सरकार ने हज सब्सिडी खत्म की, मुस्लिम संगठनों ने किया स्वागत




-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

नई दिल्ली, 16 जनवरी, 2017 | भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसने वार्षिक हज यात्रा में हजारों मुस्लिमों को दी जाने वाली हज सब्सिडी को वापस लेने का फैसला किया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह सरकार के अल्पसंख्यकों के बिना तुष्टिकरण किए उन्हें सशक्त बनाने के एजेंडे के अनुरूप है।



नकवी ने यहां संवाददाताओं से कहा, “यह हमारी नीति का हिस्सा है कि अल्पसंख्यकों का गरिमा के साथ व बिना तुष्टिकरण के सशक्तिकरण हो।”

उन्होंने कहा कि सरकार वापस ली गई सब्सिडी राशि का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों, खास तौर से लड़कियों की शिक्षा के लिए करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2012 में धीरे-धीरे 2022 तक सब्सिडी वापस लेने की बात कहने के बाद सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति बनाई है।

सऊदी अरब द्वारा भारत का कोटा पांच हजार बढ़ाए जाने के बाद इस साल सबसे बड़ी संख्या में भारतीयों के हज यात्रा पर जाने की उम्मीद है।

इस साल कुल 1.75 लाख भारतीय मुस्लिम हज पर जा सकते हैं।

वहीँ मुस्लिम समुदाय ने इसका स्वागत किया है। समाजसेवी और हाजी नजमुल हसन नजमी ने सरकार के इस क़दम का स्वागत किया है। उनहोंने कहा कि मुस्लिम की ओर से तो यह  पहले से मांग की जा रही थी कि हज सब्सिडी को खत्म किया जाए और हज के लिए खुला टेंडर निकालने की आज़ादी दी जाए। उनहोंने कहा कि अगर यात्रा का ओपन टेंडर हो तो इससे हज यात्रा का खर्च सब्सिडी हटाने के बाद भी कम ही आएगा।

समाज बचाव आन्दोलन के संयोजक काशिफ़ युनुस ने भी इसका स्वागत किया है। उनहोंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अन्य धर्म से संबंधित सभी सरकारी खर्चों पर रोक लगा दिया जाए और वही पैसा जनकल्याण में लगाया जाए। उनहोंने कहा कि कुंभ के मेले में सरकार द्वारा कई हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं, उसी तरह मानसरोवर यात्राओं, वैष्णो देवी और अन्य यात्राओं पर भी सरकार जो खर्च करती है वह सब बंद करके जन कल्याण में लगाना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना भी बंद कर देनी चाहिए।

जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफ़ाक़ रहमान ने भी इसका स्वागत किया है। उनका कहना है कि इसकी तुलना हिन्दुओं को उनके धार्मिक यात्राओं पर किए जाने वाले सरकारी खर्चों से नहीं की जानी चाहिए क्योंकि हज उन्हीं मुस्लिम के लिए आवश्यक है जो धनी हैं।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने अपने फेसबुक ब्रीफिंग में कहा कि वह इसकी मांग 2006 से कर रहे हैं और यह निर्णय जस्टिस आफ़ताब आलम और जस्टिस देसाई ने पहले ही कर दिया था कि हज सब्सिडी को 2022 तक खत्म करना चाहिए और इसका उपयोग माइनॉरिटी के वेलफेयर पर करना चाहिए। इसलिए यह तो पहले से सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है इस में मोदी सरकार का कोई योगदान नहीं है।

मुस्लिमों के सभी बड़े संगठनों ने इसका स्वागत किया है।

 

 

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