5 साल में तीन लाख करोड़ से अधिक का बैंक फ्रॉड, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसों की सूची में हर वर्ष हो रहा है इज़ाफा




मोदी नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे लोगों की लिस्ट हर साल बढ़ती ही जा रही है और सरकार इसमें बिलकुल असहाय नज़र आ रही है. हाल की रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में 2018-19 की तुलना में बैंक धोखाधड़ी के मामलों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह वृद्धि मामूली वृद्धि नहीं है. इसका मतलब यह है कि अगर 2018-19 में 1 लाख करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा था तो इस वित्तीय वर्ष यह फर्जीवाड़ा एक लाख 28 हज़ार करोड़ रुपए का है.

आपको बता दें कि बैंक फर्जीवाड़ा का सीधा सीधा असर ईमानदार ग्राहकों और निवेशकों पर होता है. इसका असर बैंकों को होने वाले लाभ और उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर पड़ता है. इसका असर बैंक द्वारा आम आदमी को दिए जाने वाले व्यापार, शिक्षा और अन्य लोन पर भी पड़ता है.

मंगलवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में पिछले साल के मुकाबले बैंक फ्रॉड के मामलों में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

दरअसल 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में दोगुने से भी ज्यादा रकम के बैंक फर्जीवाड़े सामने आए हैं. वित्त वर्ष 2019-20 में करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में 71,500 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था.

साल 2018-19 में बैंक फर्जीवाड़े के 6799 मामले सामने आए थे, जो 2019-20 में बढ़कर 8707 हो गए. फर्जीवाड़े में 80 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है. जबकि प्राइवेट सेक्टर में यह आंकड़ा 18 फीसदी तक रहा. आरबीआई ने मोरेटोरियम की वजह से बैंकों को हो रहीं दिक्कतों पर भी रिपोर्ट में चिंता जताई है.

रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2020-21 की जून तिमाही में पिछले साल की जून तिमाही के मुकाबले फ्रॉड के मामलों में कमी आई है. आरबीआई के मुताबिक, अप्रैल-जून 2020 में बैंक फ्रॉड की रकम 28,843 करोड़ रही, वहीं अप्रैल-जून 2019 में यह आंकड़ा 42,228 करोड़ रुपये का था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस दौरान पूरे देश में लॉक डाउन रहा और कम व्यापारिक लेन देन हुआ. अब भी पूरे देश में व्यापारिक गरिविधियाँ सामान्य नहीं हो पाई हैं.

आरबीआई द्वारा जारी 50 शीर्ष डिफाल्टर की सूची

आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक फ्रॉड के जो मामले सामने आए हैं, उनमें लोन को लेकर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हुआ है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में कुल बैंक फ्रॉड मामले में जितनी राशि का फर्जीवाड़ा हुआ, उसमें 76 फीसदी लोन से संबंधित थे.

अभी हाल में ही आरबीआई ने 50 टॉप डिफाल्टर की सूची जारी की थी जिसका कुल मूल्य लगभग 68 हजार करोड़ रुपए था और इनको बैंकों ने राईट ऑफ कर दिया था.

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