मोदी जी के आयुष्मान योजना का सरकारी लॉलीपॉप!




-मोहम्मद मंसूर आलम

अगर भारत की असल तस्वीर देखनी हो तो गुजरात और कश्मीर जाने के बजाए अस्पताल के टूरिज्म का मज़ा लीजिए. वहां खुद भर्ती ना हो तब भी कोई बात नहीं आप किसी गरीब रिश्तेदार, दोस्त, दूधवाले,अखबार वाले के बहाने ही आ जाइए. आपको भारत की असल तस्वीर मिल जाएगी. जहाँ आपको न कोई हिन्दू मिलेगा और न कोई मुसलमान मिलेगा. आपको हिंदुस्तान मिलेगा. सिसकता हुआ हिंदुस्तान. यही हिंदुस्तान की असल तस्वीर है.

प्रधान मंत्री मोदी ने झारखंड से अपने बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भारत’ का उद्घाटन किया, इस योजना का बखान खुद मोदी ने 15 अगस्त को लाल किला के प्राचीर से किया था और फिर मीडिया ने इसे तोते की तरह रटना शुरू कर दिया. इस उद्घाटन के मौके पर उनहोंने कहा कि इससे एक करोड़ लोगों को वह स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी जो अमीरों को अब तक मिलती आई है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो 70 सालों में नहीं हुआ वह 4 सालों में हुआ.

मोदी जी ने सिक्किम में एअरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए बहुत सारे ग़लत आंकड़े दिए. आंकड़ों में उनके झूठ को सोशल मीडिया ने बहुत अच्छे से उजागर किया। उज्ज्वला योजना की नाकामी आप सबको पता है. मैं पटना के केवल एक ब्लाक से 100 ऐसे लोगों का पता बता सकता हूँ जहाँ उज्ज्वला योजना के नाम पर उनसे ठगी की गयी. उज्ज्वला योजना के तहत उन्हें क़िस्त पर गैस कनेक्शन तो मिल गए लेकिन उनके पास अब पैसे नहीं कि वे उसमें गैस डलवा सकें. सिलिंडर का क्या होगा वह पता नहीं? उन सिलिंडर पर जो कर्ज़ है ईएमआई का वह कैसे वसूला जाएगा यह भी पता नहीं.

मोदी जब बोलते हैं तो बिना देखे हुए बोलते हैं, शायद वक़्त की कमी के कारण क्या बोलना है इसका अभ्यास भी नहीं कर पाते. यह राजनेता के रूप में उनमें कमी है. अच्छा बोलना और सच बोलना दो अलग अलग गुण है. अच्छा बोलने से तालियाँ तो मिलती हैं लेकिन उससे ज़मीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता.

जन धन योजना में ग़रीबों से 100 और 200 वसूल कर बैंकों में डलवाए गए तो पता नहीं कि उनके पैसे का क्या हुआ लेकिन यह पता है जोकि मोदी के भाषण से ही पता चला कि इससे ग़रीबों के 17 हजार करोड़ रुपए वसूले गए. वे 17 हजार करोड़ रुपए कितने व्यापारी के खोराक बने यह बैंक को अच्छे से पता होगा. ग़रीबों के वे 17 हजार करोड़ रुपए धीरे धीरे करके सर्विस चार्ज के नाम पर खत्म हो रहे हैं, बहुतों के तो अब तक खत्म हो जा चुके हैं.

आयुष्मान भारत का यह महत्वाकांक्षी योजना भी उज्ज्वला और जन धन की तरह महज़ लॉलीपॉप है. इसका उद्घाटन करते समय मोदी ने कहा कि अब गरीब भी अमीरों की तरह ही इलाज करा पाएंगे. मोदी गरीबी में पले बढ़े हैं यह तो सबको पता है लेकिन मोदी आज भी इतने अज्ञानी हैं यह उनके इस वक्तव्य से पता चलता है. अमिताभ बच्चन के हेल्थ मॉनिटरिंग में केवल साल में लाखों खर्च होता है. उनका पूरा खानदान लीलावती में ही अपना इलाज करवाता है जहाँ के एसी की हवा की ही कीमत लाख रुपया होगी.

सच कहें तो राजनेताओं को सच ही बोलना चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें रुसवा न होना पड़े. वैसे 4 सालों में प्रधान मंत्री मोदी इस मामले में बेहद बदनाम राजनेता साबित हुए हैं. काश उन्हें उनके लेफ्टिनेंट बताते कि वह कहाँ कहाँ ग़लत हैं!

अस्पतालों में अब आईसीयू का चलन आम है. आईसीयू का एक दिन का खर्च घटिया से घटिया अस्पताल में भी 25 हज़ार बनना आम बात है. मेरे एक जानने वाले ने बताया कि एक अस्पताल में उसने अपने एक आदमी को भर्ती किया और 2 बजे रात से लेकर 8 बजे शाम तक उसी आईसीयू के दो दिन का चार्ज 32 हज़ार वसूला गया.

उसने बताया कि वहां भी फाइव स्टार होटलों की तरह चेक इन और चेक आउट का समय तय है लिहाज़ा उस हिसाब से 2 दिन का उसे 32 हजार बिल चुकाना पड़ा. आई सी यू के एक दिन का किराया केवल 2600 रुपया था. यह उस अस्पताल की हालत है जिसका आईसीयू दुसरे तल्ले पर है और वहां कोई लिफ्ट नहीं है. पटना के एक सबसे नामी प्राइवेट अस्पताल ने लाश को आईसीयू में कई दिनों तक रखकर भारी भरकम बिल बनाया. दिल्ली के एक अस्पताल ने डेंगू के इलाज का बिल 16 लाख थमा दिया. ये लीलावती अस्पताल या एशिअन हार्ट इंस्टिट्यूट नहीं है. यह बी ग्रेड के अस्पतालों की बात हो रही है. 5 लाख के जीवन बीमा से क्या होगा आप अंदाज़ा लगा सकते हैं.

अगर आपको डेंगू हो गया और आप इसी अस्पताल में इस आयुष्मान के चक्कर में चले गए जहाँ 16 लाख का बिल आराम से बेशर्मी के साथ काट दिया जाता है तो आप 11 लाख कहाँ से लाएंगे यह आपकी समस्या है. यह योजना भी उन लोगों के लिए है जिनकी मासिक आय 10 हज़ार या उससे कम है. इस महंगाई के दौर में आज 25 हजार आय वाला भी खुद को गरीबी रेखा से नीचे मह्सूस करता है. ऐसे में उनके इलाज का क्या?

अगर आप इन सब पहलूओ पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि योजनाएं बस चुनावी स्टंट हैं. मोदी ने अपने 4 साल में ऐसा कुछ नहीं किया जिसकी तारीफ़ की जा सके. पिछली कांग्रेस सरकार ने हर राज्य में एम्स खुलवाने का निर्णय लिया था. कितने राज्यों में यह खुला इसका डाटा मेरे पास नहीं है. लेकिन पटना में उसी निर्णय के नतीजे में एम्स खुला. यह पिछली सरकार का ज़मीनी स्तर पर किय गया एक अच्छा काम था जिसे और मज़बूत करने की आवश्यकता थी. पटना में एम्स के फंक्शनल होने के बाद बिहार से दिल्ली जाने का मरीजों का सिलसिला थमा है और पटना एम्स अपने दिल्ली एम्स के गुणवत्ता को बरकरार रखे हुए है हालांकि उस को पूरी तरह से फंक्शनल होने में अभी बहुत समय लगेगा.

अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दिल्ली के अस्पताल को निर्देश दिया था कि मरीज़ के पास अगर पैसे नहीं हैं तो भी उसका इलाज किया जाना ज़रूरी है. लेकिन ऐसे कितने लोग हैं जो अपनी फ़रियाद सुप्रीम कोर्ट ले जा सकें और अपना इलाज मुफ़्त कराने के लिए बाध्य कर सकें.

सरकारी अस्पतालों की एक और भयावह स्थिति है कि वहां के जूनियर डॉक्टर अक्सर आराम फरमाने चले जाते हैं. चार दिन पहले पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर के हड़ताल पर जाने के कारण 9 लोगों की जान चली गयी. यह 9 वे लोग हैं जिनकी जान अस्पताल में चली गयी और जिनकी संख्या अस्पताल में रजिस्टर्ड हैं. उनकी संख्या कई गुना अधिक होगी जिन्हें डॉक्टर ने यह कह कर वापस कर दिया कि अस्पताल में इनका दाखिला इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि अपस्ताल के डॉक्टर हड़ताल पर हैं. सरकारों को इस पर सोचना चाहिए. सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अस्पतालों और विद्यालयों में कम से कम हड़ताल न हो और इसके लिए ज़रूरी है कि डॉक्टरों को ज़रूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए.

सरकारों को चाहिए कि वह जनता को लॉलीपॉप देना छोड़ कर ईमानदारी से जनता की स्थिति को सुधारने पर काम करें. मोदी सरकार को आयुष्मान भारत की योजना शुरू करने से बहुत बेहतर था कि वह भारत के सरकारी अस्पतालों को प्राइवेट अस्पताल जैसा बनाने की दिशा में ज़रूरी क़दम उठाते. प्राइवेट अपस्तालों में कॉरर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी के नाम पर गरीबों के मुफ़्त इलाज करने का प्रावधान कराया जाता और वह हो रहा है या नहीं इसे देखा जाता.

(अगर आप भी नागरिक होने के नाते अपनी बात कहना चाहते हैं तो हमें अपनी बात लिख कर tmcdotin@gmail.com पर भेजें. हम इसे प्रकाशित करेंगे.)

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