क्या मध्य प्रदेश में ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के नाम पर लूटे जा रहे हैं गरीब और नौजवान?




प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी योजना शुरू करते हुए'

-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

भोपाल (मध्य प्रदेश), 23 नवम्बर 2017 | आज तक की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ को मध्य प्रदेश में कुछ शातिर दिमागों ने गरीबों को लूटने का जरिया बना लिया है. इस योजना को ऐसे लोगों को फंड देने के लिए लाया गया है जिनके पास फंड जुटाने के लिए खुद किसी साधन तक पहुंच नहीं है. मध्य प्रदेश में जगह जगह फैले दलाल निरक्षर और अपात्र ग्रामीण लोगों को कर्ज लेने के लिए दबाव डाल रहे हैं.



इंडिया टुडे की जांच से सामने आया है कि किस तरह ग्रामीण लोगों से उस कर्ज के लिए ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर पैसा ऐंठा जा रहा है जो कर्ज उन्हें कभी मिलना ही नहीं है. यही नहीं, ग्रामीणों से धन ऐंठने के लिए बेरोजगारों को भी जरिया बनाया गया. इन बेरोजगारों को दस हजार रुपए प्रति महीना देने के नाम पर ग्रामीणों से पैसा इकट्ठा करने पर लगा दिया गया.

बता दें कि अप्रैल, 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य छोटी कारोबारी इकाइयों की वित्तीय जरूरतों को आसान बनाना था. इसके तहत सभी गैर कृषि लघु कारोबार, जो कि आय अर्जित करने में सक्षम हैं और जिन्हें दस लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता की जरूरत है, वो इस योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए किसी तरह की कोई ‘प्रोसेसिंग फीस’  भी नहीं देनी पड़ती. इस योजना के तहत कर्ज के लिए आवेदन करने की अहम शर्तों में ‘विस्तृत बिजनेस प्लान’ जमा कराना जरूरी है.

लेकिन मध्य प्रदेश में लोगों को कर्ज दिलाने के नाम पर चूना लगाने का गोरखधंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है. इंडिया टुडे ने ऐसे लोगों का पता लगाया जिनसे फॉर्म भरने और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे झटक लिए गए. ऐसे ही एक शख्स हैं विदिशा जिले की गंज बसोडा तहसील के कला खेड़ी गांव में रहने वाले गणेश राम कुशवाहा. 54 वर्षीय कुशवाहा से एक दलाल ने ये कह कर संपर्क किया कि उन्हें मुद्रा योजना के तह तीन लाख रुपए का कर्ज मिल सकता है बशर्ते कि वो 120 रुपए की शुरुआती फीस जमा करे. दलाल ने कुशवाहा को एक रसीद भी दी जिसके ऊपर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और उद्योग आधार कार्ड मोटा मोटा लिखा था. इंडिया टुडे के पास ये रसीद मौजूद है.

कुशवाहा ने कहा, ‘मुझसे 120 रुपए लेने के बाद कहा गया कि मुझे कारोबार के लिए तीन लाख रुपए का कर्ज दिला दिया जाएगा. मेरा पहले से कोई कारोबार नहीं है लेकिन मुझे कहा गया कि मैं कोई भी कारोबार शुरू कर सकता हूं. जिस शख्स ने मुझसे 120 रुपए लिए वो फिर वापस नहीं आया.’

कुशवाहा अकेले नहीं जिन्हें दलालों ने धोखाधड़ी का शिकार बनाया. इंडिया टुडे ने विदिशा जिले की सभी 10 तहसील में ऐसे कई लोगों से बात की. किसान केसरी सिंह ने बताया, ‘मेरे भाई मोती सिंह को बेवकूफ बनाया गया. दलालों ने दो से तीन लाख रुपए कर्ज दिलाने का वादा किया था. हमारा कोई कारोबार नहीं है.’

इंडिया टुडे ने फिर कुछ दलालों को भी ढूंढ निकाला जो ग्रामीणों से संपर्क कर रहे थे. उन्होंने बताया कि अकेले विदिशा से ही करीब 10,000 लोगों के कागजात जमा किए गए हैं. दलालों ने ग्रामीणों में बांटी जाने वाली प्रचार सामग्री भी दिखाई. एक ऐसे ही पर्चे पर ‘उत्तर प्रदेश वित्त प्रबंधन विकास निगम’ छपा हुआ था. दिलचस्प ये है कि कुछ दलालों ने ही शिकायत करते हुए कहा कि उनसे खुद रोजगार देने के नाम पर धोखाधड़ी की गई और ग्रामीणों से योजना के तहत संपर्क करने के लिए कहा गया.

ग्रामीणों से फॉर्म भरने के लिए कहने वाले एक शख्स भगवान सिंह गुर्जर ने इंडिया टुडे को बताया, ‘उन्होंने हमें नौकरी के लिए न्योता दिया. हम बेरोजगार थे. उन्होंने हमसे 10,000 रुपए प्रति महीना और पेट्रोल मनी के नाम पर हर दिन 100 रुपए देने का वादा किया था. उन्होंने हमें फॉर्म और रसीद बुक मुहैया कराई. हमने लोगों से संपर्क करना शुरू किया. जब हमें पता चला कि ये सब फर्जीवाड़ा है तो हमने इसे बंद कर दिया. लेकिन अब लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं. हमने कुछ भी गलत नहीं किया है.’



इन दलालों ने उस मास्टरमाइंड का भी नाम और पता बताया जिसने उन्हें नौकरी पर रखा था. ये शख्स विदिशा में ही 100 वर्ग फीट की एक दुकान से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था. दुकान पर एक बैनर भी लगा था जिस पर ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’   लिखा होने के साथ पीएम मोदी की तस्वीर भी थी. बैनर पर विकास राजपूत का मोबाइल नंबर भी लिखा था.

विकास राजपूत से कई बार संपर्क की कोशिश की गई लेकिन वो सामने नहीं आया. उसने फोन पर जरूर कहा कि उसे लखनऊ स्थित एक कपंनी ने अधिकृत डीलर के तौर पर नियुक्त किया था. विकास ने किसी तरह का पैसा लेने से इनकार किया. उसने दावा किया कि वो 63 सरकारी योजनाओं के लिए ‘उद्योग आधार कार्ड’ बनाता है.

बताया जाता है कि मुद्रा योजना से ऐसे करीब 6 करोड़ लोगों को लाभ मिला है जो संस्थागत वित्त के दायरे से बाहर थे. आखिर ये 6 करोड़ लाभार्थी कौन हैं. सरकार के पास इस सब के आंकड़ें मौजूद हैं. लेकिन मध्य प्रदेश में इंडिया टुडे ने जमीनी हकीकत की जांच की तो योजना के नाम पर ग्रामीणों को चूना लगाने का खेल सामने आया.

 

Liked it? Take a second to support द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी टीम on Patreon!