लोकसभा चुनाव 2019: भगवागिरी काम नहीं आएगा गिरिराज सिंह का?




गिरिराज सिंह (बाएं) और अमिताभ कुमार दास

बिहार के भाजपा के योगी आदित्यनाथ और साक्षी महाराज कहे जाने वाले गिरिराज सिंह जो हमेशा अपने कथनी और करनी से विवादों में रहते हैं का पत्ता 2019 लोक सभा में साफ़ होता नज़र आ रहा है.

बिहार की नवादा लोकसभा सीट को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में जिस तरह से घमासान है उससे लगता है कि यह सीट तो गिरिराज को नहीं मिलने वाला. गिरिराज सिंह यहां से अभी सांसद है. लेकिन जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के लिए मुंगेर की सीट छोडऩे के एवज में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) अपनी सांसद वीणा देवी के लिए यह सीट मांग रही है. वीणा देवी बाहुबली नेता सूरजभान सिंह की पत्नी हैं.

1996 से बीजेपी के पास रही नवादा सीट

2014 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो बीजेपी व जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) बिहार में 1996 से गठबंधन में चुनाव लड़ते रहे हैं। तब से ही यह सीट बीजेपी के कोटे में रही है। 1996 में बीजेपी के कामेश्वर पासवान, 1999 में संजय पासवान, 2009 में भोला सिंह यहां से चुनाव जीत चुके हैं। 2014 के चुनाव में बीजेपी के भोला सिंह के बेगूसराय चले जाने के बाद गिरिराज सिंह यहां से चुनाव जीते।

ललन सिंह कर रहे मुंगेर सीट पर तैयारी

मुंगेर सीट से अभी एलजीपी की वीणा देवी सांसद हैं लेकिन जेडीयू नेता व बिहार सरकार में मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह जो नीतीश कुमार के बहुत करीबी माने जाते हैं ने छह महीना पहले से ही मुंगेर से चुनाव लडऩे की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में एलजेपी की सांसद वीणा सिंह के लिए क्षेत्र बदलना अपरिहार्य हो गया है।

नवादा सीट पर एलजेपी कर रही दावा

चूंकि वीणा देवी को मुंगेर सीट छोड़ना पड़ेगा इसलिए एलजीपी नवादा सीट की मांग कर रही है. एलजेपी सांसद वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह 2009 में आरजेडी-एलजेपी गठबंधन में नवादा से चुनाव लड़ चुके हैं। वे बीजेपी के भोला सिंह के मुकाबले चुनाव हार गए थे। ऐसे में एलजेपी इस सीट पर दावेदारी कर रही है। एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस का कहना है कि एनडीए में जेडीयू के फिर से शामिल होने की वजह से हमारी एक सीटिंग सीट मुंगेर ली जा रही है तो इसके बदले हमें भूमिहार बहुल सीट चाहिए। नवादा से वीणा देवी के पति सूरजभान चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में एलजेपी का इस सीट पर दावा स्वाभाविक है।

सीट को ले बीजेपी के अपने तर्क

इधर बीजेपी नेताओं का इस सीट को लेकर अलग तर्क है। संघ और बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह सीट परम्परागत रूप से उनकी रही है। पिछले छह लोकसभा चुनावों में चार बार यहां से बीजेपी जीती है। दूसरा तर्क यह दिया जा रहा है कि जेडीयू के लिए अपनी सीटिंग सीट छोड़ रही है तो जेडीयू उसे अपने कोटे की कोई सीट छोड़े।

वरिष्ठ आईपीएस का आरोप: गिरिराज सिंह का रणवीर सेना से संबंध

नवंबर 2014 में, वरिष्ठ IPS अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने गिरिराज पर आरोप लगाया था कि उनका बिहार के ज़मींदारों की कैर कानूनी निजी सेना रणवीर सेना से नज़दीकी संबंध थे. एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाने वाले दास उस समय बिहार मानवाधिकार आयोग के एसपी थे. उन्होंने अपनी रिपोर्ट स्पेशल ब्रांच, बिहार पुलिस की इंटेलिजेंस विंग को भेजी थी और भारत सरकार की एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा गहन जाँच का अनुरोध किया था। उनके सनसनीखेज़ पत्र से नरेंद्र मोदी सरकार को अपमान झेलना पड़ा था और विपक्ष ने गिरिराज की जांच की मांग की थी।

दास को उसके बाद जीतनराम मांझी सरकार ने निलंबित कर दिया जो उस समय भाजपा के क़रीबी थे। अब जब, 2019 का लोकसभा चुनाव नज़दीक है और सत्तारूढ़ भाजपा, सत्ता विरोधी लहर झेल रही है, दलित वोट बैंक खोने का जोखिम नहीं उठा सकती है, पार्टी ने बातूनी केंद्रीय मंत्री को लोकसभा टिकट देने से इनकार कर दिया है। गिरिराज सिंह नाखुश हैं और उनहोंने पटना के नरेंद्र मोदी की संकल्प रैली से भी खुद को अलग रखा।

दिलचस्प बात यह है कि रैली से पहले गिरिराज बड़ी बड़ी बाते कर रहे थे.उनहोंने कहा था कि जो संकल्प रैली में नहीं आएगा वह राष्ट्र विरोधी होगा!

गिरिराज को टिकट न देने की खबरों के बीच जब टीएमसी ने अमिताभ कुमार दास से संपर्क किया, तो उन्होंने इस राजनीतिक मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन दास ने टीएमसी को बताया कि गिरिराज सिंह का संबंध रणवीर सेना से है और फिर से गिरिराज सिंह के रणवीर सेना लिंक की आईबी जांच होनी चाहिए।

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