पर्दाफाश हो गया है। एक सनसनीखेज खुलासे में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि राफेल सौदे में अनिल अंबानी को दसाल्ट ने नहीं चुना था, बल्कि भारत की सरकार की तरफ से हमें उनका नाम दिया गया था।

मीडियापार्ट के आरोंपो पर दसॉल्ट ने जवाब दिया। दसॉल्ट ने अपने जवाब में कहा कि फ्रांस और भारत के बीच सितंबर 2016 में सरकार के स्तर पर समझौता हुआ था। उसने भारतीय नियमों (डिफेंस प्रॉक्यूरमेंट प्रोसीजर) और ऐसे सौदों की परंपरा के मुताबिक किसी भारतीय कंपनी को ऑफसेट पार्टनर चुनने का वादा किया था। इसके लिए कंपनी ने जॉइन्ट वेंचर बनाने का फैसला किया।

हालांकि इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया पार्ट के खुलासे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और यह भी कहा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पीएम के फैसले को सही साबित करने के लिए फ्रांस गईं हैं।

इसके साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति के इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि, “प्रधानमंत्री ने निजी तौर पर मोलभाव किया और राफेल डील को पर्दे के पीछे बदल दिया। फ्रांस्वा ओलांद का शुक्रिया जिनकी वजह से अब हमे पता लग गया है कि पीएम मोदी ने निजी तौर पर अरबों डॉलर का सौदा दिवालिया अनिल अंबानी को दिलवाया। प्रधानमंत्री ने देश से धोखा किया है। उन्होंने जवानों के खून का अपमान किया है।”

गौरतलब रहे की मीडियापार्ट के डोक्यूमेंट के मुताबिक, फ्रैंच कंपनी दसॉल्ट के सामने अनिल अंबानी के कंपनी रिलायंस के साथ राफेल डील करने की शर्त रखी गई थी और इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं दिया गया था। डॉक्यूमेंट में दावा किया गया है कि दसॉल्ट एविएशन के डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने नागपुर में दोनों कंपनियों के स्टाफ के सामने प्रजेंटेशन देते वक्त यह साफ तौर पर कही थी।

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