कोटा के मुर्तज़ा अली करेंगे शहीदों के परिवारों की मदद, प्रधान मंत्री राहत कोष को देंगे 110 करोड़ रुपए




जी हाँ, कोटा के मुर्तज़ा अली हामिद देंगे प्रधान मंत्री राहत कोष में 110 करोड़ रुपए की राशि. यह राशि पुलवामा के शहीदों के परिवार की मदद के मद्देनज़र उनहोंने देने का निर्णय किया है. यह प्रधान मंत्री राहत कोष में दी जाने वाली आज तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत मदद है.

मुर्तज़ा अली हामिद फिलहाल मुंबई में बतौर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. मुर्तजा ने शहीदों के परिवार की मदद के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में बाकायदा ईमेल करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें दो-तीन दिन में प्रधानमंत्री के साथ बैठक करने का जवाब भेजा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुर्तज़ा प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर उन्हें 110 करोड़ रुपये का चेक सौंपेंगे. इसके लिए उन्होंने सारी कागजी कार्रवाई भी कर रखी है. उन्होंने 25 फरवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय को ईमेल भेजकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय मांगा था. इसके बाद एक मार्च को जवाब आया कि दो से तीन दिन में उन्हें मिलने का समय बता दिया जाएगा.

मुर्तजा नेत्रहीन हैं. उन्होंने कोटा के कॉमर्स कॉलेज से स्नातक (ग्रेजुएशन) किया है. उनका ऑटोमोबाइल का पुश्तैनी बिजनेस है.

मुर्तजा एक जाने-माने वैज्ञानिक भी हैं। वह फ्यूल बर्न रेडिएशन टेक्नोलॉजी के जरिए जीपीएस, कैमरा या अन्य किसी उपकरण के बगैर ही किसी भी वाहन को ट्रेस करने की विध का आविष्कार किया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार, वह अपना अविष्कार फ्यूल बर्न रेडिएशन टेक्नोलॉजी अगस्त 2016 में ही भारत सरकार को सौंपने वाले थे और वह भी मुफ्त जिससे बिना किसी जीपीएस के किसी भी वाहन, कैमरा या सामान को ट्रेस किया जा सकता है. दुर्भाग्य से अक्टूबर के 2018 में इसका अनुमोदन उन्हें मिला. उन्हें अफ़सोस है कि यदि इस अनुमोदन में देर नहीं हुआ होता तो पुलवामा हमले को असफल किया जा सकता था.

उनहोंने जो अविष्कार किया है उसके पीछे की रोचक कहानी है. जयपुर में मोबाइल फ़ोन पर बात करने से पेट्रोल पंप में आग लगी थी. उसी घटना ने उन्हें प्रेरित किया इसका कारण ढूँढने के लिए कि कैसे मोबाइल रेडिएशन से पेट्रोल ने आग पकड़ा और उनहोंने फ्यूल बर्न रेडिएशन टेक्नोलॉजी (Fuel Burn Radiation Technology) का अविष्कार किया. मुर्तज़ा हालांकि कॉमर्स ग्रेजुएट हैं लेकिन उनका यह अविष्कार विज्ञान और प्रद्योगिकी के लिए बेहद अहम् है.

उनहोंने कहा कि हर हिन्दुस्तानी के खून में सैनिकों की मदद करने का जज्बा होना चाहिए.

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