बिहार चुनाव: नीतीश कुमार ही रहेंगे भाजपा के बड़े भैया, जानिए एनडीए में अनार शेयरिंग का सही आंकड़ा




छोटे भैया सुशील मोदी (बाएँ) और बड़े भैया नीतीश (दाएं)

बिहार में चुनाव के दिनों में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ होता हमेशा दीखता है. कार्यालय की भीड़ का हर शख्स एमएलए बनना चाहता है और आला कमान के आगे पीछे भी करता रहता है. गुप्तेश्वर पाण्डेय जैसे लोग तो अपनी नौकरी तक छोड़ देते हैं कि वह एमएलए बन जाएं. देश की विधायकी है ही इतनी मलाईदार की कोई राज्य के सबसे बड़े ओहदे की भी बली दे दे.

खैर, अब अनार सब बीमारों में तो बंट नहीं ही सकता क्योंकि अनार की मजबूरी है कि वह वेश्या की तरह सबको खुश नहीं कर सकती और बांटने वाले की मजबूरी है कि वह अनार को सरेआम नीलाम नहीं कर सकता.

तो आइए जानते हैं कि एनडीए में किस पार्टी को कितनी सीट मिली. एनडीए में मुख्यतः चिराग के कहीं और रौशन होने की वजह से दो ही पार्टी बची है. नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली जद (यू) और सुशील मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा. लेकिन उठापटक के नतीजे में दो और योद्धा आए हैं जो बीमार हैं और उन्हें अनार चाहिए तो एक को अनार नीतीश देंगे और दुसरे को अनार अपने हिस्से से सुशील मोदी देंगे. यानी जीतन राम मांझी नीतीश के हिस्से का अनार खाएंगे और मुकेश सहनी जो राजद के कूचे से बड़े बेइज्ज़त हो कर निकले सुशील मोदी के हिस्से का अनार खाकर अपनी बीमारी पर लेप लगाएंगे.

तो इस तरह नीतीश की पार्टी जद (यू) 115 पर लड़ेगी और 7 पर वह जीतन राम मांझी के उम्मीदवारों को खड़ा करेगी. इसी तरह 110 पर भाजपा लड़ेगी और 11 पर मुकेश सहनी की पार्टी को लड़वाएगी. मुकेश सहनी को विधान परिषद की भी एक सीट मिलेगी.

कुल मिलाकर जद (यू) सबसे पार्टी और नीतीश फिलहाल बड़े भैया बने रहेंगे. जद (यू) 115, हम (से.) यानी मांझी की पार्टी 7, भाजपा 110 और वीआईपी यानी मुकेश सहनी की पार्टी 11 पर लड़ेगी.

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल ने कहा, ”NDA में निर्णय हुआ है कि मांझी जी को जदयू जगह देंगे और मुकेश सहनी को हमने जगह 11 सीट देने का फैसला किया है. चुनाव बाद एक विधान परिषद की सीट भी वीआईपी को दी जाएगी.”

वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने कहा, ”मैने पहली बार जब राजनीति में कदम रखा तो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में काफी मदद की. 2018 में मैं महागठबंधन का अंग बना, हमें वहां धोखा मिला. इस चुनाव में भी मुझे छ्लने का काम किया, मेरे पीठ में खंजर घोपा गया सो वहां से हमलोग ने नाता तोड़ लिया. अब खुशी है कि जहां से राजनीति शुरु की वहां लौट आया. नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाना है.”

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