फिरकापरस्ती के खिलाफ़ इन्सानपरस्ती की मिसाल: बेगुसराय के दानिश आलम अपने पड़ोसी नीतीश को बचाने के लिए कर रहे हैं दुनिया से अपील




आईसीयू में इलाजरत नीतीश (बाएँ) दानिश आलम (दायी ऊपर) नीतीश कुमार (दायीं नीचे)

बिहार का कभी लेनिनग्राद कहा जाने वाला बेगुसराय जब से गिरिराज सिंह का संसदीय क्षेत्र बना है तब से वहां हिन्दू-मुस्लिम के बीच झगड़े का किस्सा सामने आने लगा है. लोक सभा चुनाव से पहले वहां कासिम नाम के एक इन्सान को एक दुसरे इन्सान ने यह कहते हुए गोली मार दी थी वह यहाँ क्या कर रहा है पाकिस्तान चला जाए. कासिम नाम का यह आदमी आज भी उस गोली की चुभन महसूस करता है.

हाल ही बीबीसी में छपे एक रिपोर्ट के अनुसार, वहां कई बार हिन्दू-मुस्लिम घटनाएं हो चुकी और इससे संबंधित कई एफ़आईआर भी हो चुकी. बीबीसी की रिपोर्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

इन सबके बीच जब बेगुसराय कोरोना और आपसी नफ़रत से लड़ रहा है दानिश आलम अपने दोस्त नीतीश की जान बचाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार है.

हुआ यह कि 11 अप्रैल की रात नीतीश बरौनी फ्लैग में रह रही अपनी बहन के यहाँ से लौट रहे थे. तभी बिरानिया बाज़ार के पास अज्ञात वाहन के चपेट में आ कर बुरी तरह घायल हो कर बेहोश हो गए. रास्ते के राहगीर की उन पर नज़र पड़ी जो उन्हें पहचानते थे ने उनके पडोसी दानिश को इसकी ख़बर दी. खबर पा कर दानिश घटना स्थल पर पहुंचे और उन्हें बरौनी के लाइफ-लाइन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया. इस हादसे में नीतीश की गर्दन की कई हड्डियाँ टूट गयी और वह बार बार बेहोश हो रहे थे. बरौनी मे 24 घंटे के इलाज के बाद जब मामला नहीं संभला तो 12 अप्रैल को उन्हें पटना रेफर कर दिया गया. पटना में उनका इलाज रुबन हॉस्पिटल में 10 दिनों से चल रहा है. नीतीश अभी भी आईसीयू में हैं. पटना में नीतीश के साथ उनके बड़े भाई और दानिश ही उनकी देख रेख कर रहे हैं.

Read this story in English: Humanism prevails over Communalism: Danish Alam from Begusarai helping his neighbour to save his life

नीतीश की हालत गंभीर बनी हुई है और अब तक चार लाख तक उन पर खर्च हो चुका है. इस इलाज के खर्च में दानिश की भी जमा पूँजी खर्च हो गयी.

दानिश आलम क्रिकेटर हैं और बिहार के अंडर 23 टीम के लिए राज्य स्तर पर खेल चुके हैं. दानिश के पास मैच से जो पैसे आए थे उसमें बचे सारे पैसे उनहोंने नीतीश के इलाज पर खर्च कर दिया. यह बात नीतीश के बड़े भाई प्रकाश ने इस रिपोर्टर को फ़ोन पर बताया.

नीतीश के पिता पैर से विकलांग हैं और माँ छोटे मोटे काम करती हैं. नीतीश बरौनी में ही एक किताब की दुकान में प्राइवेट नौकरी करते थे और उनके और उनके बड़े भाई के ऊपर ही घर की ज़िम्मेदारी थी.

दानिश अपने दोस्तों और फेसबुक के माध्यम से अपील करके नीतीश के इलाज का खर्च जुटा रहे हैं. दानिश कहते हैं कि अब तक आम लोगों से कम ही मदद मिली है. सारा खर्च हमने अपने दोस्तों से मिलकर ही पूरा किया है. लेकिन अब पैसे खत्म हो गए हैं.

“फ़िरक़ापरस्ती के माहौल में जब मुसलामानों को देश और समाज का दुश्मन बनाया जा रहा है ऐसे में आप एक हिन्दू की मदद कर रहे हैं,” इस सवाल पर नीतीश कहते हैं कि नफ़रत फैलाना नेताओं का काम है जिससे उनकी रोज़ी रोटी चलती है. हमारा काम है प्रेम फैलाना और हमको इससे फर्क नहीं पड़ता.

“यह बात सही है कि नफ़रत फैलाने वालों को इससे आघात पहुंचेगा लेकिन हमारा काम जो है हम कर रहे हैं और उनका काम जो है वह करें,” दानिश कहते हैं.

फ़ोन पर बात करने पर नीतीश के बड़े भाई प्रकाश रोते हुए कहते हैं कि दानिश भैया उनके लिए भगवान हैं. वह सब से अपील करते हैं कि मेरे भाई को बचाने में हमारा सहयोग कीजिए. हमारे पास अब पैसे नहीं बचे हैं.

नीतीश की जो लोग मदद करना चाहते हैं वह इस खाता पर मदद कर सकते हैं.

Danish Alam

खाता संख्या: 584110110005692

आई एफ़ एस सी कोड: BKID0005841

Phone Pay: 9097612358

Google Pay: 9097612358

PayTM: 7004318133

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