मेहमाननवाज़ी




यह चित्र महज़ प्रतीकात्मक है (चित्र साभार: ANI)

-मोहम्मद मंसूर आलम

मियां किसी तरह से छल कपट करके मुखिया तो बन गए लेकिन मोहल्ले में उनकी साख लगातार गिर रही है. अपनी साख को बचाने के लिए उनहोंने बड़े सेठ को बुलाया है और खर्चे का प्रबंध बीवी का ज़ेवर बेच कर शानदार तरीके से किया. पढ़िए मियां जी ने और क्या क्या किया है मेहमाननवाज़ी के लिए...

आज सुबह से मियां परेशान था. सेठ जी को बुलाया है उसने. उद्देश्य बस इतना है कि मोहल्ला वालों पर इसका असर पड़े. मियां अपने गाँव का मुखिया है लेकिन छल कपट से मुखिया बनने के बाद उसकी साख लगातार गिरती जा रही है. उसने अपने कुछ गुर्गे को वार्ड कौंसिलर वगैरा में खड़ा करवाया था. सबके सब हार गए. मुखिया बनने के बाद मोहल्ले वालों से भी रिश्ते ख़राब हो गए हैं. आस पडोस में तना तनी चल रही है. मियां सोच रहा है कि सेठ जी जब बड़ी गाडी से अपनी मेम साहब और बच्चों के साथ आएँगे तो उसकी शान थोड़ी बढ़ जाएगी बस इसके लिए उसने अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है.

कुछ मोहल्ला वाले इससे खुश हैं कि उनके मोहल्ले का नाम आस पास के गाँव में हो जाएगा. मस्जिद के इमाम साहब कह रहे हैं कि कोई मज़ाक़ की बात थोड़े न है. मियां का बस करामत है ई कि इतना बड़ा सेठ हमारे मूहल्ले में आ रहा है. देखो इसी बहाने में मोहल्ले की बदबू खत्म हो गयी. चारो तरफ ईद जैसा लग रहा है. कुछ पढ़े लिखे मोहल्ले वाले एक दम से जले हुए हैं. अज़ान देने वाले मौलाना कह रहे हैं कि मियां के तो बल्ले बल्ले हैं. सेठ उसके घर पर आ रहा है. स्कूल के मास्टर साहब जो हमेशा बस आलोचना ही करते हैं जल भुन कर कह रहे हैं कि मियां की तो बस फुटानी है. घर में बेटा सब बेरोजगार हैं. बेटियों की शादी अभी तक नहीं कर पाया है. कर्ज़ लेकर जिंदगी काट रहा है और फुटानी तो देखो कि बड़े सेठ की मेहमाननवाज़ी कर रहा है. मुखियागिरी में भी सुना है कि कुछ घोटाला वोटाला किया है.

चुग्लाही बुआ कह रही है कि इसके लिए मियां ने अपनी बीवी के जेवर रख कर इंतजाम किया है. बीवी तो अंदर अंदर अपने मियां के इस फुटानी से तंग आ गयी है. लेकिन वह भी क्या करे. माँ का दिया हुआ सारा ज़ेवर उसका ऐसी ही बिकता जा रहा है या गिरवी होता जा रहा है. भतार का मान रख रही है बेचारी.

मुंहफट बुआ कह रही है कि छप्पन पकवान बनवाया है मियां ने सेठ के लिए. वह भी पकवाया है जिसको कभी खुद हाथ नहीं लगाता है. बीवी बड़ी पवित्तर है उसकी. कह रही थी कि जो हम खाते हैं वही बनवाओ उनके लिए. इतना सब करके अपना धर्म भ्रष्ट काहे कर रहे हो. लेकिन मियां माने तब न. वह तो अपने पड़ोसियों पर बस अपना रोब झाड़ने के लिए यह सब कर रहा है.

इस पर स्कॉलर चचा ने कहा कि इससे क्या हो जाएगा. उसका मान सेठ की नज़र में बढ़ जाएगा क्या? सेठ अंदर अंदर मज़ा लेगा और अपना काम पूरा करवाएगा. सुना है कि सेठ जी भी कहीं के विधायक या सांसद हैं. और उन पर उनके यहाँ के लोगों ने फजीहत कर रखी है. सुना है कि उनका चुनाव भी इस बार खतरे में हैं. ऊपर से ज़्यादा कोई उन्हें पूछता वूछ्ता नहीं है. इसलिए सेठ जी ने ही कहा कि चुनाव होने वाला है तो जनता को भी लगना चाहिए कि सेठ जी का लोग आदर करते हैं. इसलिए दोनों ने गुप्त तौर पर यह सेटिंग की है.

इस पर चुग्लाही बुआ ने कहा कि अरे वह सेठ पक्का लाला है. खा पी कर हाथ पतलून में पोछेगा और निकल जाएगा. कुछ नहीं देगा मियां को. मियां जी पर जो खर्चे का भार आएगा उसका तो उसी को भुगतान करना पड़ेगा.

इस पर मुंहफट बुआ ने कहा कि बीवी का कोई और जेवर बेच देगा. बीवी के मायके वाले बहुत रईस थे. बहुत सारा ज़ेवर दिया था. सोचा था कि मेहनती है. सज्जन होने का दावा करता था. कर दिया अभागिन का शादी मियां से. उन्हें क्या पता था कि बीवी के जेवर पर ऐश करेगा. कुछ जेवर और होगा वह भी बेच देगा. और क्या? सुनने में आ रहा है कि बहुत खर्च किया है. वेटर भी बुलवाया है. नचनिया भी किया है. घर के बगल में जो नाले, वाले दिख रहे तो उस पर तिरपाल रखवाया है ताकि सेठ जी को बदबू नहीं आए. ऊपर से अपने गरीब रिश्तेदारों को दावत भी नहीं दिया है.

“हाँ, मैं ने तो सुना है कि कुछ मुस्टंडे भी भाड़े पर रखे हैं जो कर्जदारों को सड़क पर ही रोक कर रखेगा कि वह कुछ न बोले. सेठ जी के सामने कोई खिलाफ में मुंह न खोले इसका पूरा प्रबंध मियां ने कर रखा है,” चुगलाही बुआ ने कहा.

इस पर स्कॉलर चचा ने कहा. ऐसा नहीं करना चाहिए मियां को. जब घर समृद्ध बना रहेगा तो कितना आएगा जाएगा ऐसा सेठ. अपने घर में लोग दाना दाना को तरस रहे हैं और यह मियां सेठ को छप्पन भोग खिला रहा है.

इस पर मुंहफट बुआ ने कहा कि सेठ जी को सुना है कि बाबा के मज़ार पर दर्शन कराएगा और पीर साहब के खानकाह में ले जाएगा.

छिः छिः छिः! ई मियां तो बड़ा फतूरी है. पूरा खानदान जो पीर साहब के खानदान को भला बुरा कहता रहता है उन्हीं के खानकाह में ले जाएगा ई मियां सेठ को. और उस बाबा के मज़ार पर क्यों जा रहा है? उस बाबा को तो मारा था इसी के पूर्वज ने न!

“आखिर ई सब कर काहे रहा है, अरे काम अपना ईमानदारी से करता, घर की समस्याओं को निपटाता, अपने पडोस से अपने रिश्ते बेहतर करता, और राज करता हम पर, कोई तो राज करेगा ही न. हम जनता तो इसी लिए हैं ही लेकिन इतना दुष्टता तो ठीक नहीं है न?” स्कॉलर चचा ने बड़ी गंभीरता से सवाल किया.

“अरे, सुनो सुनो! सेठ जी बड़ी गाड़ी में सड़क पर पहुँच गए हैं. चार बड़ी बड़ी गाड़ी है. और मेम तो मेमे हैं. सबको हाथ हिला हिला कर अभिवादन भी कर रहे हैं.” मोहल्ले के एक पत्रकार ने हाँफते हाँफते मोहल्ले के चौपाल में मुनादी कर दी.

चलो भाई, सब कुछ भूल जाओ थोड़े देर के लिए और सेठ जी की मेज़बानी में लग जाओ. कहीं कोई कमी रह गयी तो मोहल्ले की बड़ी बेईज्ज़ती हो जाएगी.

थोड़ी ही देर में सेठ जी की राह में मोहल्ला वासी अपनी एक जून की रोटियां खुशबूदार फूलों की तरह बरसा रहे थे ताकि तिरपाल के नीचे से थोड़ी भी बदबू की गुंजाइश बाक़ी न रह जाए.

 

(यह मात्र व्यंग है. इसका किसी व्यक्ति, पार्टी या संगठन से भी कोई लेना देना है. बस एन्जॉय कीजिए. किसी से कोई उलना न करें.)

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