हिन्दू पटनावासियों ने कश्मीरी मुसलमानों के लिए अपने घर के दरवाज़े खोले




हिंसा के शिकार छत्तीसगढ़ में कश्मीरी छात्र (केवल प्रतीकात्मक)

पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से देश के उत्तर राज्यों में निशाना बनाया जा रहा है उससे बिना भयभीत हुए पटना के कुछ जांबाज़ लोगों ने अपने घरों के दरवाज़े कश्मीरियों के लिए खोल दिया है.

जय प्रकाश नारायण के संघर्ष में शामिल रहे उनके युवा साथी और मुक्ति वाहिनी के संयोजक अशोक प्रियदर्शी और उनके परिवार ने हिंसा के शिकार कश्मीरियों से अपील की है कि वह अगर पटना में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो वह उनके घर आ कर रह सकते हैं.



“हमारा घर खुला है, जो पटना में किसी सांप्रदायिक भय में जी रहे हैं. हमारे घर में उनके सुरक्षा की गारंटी रहेगी” उनहोंने अपने WhatsApp सन्देश में लिखा है.

कंकडबाग के प्रोफेसर प्रकाश ने भी हिंसा के भय से पटना में रह रहे कश्मीरियों का अपने घर पर स्वागत किया है. पटना की ही आरती वर्मा ने इस कोशिश को अपना समर्थन दिया है और कहा कि उनके घर भी इनके लिए खुले हैं.

पाटलिपुत्र कॉलोनी की रहने वाली कविता सिद्धार्थ ने भी अपने घर में आकर रहने का न्योता कश्मीरियों को दिया है.

सामजिक कार्यकर्त्ता कबिता और उनके पति सिद्धार्थ ने अभी कश्मीरियों को मदद की पेशकश की है. “जो पटना में किसी सांप्रदायिक भय में जी रहे है, वो हमारे घर आ सकते है. हमारे घर में उनके सुरक्षा की निश्चित गारंटी रहेगी.” उनहोंने अपने सन्देश में कहा.

इसी तरह से प्रसिद्द ए एन सिन्हा इंस्टिट्यूट के पूर्व निदेशक दिवाकर सिन्हा ने भी कहा कि उनके घर के भी दरवाज़े सांप्रदायिक भय में ग्रस्त लोगों के लिए खुला है.

कई लोगों ने अपने फ़ोन नंबर भी शेयर किए हैं जिसने संपर्क किया जा सकता है.

श्री प्रियदर्शी/ सुश्री जुम्बिश: 9431077343

श्रीमती कबिता/श्री सिद्धार्थ: 8797441003

प्रोफेसर प्रकाश: 9430421072

श्रीमती आरती/श्री राजपाल: 9910532650

ज्ञात हो कि पुलवामा में 40 से अधिक जवानों की हत्या के बाद पटना में असामाजिक संगठन के कुछ लोगों ने लहासा मार्केट स्थित कश्मीरी दुकानों पर मार-पीट की थी और उन्हें अल्टीमेटम दिया था कि वह 24 घंटे के अंदर पटना छोड़ कर चले जाएं. ऐसी ही घटना उत्तराखंड के देहरादून में भी हुआ जब वहां के एक प्रतिष्ठित संस्थान की कश्मीरी छात्राओं को अपनी जान बचाने के लिए घंटों एक कमरे में बंद रहना पड़ा था.

जहाँ एक ओर देहरादून के एक कॉलेज ने भीड़ के आगे नतमस्तक हो कर अपने कश्मीरी डीन को निलंबित कर दिया वहीँ पटनावासियों का यह जज्बा भारत की अखंडता को तोड़ने वालों के मुंह पर एक तमाचा है और यह इस ओर इशारा करता है कि भारत की सहनशीलता की जड़ें बहुत मज़बूत हैं.

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