बिहार में कुरीतियों के खिलाफ 5 करोड़ लोगों की बनी श्रृंखला




-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

 

पटना (बिहार), 21 जनवरी, 2018 | बिहार में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ रविवार को राज्यभर में बनी मानव श्रृंखला ने एक इतिहास रच दिया। सरकार का दावा है कि करीब 13,668 किलोमीटर लंबी बनी इस मानव श्रृंखला में करीब पांच करोड़ लोग एक दूसरे का हाथ पकड़ कर शामिल हुए। इस मानव श्रृंखला की तस्वीर और वीडियोग्राफी के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली गई। इस मानव श्रृंखला की शुरुआत ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुई, जहां राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित कई मंत्री और अधिकारी शामिल रहे।

राज्य के एक अधिकारी ने बताया कि इस श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ लोगांे को जागरूक करना था। अधिकारी का दावा है कि 13,668 किलोमीटर से ज्यादा लंबी बनी इस मानव श्रृंखला में करीब पांच करोड़ लोगों से ज्यादा लोगों ने भाग लिया, जो एक रिकॉर्ड है।

इससे पहले पिछले साल बिहार में मद्य निषेध अभियान की सफलता के लिए बनाई गई 11292 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में करीब चार करोड़ लोग शामिल हुए थे। इस मानव श्रृंखला को गिनीज बुक में स्थान दिया गया था।

गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुब्बारों का गुच्छों को आसमान में उड़ाकर इस श्रृंखला की शुरुआत की। गांधी मैदान से चार श्रेणियांे में निकली यह मानव श्रृंखला, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला, प्रखंड, पंचायत, गांवों की विभिन्न सड़कों और पगडंडियों से होकर गुजरी।

राज्य सरकार का दावा है कि इसमें करीब पांच करोड़ से ज्यादा लोगों ने शिरकत की और दहेज प्रथा और बाल विवाह के विरोध में अपने-अपने भावों का प्रकटीकरण प्रस्तुत किया। इस मौके पर सभी जिला मुख्यालयों में भी अधिकारियों ने श्रृंखला में भाग लिया।

गांधी मैदान में अपराह्न् 12 बजे से प्रारंभ इस मानव श्रृंखला का समापन 12.30 बजे हुआ। इस दौरान कई स्थानों पर यातायात को रेाक दिया गया गया था। इस मानव श्रृंखला की तस्वीर और वीडियोग्राफी के लिए 40 ड्रोन कैमरे को लगाया गया था। प्रत्येक जिले को एक-एक ड्रोन उपलब्ध कराया गया।

श्रृंखला की सफलता के लिए सरकारी स्तर पर करीब तीन महीने पूर्व ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। लोगों को जागृत करने के लिए कई नारे बनाए गए थे तथा कला जत्था के नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए गांव-गांव में समाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागृत किया गया।

इस श्रृंखला में आम और खास सभी लोगों की भागीदारी देखी गई। विभिन्न गैर सरकारी संगठन, स्थानीय लोग के साथ विभिन्न पार्टियों से जुड़े नेता और कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में बच्चों ने हिस्सा लिया।

राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस आयोजन को सफल बताते हुए कहा कि सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना कानून के साथ-साथ ऐसे ही जागरूकता अभियान के जरिए संभव है।

उन्होंने कहा, “कानून दंडित तो कर सकता है, मगर हृदय परिवर्तन नहीं कर सकता। जब समाज जाग उठता है, तो किसी भी प्रकार का सुधार व बदलाव संभव हो जाता है। सती प्रथा जैसी कुरीति का अंत भी केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जनचेतना से ही संभव हो पाया था।”

-आईएएनएस

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