पत्रकारों के हत्यारों को सजा दिलाने में सबसे पीछे रहा भारत




अमेरिका की एक गैर-लाभकारी संस्था टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सी पी जे) ने ग्लोबल लिस्ट जारी की है। जिसमे भारत 14वे स्थान पर है। इस रिपोर्ट में वे देश शामिल हैं जहाँ पत्रकारों की हत्याएं हुई और मामले को सुलझाया नहीं जा सका है।

हालांकि इस रिपोर्ट से चिंता ये व्यक्त किया गया है कि ये आकड़ा दर लगातार 11वां साल है जब भारत को इस सूची में रखा गया है।

रिपोर्ट 1 सितम्बर 2008 से 31 अगस्त 2018 के बीच पत्रकारों की हत्याओं के आकड़ें का विश्लेषण कर तैयार की गई है। काबुल में पत्रकारों के समूह पर आत्मघाती हमला किया गया था, जबकि कोलंबिया में मादक पदार्थों के तश्करों ने इकवाडोर के पत्रकारों को अपहरण कर ह्त्या कर दी थी।



2018 के इंडेक्स में भारत सहित 14 देशों को शामिल किया गया है। इनमे सोमालिया, सीरिया, ईराक, दक्षिण सूडान, फिलीपींस, अफगानिस्तान, मैक्सिको, कोलंबिया, पकिस्तान, ब्राज़ील, रूस, बंगालदेश, और नाइजीरिया भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक १४वा स्थान पर भारत को रखा गया है जहाँ पत्रकारों के हत्याओं के 18 मामलों को अब तक सुलझाया नहीं गया है।

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