मुजफ्फरपुर हत्याकांड : कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की थी तैयारी




पटना : लम्बे अरसे से राजनीति में सक्रिय रहे समीर कुमार पहली बार 2002 में चर्चा में आए थे जब वो मुज़फ़्फ़रपुर नगर निगम के मेयर बने। समीर कुमार राजनीति के साथ ही समाजसेवा के कामों से भी जुड़े हुए थे, प्रोपर्टी डीलिंग का भी काम करते थे।

मुज़फ़्फ़रपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर रोहित की आधुनिक हथियारों से सरेराह गोली मारकर हत्या की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। लेकिन सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक़ इस हत्याकांड के पीछे प्रोपर्टी डीलिंग का विवाद हो सकता है।

जिस तरह इस घटना को अंजाम दिया गया है उससे इतना तो स्पष्ट है कि अपराधियों को पता था कि समीर कुमार घर से आने-जाने के लिए शहर की मुख्य सड़क की बजाय दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। इस हत्याकांड का CCTV फ़ुटेज सामने आ चुका है, फ़ुटेज में साफ़ दिख रहा है कि बाइक सवार अपराधी पहले से ही घात लगाकर बैठे थे और जैसे ही समीर कुमार की गाड़ी वहाँ पहुँची उन्होंने अपनी बाइक कार के सामने लगा दी और पीछे बैठे शख़्स ने बाइक से उतरकर गाड़ी पर अंधाधुंध फ़ायरिंग कर दी।

मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या का मामला बहुचर्चित नवरुणा हत्या मामले से भी जुड़ा हो सकता है। बंगाली परिवार से आने वाली 7वीं कक्षा की छात्रा नवरुण का अपरहण 18 सितम्बर 2012 को कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी।

मीडिया में आई ख़बरों के हिसाब से नवरुणा का अपहरण उसके पिता की बेशकिमती जमीन पर कब्जा करने के लिए ही किया गया था ताकि उसके पिता पर दवाब बनाया जा सके।

सोमवार को समीर कुमार का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में कर दिया गया।

आपको बताते चलें कि समीर कुमार ने अपनी राजनीति की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी लेकिन बाद में वे बीजेपी से जुड़ गए, 1998 से लेकर 2001 तक वो BJYM के ज़िलाध्यक्ष रहे।

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