देश को माँ कहने वाला भारत विश्व में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक




प्रतीकात्मक छवि (फ़ोटो: ट्विटर)
थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने सात साल पहले एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें अफगानिस्तान, कांगो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया लोकतांत्रिक गणराज्य महिलाओं के लिए पांच सबसे खतरनाक देश माने गए थे. इस सर्वेक्षण में भारत चौथे स्थान पर था जबकि अफ़ग़ानिस्तान पहले स्थान पर था. इस ताज़ा रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान, कांगो, सोमालिया और पाकिस्तान जैसे देशों को भी भारत ने पछाड़ दिया यह अपने आप में शर्मनाक है.

नई दिल्ली, 26 जून, 2018 (टीएमसी हिंदी डेस्क) सीएनएन ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश कहा गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “यौन हिंसा और दास श्रम के बहुत अधिक जोखिम की वजह से भारत दुनिया में सबसे खतरनाक देश है, विशेषज्ञों का एक नया सर्वेक्षण ऐसा दिखाता है.”


रिपोर्ट के मुताबिक, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने मंगलवार को महिलाओं के मुद्दों पर 550 विशेषज्ञों के एक सर्वेक्षण का अपना परिणाम जारी किया है, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के साथ-साथ घरेलू कार्यों के लिए होने वाली मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, ज़बरदस्ती विवाह और यौन दासता उन कारणों में से है जिसके कारण भारत महिलाओं के लिए विश्व का  सबसे खतरनाक देश है.

इस सर्वेक्षण में तेज़ाब के हमले, मादा जननांग अंगभंग (ख़तना), बाल विवाह और शारीरिक दुर्व्यवहार जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि महिलाओं को प्रभावित करने वाली सांस्कृतिक परंपराओं के कारण भी भारत दुनिया का सबसे खतरनाक देश है. सात साल पहले इसी सर्वेक्षण में महिलाओं के लिए भारत को सबसे खतरनाक देशों में 4वें पायदान पर रखा गया है जो अब पहले पायदान पर है. इसका मतलब साफ़ है कि मोदी सरकार बनने के बाद भारत में महिलाओं का रहना कई अन्य पिछड़े देशों से भी ज्यादा खतरनाक बना है.

यह रिपोर्ट भारत में बढ़ रहे सार्वजनिक आक्रोश के बीच आई है, जहां 16 और आठ वर्ष की लड़कियों पर दो अलग अलग मामलों समेत कई हाई प्रोफाइल बलात्कार के मामलों की श्रृंखला ने यौन हिंसा को राष्ट्रीय एजेंडा पर वापस आने पर मजबूर कर दिया है.

देश के कठुआ और अन्य प्रान्तों में हो रहे बलात्कार के विरोध में पटना जैसे छोटे शहर में भी लोग मार्च करते हुए (फ़ोटो साभार: फेसबुक)

2012 में हुए कॉलेज छात्रा के बलात्कार और हत्या के बाद से अप्रैल में देश में आयोजित होने वाले कुछ सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक हुआ जब महिलाओं की बेहतर सुरक्षा की मांग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया.

कठोर कानून पेश करने के प्रयास अब तक महिलाओं के सामने आने वाले खतरों से निपटने में असफल रहे हैं.

2012 के मामले के बाद के महीनों में, केंद्र सरकार ने यौन हिंसा के लिए जुर्माना बढ़ाने और जेल की सजा को बढ़ा कर मृत्युदंड तक के प्रावधानों तक कई सुधारों को पारित किया.

लेकिन कठोर कानूनों की शुरूआत के बावजूद, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार, हर साल देश में पुलिस को लगभग 100 यौन हमलों की सूचना दी जाती है, जिनमें 2016 में लगभग 39,000 कथित हमलों की शिकायत मिली जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% अधिक थी.

#MeToo आंदोलन का प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि सूची में से 10 देशों में से 9 एशिया, मध्य पूर्व या अफ्रीका के देश हैं. 10वें पायदान पर संयुक्त राज्य अमेरिका, एकमात्र पश्चिमी देश शामिल है.



रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन का कहना है कि अमेरिका का जुड़ना सीधे तौर पर #MeToo आंदोलन का प्रभाव है.

“संयुक्त राज्य अमेरिका बहुत तेज़ी से इस सूची में ऊपर चढ़ कर सीरिया के साथ तीसरे पायदान पर बराबरी में रहा जब जवाब देने वालों से यह पूछा गया कि बलात्कार, यौन उत्पीड़न, यौन संबंध में जबरदस्ती और बलात्कार के मामलों में न्याय तक पहुंच की कमी जैसे यौन हिंसा के मामले में सबसे खतरनाक देश कौन सा है. सर्वेक्षण के अनुसार यह महिलाओं के गैर-यौन हिंसा के मामलों में छठे स्थान पर रहा.

युद्ध से ग्रस्त अफगानिस्तान महिलाओं में गैर-यौन हिंसा के मामले में सबसे खराब देश रहा. इसकी रैंकिंग दुसरे पायदान पर रही. गैर-यौन हिंसा में झगड़े से उत्पन्न हिंसा और घरेलु झगडा शामिल है. अफ़ग़ानिस्तान स्वास्थ्य देखभाल और आर्थिक संसाधनों तक पहुँच की कमी और भेदभाव के मामले में दूसरा सबसे खराब देश रहा.

#MeToo अभियान में अपनी तस्वीर पोस्ट करती महिला (फ़ोटो साभार: ट्विटर)

सीरिया, जो सात साल से अधिक समय से युद्ध से जूझ रहा है, सूची में तीसरे स्थान पर है. यह देश यौन हिंसा और स्वास्थ्य देखभाल की कमी के मामले में विश्व का दूसरा सबसे खतरनाक देश माना गया. सीरिया यौन हिंसा और उत्पीड़न के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तीसरे स्थान पर बराबर रहा.

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने सात साल पहले इसी तरह का एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें अफगानिस्तान, कांगो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया लोकतांत्रिक गणराज्य महिलाओं के लिए पांच सबसे खतरनाक देश माने गए थे. इस सर्वेक्षण में भारत चौथे स्थान पर था जबकि अफ़ग़ानिस्तान पहले स्थान पर था. इस ताज़ा रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान, कांगो, सोमालिया और पाकिस्तान जैसे देशों को भी भारत ने पछाड़ दिया यह अपने आप में शर्मनाक है.

“विश्व नेताओं ने तीन साल पहले यह प्रण लिया था कि 2030 तक महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सभी तरह की हिंसा और भेदभाव को खत्म किया जाएगा, ताकि वे राजनीतिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में समान रूप से भाग लेने के लिए स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से रह सकें. फाउंडेशन का कहना है कि इस प्रण के बावजूद यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व भर में तीन में से एक महिला को अपने जीवन में एक बार शारीरिक या यौन उत्पीडन से दो चार होना ही पड़ता है.

“बाल विवाह अभी भी बहुत ज़्यादा है, लगभग 75 करोड़ महिलाओं और लड़कियों को अपने 18वें जन्मदिन से पहले विवाह करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप किशोर अवस्था में लड़कियां गर्भवती हुईं जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है और उनके स्कूली शिक्षा और अवसरों को सीमित कर सकती हैं.”

जारी समस्या

विशेषज्ञों का तर्क है कि भारत का इस सर्वेक्षण में शीर्ष पर होना यह दिखाता है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कुछ भी पर्याप्त नहीं किया जा रहा है.

कर्नाटक राज्य सरकार के एक अधिकारी मंजुनाथ गंगाधर ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, “भारत में महिलाओं के लिए पूरी तरह से उपेक्षा और अनादर है … बलात्कार, वैवाहिक बलात्कार, यौन हिंसा और उत्पीड़न, मादा शिशु की हत्या ज्यों का त्यों है.”

गंगाधार ने कहा, “दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी में हमारा नेतृत्व होने के बावजूद महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा हमें शर्मिंदा करने वाली है.”

यौन हिंसा के मुद्दे ने नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर दबाव डाला है. विरोधियों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को सही तरीके से हल करने में यह सरकार पूरी तरह से विफल रही है.

मोदी जो अगले साल अपने पुनः चुनाव की तैयारी कर रहे हैं ने अप्रैल में यौन हिंसा के खिलाफ कहा था कि बलात्कार “देश के लिए बड़ी चिंता का विषय है.”



उसी महीने, उनकी कैबिनेट ने 12 साल से कम आयु के बच्चों के बलात्कारियों के लिए मौत की सजा पेश करने के कार्यकारी आदेश को पारित भी किया था.

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