सीलिंग के खिलाफ दिल्ली के बाजार बंद, प्रदर्शन भी




-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

नई दिल्ली, 23 जनवरी, 2018 | पूरी दिल्ली के सात लाख से ज्यादा व्यापारियों ने मंगलवार को सीलिंग मुहिम के खिलाफ व्यापार बंद रखा और व्यापारियों को बचाने के लिए आम माफी अध्यादेश लाने की मांग की। इस बंद की वजह से करीब 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।



ऑल इंडिया ट्रेडर्स कन्फेडरेशन (सीएआईटी) के अनुसार, शहर के 2000 से ज्यादा व्यापार संघों के सात लाख से ज्यादा व्यापारी राजधानी में सीलिंग के खिलाफ ‘दिल्ली व्यापार बंद’ में शामिल हुए। व्यापारियों का कहना है कि सीलिंग दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।

सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने एक बयान में कहा, “व्यापारी सरकार से 31 दिसंबर, 2017 के अनुसार ‘जो जैसे जहां है के अधार’ पर भवन व वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए ‘आम माफी योजना’ का एक अध्यादेश लाकर सीलिंग से व्यापारियों की रक्षा करने की मांग कर रहे हैं।”

सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने एक बयान में कहा, “प्रदर्शन कर रहे व्यापारी सरकार से मामले में तत्काल दखल देने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि व्यापारियों से एमसीडी अधिनियम 1957 के मूलभूत अधिकारों को छीन लिया गया है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में सीलिंग तानाशाही के तरीके से की जा रही है।”

खंडेलवाल ने कहा कि स्थानीय दुकानों को व्यापारियों को वाणिज्यिक दरों पर दिया गया और अब परिवर्तन शुल्क की मांग की जा रही है और बिना कोई नोटिस दिए सीलिंग की जा रही है, जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता।

खंडेलवाल ने कहा, “पूरी सीलिंग की कार्यवाही एक तानाशाही तरीके के साथ एमसीडी अधिनियम 1957 को दरकिनार कर की जा रही है।”

उन्होंने कहा कि इस कदम से अधिनियम के प्रावधानों का लाभ लेने से व्यापारी वंचित हो गए हैं।

व्यापारियों की संस्था ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी सहित राजनीतिक दलों ने ‘व्यापार बंद’ का समर्थन किया है।

अधिनियम की कई धाराओं का हवाला देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि इमारत के दुरुपयोग के मामले में आयुक्त को मालिक के खिलाफ नगर निगम मजिस्ट्रेट के साथ शिकायत दर्ज करने की जरूरत है।

खंडेलवाल ने कहा, “इससे पहले आयुक्त ने किसी भी इलाके को वाणिज्यिक गतिविधि चलाने के लिए निषिद्ध नहीं घोषित किया था.. इसलिए एमसीडी द्वारा चल रही सीलिंग पूरी तरह से अवैध है, क्योंकि इससे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन होता है और यहां तक कि शीर्ष अदालत को इस अनिवार्य प्रावधान के बारे में कभी सूचित नहीं किया गया।”

दिल्ली के सभी प्रमुख थोक व खुदरा बाजार बंद हैं। इनमें कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, कमला नगर, करोल बाग, कश्मीरी गेट, खारी बावली, नया बाजार, भगीरथ पैलेस, पहाड़गंज, राजौरी गार्डेन, जेल रोड, रोहिणी, अशोक विहार, पीतमपुरा में बाजार पूरी तरह से बंद हैं और किसी तरह की वाणिज्यिक गतिविधियां नहीं हुईं।

-आईएएनएस

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