यूपीए सरकार की डील अगर पक्की हुई होती तो देश के पास 4 गुना अधिक रफ़ाल होता




राफ़ेल की फ़ाइल फ़ोटो

बहुत उठा पटक और लंबे इंतज़ार के बाद 5 रफ़ाल देश में पहुँच ही गया. यह बहुत ही ख़ुशी की बात है कि दुनिया की अत्यंत आधुनिक फ़ाइटर जेट में से एक राफ़ेल हमारे देश की वायु सेना में शामिल हो गया. इससे निस्संदेह हमारे देश की वायु रक्षा प्रणाली पहले से मज़बूत होगी. यह राफ़ेल अगर इस महामारी की शोक अवस्था से पहले आया होता तो इसका जश्न मनाना बनता था. अभी हमें राफ़ेल से अधिक कोरोना वायरस बीमारी 19 से लड़ने के लिए वैक्सीन की आवश्यकता है. फिर भी इस पर कोई आपत्ति नहीं. अभी चीन की फ़ौज और चीन के वायरस दोनों हमारे लिए खतरा बने हुए हैं.

हमारे देश में 36 राफ़ेल आएगा. 5 डिलीवर हो चुका है और 31 डिलीवर होने को हैं. लेकिन अगर यूपीए सरकार की डील को रद्द करके एनडीए सरकार ने Dassault Aviation के साथ नया सौदा नहीं किया होता तो हमारे पास 126 राफ़ेल होता. यानी हमारी शक्ति अगर राफ़ेल से ही बढ़ती है तो हमारी शक्ति 36 के मुक़ाबले 126 से लगभग चार गुना अधिक बढ़ जाती. इतना ही नहीं पिछले सौदे के हिसाब से हम राफ़ेल अपने देश में बना भी सकते थे यानी राफ़ेल के साथ इसकी टेक्नोलॉजी भी अपनी होती.

यूपीए सरकार की डील

भारतीय वायु सेना में रहे फाइटर प्लेन पायलट राजीव त्यागी के अनुसार, डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation के साथ 126 राफ़ेल की डील की थी. एक राफ़ेल की क़ीमत 570 करोड़ तय हुआ था. इसमें 18 की डिलीवरी फ्रांस में बन कर होनी थी और 108 का निर्माण भारत में Hindustan Aeronautics Limited में होना था. स्पष्ट है कि 108 राफ़ेल का देश में निर्माण का मतलब ही यह था कि राफ़ेल के साथ साथ इसकी टेक्नोलॉजी भी हमारे पास होती. इस पूरे 126 राफ़ेल की कुल कीमत 42 हज़ार करोड़ था जबकि अभी मोदी की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 36 राफ़ेल के लिए 60 हज़ार करोड़ का भुगतान किया है. यूपीए सरकार में सारे राफ़ेल को बनाकर 3-4 साल में दे देना था. इसमें सर्विस लागत शामिल था. यूपीए सरकार की डील में सॉवरेन गारंटी शामिल थी.

एनडीए सरकार की डील

सत्ता परिवर्तन के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने फ्रांस की कंपनी से यूपीए सरकार की वह डील रद्द कर दी और ताज़ा डील की जिसमें राफ़ेल की न केवल कीमत अधिक है बल्कि इसमें रक्षा प्रणाली का जो सबसे अहम पहलू किसी विकासशील देश के लिए होता है यानी टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र वह भी मौजूद नहीं है. यानी हमारे पास जो राफ़ेल आएगा वह सीधे फ्रांस से बन कर आएगा और हमें कोई टेक्नोलॉजी नहीं मिलेगा. इसके उड़ाने की प्रशिक्षण केवल हमें दी जाएगी.

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इसके अलावा इसकी कीमत में पहले की अपेक्षा आसमान ज़मीन का अंतर है. पहले 126 प्लेन की कीमत 42 हजार करोड़ थी अब मात्र 36 प्लेन की कीमत 60 हजार करोड़ है. पहले उसी कीमत में सर्विस लागत शामिल था. अबकी वाली डील में सर्विस लागत 2,700 करोड़ अलग से देना है. एनडीए की डील में सॉवरेन गारंटी नहीं है. सॉवरेन गारंटी थर्ड पार्टी गारंटी है जो सेलर के साथ कुछ होने की स्थिति में थर्ड पार्टी इसकी गारंटी लेता है कि वह सेलर की अनुपस्थिति में क्षतिपूर्ति करेगा. इस डील में न ही डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) और न ही फ़्रांसिसी सरकार ने ऐसी कोई गारंटी दी है.

यूपीए डील में फ्रांसीसी सरकार की ओर से सॉवरेन गारंटी थी जो रक्षा सौदा में अहम माना जाता है. इसके अतिरिक्त 36 राफ़ेल की डिलीवरी में 3 साल से 7 साल का समय लग सकता है.

यूपीए सरकार की डील में एक और बात थी और वह यह कि अगर आवश्यकता पड़े तो Dassault Aviation 210 राफ़ेल तक देगा. इस नए डील में यह क्लॉज़ नहीं है.

 

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