264 करोड़ की लागत से बना पुल 1 महिने में ही स्वाहा, तेजस्वी ने कहा इसे नीतीश का भ्रष्टाचार न कहा जाए




ध्वस्त सत्तरघाट महासेतु (फ़ोटो: ट्विटर)

बिहार के गोपालगंज में 264 करोड़ की लागत से बना सत्तरघाट महासेतु पूरे एक महीने के बाद बुधवार को पानी भरते ही टूट गई. इसके टूटने से चंपारण तिरहुत और सारण के कई जिलों का संपर्क टूट गया है. पुल पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. बीते 16 जून को सीएम नीतीश कुमार ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस महासेतु का उद्घाटन किया था. गोपालगंज को चंपारण से और इसके साथ तिरहुत के कई जिलों से इस माह सेतु को जोड़ने का यह अतिमहत्वकांक्षी पुल था. इसके निर्माण में करीब 264 करोड़ की लागत आई थी.

गोपालगंज में आज तीन लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी का बहाव था गंडक के इतने बड़े जलस्तर के दबाव से इस महासेतु की संपर्क सड़क टूट गई. जिसकी वजह से आवागमन बंद हो गया है. बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में यह सड़क टूटी है. जहां पर देखने के लिए लोगो का तांता लगा है.

यह पुल पूरी तरह से सरकारी था क्योंकि इसका निर्माण बिहार पुल निर्माण विभाग द्वारा कराया गया था जोकि सरकारी संस्था है. वर्ष 2012 में इस पुल का निर्माण शुरू किया गया था. निर्माण पूरा होने के बाद 16 जून 2020 को इस महासेतु का उद्घाटन किया गया था.

पुल के टूटने पर तेजस्वी का ब्यान

पुल के टूटने पर तेजस्वी यादव ने इसका एक वीडियो शेयर करते हुए नीतीश कुमार के सुशासन होने पर तंज़ किया. उनहोंने कहा कि 8 वर्ष में 263.47 करोड़ की लागत से निर्मित गोपालगंज के सत्तर घाट पुल का 16 जून को नीतीश जी ने उद्घाटन किया था आज 29 दिन बाद यह पुल ध्वस्त हो गया. उनहोंने कहा कि “ख़बरदार!अगर किसी ने इसे नीतीश जी का भ्रष्टाचार कहा तो? 263 करोड़ तो सुशासनी मुँह दिखाई है। इतने की तो इनके चूहे शराब पी जाते है.”

इसके बाद अपने एक अन्य ट्वीट में तेजस्वी यादव ने कहा “263 करोड़ से 8 साल में बना लेकिन मात्र 29 दिन में ढ़ह गया पुल। संगठित भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह नीतीश जी इस पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे और ना ही साइकिल से रेंज रोवर की सवारी कराने वाले भ्रष्टाचारी सहपाठी पथ निर्माण मंत्री को बर्खास्त करेंगे। बिहार में चारों तरफ लूट ही लूट मची है.”

साइकिल से रेंजर रोवर की सवारी करने वाले सहपाठी से संभवतः तेजस्वी का तात्पर्य पथ निर्माण विभाग के मंत्री नन्द किशोर यादव से है जिनके बारे में कहा जाता है कि पटना सिटी में वह एक लुंगी गमछा की दूकान चलाते थे.

बिहार में तीन दिन पहले भाजपा कार्यालय में 100 लोगों की जांच में 75 लोगों में कोरोना पाया गया जिसके बाद 31 जुलाई तक लॉक डाउन लगा दिया गया है. बिहार में अब तक 20 हजार का आंकड़ा पार कर गया है. टेस्टिंग की कमी लोग बता रहे हैं.

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