#MeToo के तहत हो फंसे राज्य विदेश मंत्री के पद से इस्तीफा देने की हक़ीक़त




मीटू कैंपेन दुनियाभर में छाया हुआ है। इस कैंपेन के तहत एमजे अकबर ने राज्य विदेश मंत्री के पद से बुधवार को अपना इस्तीफा भी दे दिया है। उन पर मीटू अभियान के तहत एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिसके चलते विपक्ष लगातार उनपर दवाब बना रहा था।

भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है। दूसरी तरफ मंत्री के खिलाफ गवाही देने वाली महिला पत्रकारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अब प्रिया रमानी समेत इस मामले में गवाही देने वाली पत्रकारों की संख्या 20 हो गई है।

एमजे अकबर ने बयान जारी करके कहा है कि मैंने निजी तौर पर अदालत में न्याय पाने का फ़ैसला किया है, मुझे यह उचित लगा कि पद छोड़ दूं और अपने ऊपर लगे झूठे इल्ज़ामों का निजी स्तर पर ही जवाब दूं। इसलिए मैंने विदेश राज्य मंत्री के पद से अपना इस्तीफ़ा दे दिया है।



इस मामले में ndtv की खबर के मुताबिक इन तीन दिनों में अकबर पर आरोप लगाने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। यह संख्या 20 तक पहुंच गई। यानी न तो अकबर की सफाई काम आई और न ही प्रिया रमानी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी और कदम। पत्रकारों की संस्थाओं ने सरकार को लपेटे में ले लिया। बात यहां तक पहुंच गई कि प्रिया रमानी को कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद देने के लिए चंदा तक जुटाने की बात होने लगी। हालांकि रमानी ने यह लेने से इनकार कर दिया।

गवाही देने को तैयार 20 महिला पत्रकार

मी टू कैंपेन के तहत गवाही देने के लिए सामने आने वाली महिलाओं में मीनल बघेल, मनीषा पांडे, तुषिता पटेल, कणिका गहलोत, सुपर्णा शर्मा, रमोला तलवार, बादाम होइहनु हौजल, आयशा खन, कुशलरानी, कनीजा गजारा, मालविका बनर्जी, एटी जयंती, हमीदा पार्कर, जोनाली बुरागोहन, मीनाक्षी कुमार, सुजाता दत्ता सचदेवा, रेशमी चक्रवर्ती, किरण मनराल, संजरी चटर्जी प्रमुख हैं।

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