लोहिया होते तो मोदी की खैर नहीं होती: शिवानन्द तिवारी




शिवानंद तिवारी (फाइल फ़ोटो)

राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ने राम मनोहर लोहिया के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए कहा कि लोहिया अगर आज होते तो नरेंद्र मोदी की निरंकुश सरकार के खिलाफ पूरी शिद्दत से सड़क से संसद तक संघर्ष करते.

उनहोंने अपने WhatsApp सन्देश में कहा कि मोदी सरकार को खैर मनाना चाहिए कि लोहिया या लोहिया जैसा आज कोई नहीं है.

राजद नेता ने मोदी के बहाने कांग्रेस को भी आड़े हाथो लिया. उनहोंने कहा कि लोहिया मानते थे कि देश की राजनीति पर कांग्रेसी एकाधिकार की वजह से लोकतंत्र ख़तरे में है. लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होने ग़ैर कांग्रेसवाद का अभियान शुरू किया था. हालांकि उनहोंने कहा कि गैर कांग्रेसवाद उनकी रणनीति थी जिसका एक ख़ास संदर्भ था.

जनसंघ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कम्युनिस्ट पार्टी के कामरेड भुपेश गुप्त उनके गैरकांग्रेसवाद की रणनीति के सक्रिय सहयोगी थे. तब के संदर्भ में वह एक सफल रणनीति थी. उस रणनीति का परिणाम था कि आज़ादी के बाद पहली मर्तबा आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं. कांग्रेस की अपराजयता की धारणा टूटी.

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, किसी भी रणनीति का मकसद तात्कालिक होता है. इसके उलट नीति स्थाई या लंबे समय के लिए होती है. लोहिया अगर आज होते और आज भी गैरकांग्रेस वाद का नारा दे रहे होते तो लोग उनका उपहास उड़ाते. देश की राजनीति में कांग्रेस की आज की हालत को दयनीय ही कहा जा सकता है. लोकसभा में तो आज उसे विरोधी दल की मान्यता भी प्राप्त नहीं है.

लोहिया के विचारों और नीतियों की थोड़ी भी समझ रखने वाला व्यक्ति यह सहज अनुमान लगा सकता है कि आज अगर वे होते तो नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता से अपदस्थ करने के लिए संपूर्ण विपक्ष को गोलबंद करने की दिशा में बेचैन रहते. लोकतंत्र और संविधान आज ख़तरे में है. पिछले पाँच वर्षों में कट्टरवाद मज़बूत हुआ है. मोदी सरकार की कट्टरवादी नीतियों की वजह से देश की सीमा पर घोर अशांति है. चाहे वह पाकिस्तान से लगा कश्मीर हो या चीन से लगा उत्तर पूर्व के राज्य हों. ऐसी सरकार जो देश की सीमाओं पर रहने वाले अपने नागरिकों के मन में अपनी नीतियों की वजह से भय और शंका पैदा करती है उसको लायक सरकार नहीं कहा जा सकता है. आज अगर लोहिया होते ते कहते कि ‘ऐसी नालायक़ सरकार को सत्ता से बेदख़ल करना ही आज का राजनीतिक धर्म’ है.

पंडित नेहरू के शेरवानी और चुस्त पाजामे वाली पोशाक के विषय में लोहिया कहते थे कि मुग़ल दरबार के तबलची ऐसा पोशाक पहनते थे. नरेंद्र मोदी के सजधज के विषय में लोहिया क्या कहते!

मोदी राज में जिस तरह असहिष्णुता बढ़ी है वह तो भयानक है. मोदी के विरूद्ध बोलने में ख़तरा है. मिडिया जिस तरह आज साष्टांग है उसे देखते हुए कैसे कहा जा सकता है हम लोकतंत्रिक देश हैं! देश में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के मकसद से कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए लोहिया ने गैरकांग्रेसवाद की रणनीति बनाई थी. लोहिया आज होते तो मोदी सरकार की धार्मिक कट्टरवादी नीतियों से लोकतंत्र को बचाने के लिए देश की सत्ता से मोदी सरकार को मुक्त करने के मकसद से सड़क से संसद तक की नीति बनाने की दिशा में बेचैनी के साथ सक्रिय होते. लोहिया की राजनीति में लड़ाकुपन था. आक्रमकता थी. लोहिया आज होते तो मोदी सरकार की नीतियों के विरूद्ध अपने सहयोगियों के साथ संघर्ष करते हुए लाठी खाकर किसी जेल मे बंद होते. नरेंद्र मोदी जी ख़ैर मनाएँ कि आज लोहिया या लोहिया जैसा कोई नहीं हैं. नही तो यह पाँच वर्ष का उनका यह निरंकुश शासन अब तक डगमगा गया होता.

राजद नेता का यह बयान के क्या मायने निकलेंगे यह तो राजनीति तय करेगी लेकिन मोदी के बहाने उनहोंने कांग्रेस को भी अपने निशाने में लिया यह तो स्पष्ट है.

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