COVID-19 से लड़ने के लिए तैयार सरकारी मोबाइल ऐप आरोग्य सेतु ऐप से उर्दू नदारद




आरोग्य सेतु ऐप उर्दू को छोड़कर ग्यारह भाषाओं में तैयार किया गया है जोकि भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में उर्दू आधिकारिक भाषा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, 50.4 मिलियन लोग अपनी प्राथमिक भाषा के रूप में उर्दू का उपयोग करते हैं।

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2 अप्रैल को आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को कोरोना महामारी के इस तबाही के समय वायरस से सतर्क करने के लिए है, अगर कोई कोविड-19 संक्रमित रोगी के संपर्क में आता है तो यह ऐप उसे सतर्क करता है. साथ ही उन्हें क्या उपाय करने चाहिए यह भी बताता है।

प्रधान मंत्री मोदी ने 14 अप्रैल को 3 मई तक राष्ट्रीय लॉकडाउन के विस्तार की घोषणा करते हुए सिफारिश की थी कि नागरिक इस ऐप को डाउनलोड करें। कई सरकारी एजेंसियां ​​भी अलग-अलग सोशल मीडिया और अन्य चैनलों के माध्यम से आरोग्य सेतु के बारे में जागरूकता फैला रही हैं।

हालाँकि, ऐप को साइबर एक्सपर्ट्स से आलोचना मिल रही है कि यह नागरिकों की गोपनीयता का दुरुपयोग कर सकती है, लेकिन इससे भी अधिक इस देश की 15 करोड़ मुस्लिम आबादी के लिए यह  गंभीर चिंता का विषय है। इस तथ्य के बावजूद कि उर्दू भारत की आधिकारिक भाषाओँ में एक है और विशेष रूप से दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लद्दाख की यह आधिकारिक भाषा है इसे ऐप में जगह नहीं मिली है. मदरसा पृष्ठभूमि के लोग बेहतर हिंदी और अंग्रेजी नहीं जानते हैं और उनकी प्राथमिक भाषा उर्दू है। बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को भी इसका नुकसान होग़ा क्योंकि वे घरेलू शिक्षित हैं और केवल उर्दू पढ़ना और लिखना जानती हैं।

Read this story in English: Narendra Modi’s Aarogya Setu app to fight COVID-19 neglects Urdu

मोहम्मद आदिल का कहना है कि उनके पास एक स्मार्ट फोन है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा COVID-19 महामारी से लड़ने के लिए इसके इस्तेमाल की सिफारिश के बाद आरोग्य सेतु इंस्टाल करना चाहते थे। उन्होंने कहा, “मैं मजबूर हूं क्योंकि मैं अंग्रेजी और हिंदी में उतनी अच्छी तरह से वाकिफ नहीं हूं,” बोलते समय निराशा साफ़ झलक रही थी। “मैं इस विनाशकारी समय में अपने प्रधान मंत्री के साथ खड़ा रहना चाहता हूं और अपने देश को कोरोना से छुटकारा पाने में मदद करना चाहता हूं लेकिन मुझे नहीं पता कि वह उर्दू को कैसे शामिल करना भूल गए जो हम जैसे कई लोगों की कार्य की और मातृभाषा है,” उन्होंने आगे कहा।

आदिल अकेले नहीं है। रहमा एक मदरसे से स्नातक हैं और उर्दू का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं क्योंकि वह उस भाषा को अच्छी तरह से समझती हैं जिसमें उनहोंने शिक्षा ली है। ”मुझे प्रधानमंत्री के लिए बहुत खेद है जो दुनिया के सामने दावा करते हैं कि वह भारत में अल्पसंख्यकों के लिए समान रूप से चिंतित रहते है। लेकिन उन्होंने मुस्लिम जन की भाषा को नजरअंदाज कर दिया और इस तरह एक बड़ी आबादी को COVID19 महामारी के मद्देनजर शुरू की गई स्वास्थ्य सेवा एप का उपयोग करने से वंचित कर दिया।

“यह सरकार कमज़ोर लोगों और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति बहुत असंवेंशील है. इस ऐप से खास तौर से उर्दू भाषा को शामिल नहीं किया गया। स्मार्ट फोन रखने वाले भारत के प्रत्येक नागरिक को संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखने के लिए इसे इंस्टाल करना ज़रूरी है,” एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा। “मुस्लिम महिलाएं बड़ी संख्या में इस भाषा का उपयोग करते हैं और उर्दू का विकल्प नहीं देकर उन्हें रास्ते से ही हटा दिया गया। क्या वे भारतीय नहीं हैं जो केवल उर्दू बोलते और लिखते हैं? ” वह पूछती हैं।

आरोग्य सेतु ऐप इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा विकसित एक मोबाइल एप्लिकेशन है। देश भर में कोरोना वायरस के मामलों को ट्रैक करने के लिए 1 अप्रैल, 2020 को भारत सरकार द्वारा इस ऐप को लॉन्च किया गया था।

इस मोबाइल एप्लिकेशन को विकसित इसलिए किया गया है ताकि यूजर को COVID-19 से संबंधित जोखिमों, बेहतर चलन और प्रासंगिक सलाह के बारे में बाख़बर रखा जा सके। इसकी ट्रैकिंग ब्लूटूथ और लोकेशन जनरेटेड सोशल ग्राफ के माध्यम से की जाती है जो उपयोगकर्ता को COVID-19 रोगी के साथ निकटता के आधार पर संक्रमण के जोखिम से बाखबर करता है। यह गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध है और अब तक यह 5 करोड़ से अधिक बार डाउन लोड किया जा चुका है।

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