जंतर-मंतर पर मुसलमानों का विरोध प्रदर्शन




नई दिल्ली : अभिनेता नसरूदीन शाह के द्वारा बुलंदशहर हिंसा को लेकर दिए गए बयान पर टिप्पणी करना पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को भारी पड़ रहा है. आज दिल्ली के जंतर मंतर पर मुसलमानों ने ना सिर्फ पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए, बल्कि इमरान खान को अपनी हद में रहने की नसीहत भी दे डाली.

मुंबई की रज़ा अकादमी की तरफ से आए इन मुसलमानों ने पाकिस्तान सरकार पर इल्ज़ाम लगाया कि पाक़िस्तान ने अपनी जुल्म व ज्यादती के दम पर सूफी पंथ के मानने वाले करीब 500 से ज्यादा मुस्लिम उलेमाओं को बंदी बनाकर रखा हुआ है, और उन्हें बेइंतहा परेशान किया जा रहा है.



अकादमी के उपाध्यक्ष अमानुल्लाह रज़ा ने पाकिस्तान को ज़ालिम देश करार देते हुए सूफी पंथ के सभी उलेमाओं को छोड़ने की मांग की. भारत के मुसलमान अमन से रहते आए हैं, और वो अपने तमाम मसले आपसी भाईचारे से सुलझा सकते हैं.

ज़ियाई ने पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए इमरान खान को पहले अपने देश के अल्पसंख्यक समाज को इंसाफ दिलाने की नसीहत दी. अब्दुर्रहमान ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यको के हालात बद से बदतर है, उन्हें इंसाफ और हक़ देने के बजाए इमरान खान भारत के खिलाफ बदज़ुबानी करते है, जिसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इससे पहले एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी पाक़िस्तान को फटकार लगाते हुए भारत के मुसलमानों के मामले में दखल ना देने की हिदायत दी थी. ये मामला नसीरुद्दीन शाह के बयान के बाद सुर्खियों में आया, जिस पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तान के पीएम ने भारत के मुसलमानों को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद से ही इमरान खान भारतीयों के निशाने पर है.

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