लोकतंत्र को बचाने के लिए कहीं नीतीश कुमार फिर न पलटी मार दें: शिवानन्द तिवारी




शिवानंद तिवारी (फाइल फ़ोटो)

राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री और राज्य सभा सांसद शिवानन्द तिवारी ने बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को उनके समाजवादी टर्न पर आज आड़े हाथो लिया.

शिवानन्द तिवारी ने मीडिया को दिए अपने लिखित सन्देश में कहा कि अचानक नीतीश कुमार के अंदर का सोया समाजवादी जाग गया है ऐसा न हो कि समाज और लोकतंत्र को बचाने का बहाना बनाकर नीतीश कुमार फिर से पलटी न मार दें.

उनहोंने कहा कि नीतीश कुमार का निर्णय कि राज्य सभा में लम्बित तीन तलाक़ विधेयक पर उनकी पार्टी भाजपा का साथ नहीं देगी. राम मंदिर पर भी उनकी ओर से बयान आया है कि मंदिर निर्माण मामले में उच्चतम न्यायालय का फ़ैसला मानेंगे. अध्यादेश का समर्थन नहीं करेंगे यह सब संशय पैदा करता है.



उनहोंने नीतीश कुमार के एक कार्यक्रम में उनके बयान का हवाला देते हुए कहा कि नीतीश अब विचार की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और धर्म पालन करने की आज़ादी पर भी बोल रहे हैं.

उनहोंने कहा कि यक्ष प्रश्न यह है कि अचानक नीतीश जी को ये सवाल परेशान क्यों करने लगे हैं! वह पिछले तीन चार वर्षों से कहाँ थे जब कट्टर वाद भारतीय संविधान, लोकतंत्र और हमारे बहुरंगी समाज के तानाबाना में तनाव पैदा कर रहा था. नीतीश जी इतना नासमझ तो नहीं कि उनको पता ही नहीं कि भाजपा के मात्री संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का यक़ीन उन मूल्यों में नहीं है जिनकी चिंता नीतीश जी को अचानक आज पुनः सताने लगी है.

राजद नेता ने कहा कि नीतीश संघ की नीतियों और उसके ख़तरे को अच्छी तरह समझते है. इसीलिए तो संघमुक्त भारत बनाने के संकल्प के साथ उनलोगों से अलग हुए थे. उनहोंने कहा कि ऐसा क्या हुआ था कि “मिट्टी में मिल जाऊँगा लेकिन अब इनके साथ नहीं जाऊँगा” जैसा भीष्म प्रतिज्ञा करने के बाद भी वह पुनः उनके पास चले गए!

तिवारी ने कहा कि महागठबँधन से अलग होने की वजह भ्रष्टाचार वग़ैरह की उनकी बात तो बेमतलब है. मुझसे बेहतर इसको कौन जानता है.

पूर्व राज्य सभा सांसद ने कहा कि राम मंदिर या तीन तलाक़ पर भाजपा या उनके लोंगो का रूख नया तो नहीं है! राम मंदिर के सवाल पर ये लोग सुप्रीम कोर्ट पर दबाव डाल रहे हैं. धमका रहे हैं. योगी ने तो ताल ठोककर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर था,  है, और रहेगा. तीन तलाक़ का मामला सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद से अवैध हो गया. लेकिन इन लोगों को इससे संतोष नहीं हुआ. अवैध हो जाने के बावजूद इस विधि से तलाक़ देने वाले पर आपराधिक मामला चलाएँगे. इस पर तीन साल की क़ैद का प्रावधान तो कभी का कर दिया गया था. लेकिन नीतीश जी इन सब पर अब तक मौन क्यों रहे!



विचारों की अभिव्यक्ति पर आज जैसा संकट तो आपात काल के अलावा हमलोगों ने कभी महसूस नहीं किया था. लेकिन नीतीश जी इस पर मौन व्रत में रहे. यहाँ तक कि एक समय नीतीश जी में प्रधानमंत्री की संभावना देखने वाले रामचंद्र गुहा कट्टरवादियों के भय से अहमदाबाद के सेमिनार में बोलने के लिए नहीं गए. नसीरुद्दीन शाह पर किस ढंग से हमला हुआ! क्या कहा था उन्होंने? देश में बढ़ रही असहिष्णुता पर ही चिंता प्रकट की थी. उनकी आशंका को उन पर हमलावरों ने सच साबित कर दिया. लेकिन हमारे नीतीश जी निर्विकार रहे.

आज अचानक अपने अंदर के सोए समाजवादी को उन्होंने जगाया है तो ज़रूर उसके पीछे कोई ख़ास वजह है. इस समाजवादी जागरण का समय देखिएगा तो समझने में शायद आसानी होगी. पाँच राज्यों के चुनाव नतीजे ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पचास साल तक शासन करने के दर्प को चूर कर दिया है. एक समय मोदी को अपराजेय घोषित करने वाले नीतीश कुमार को भी इन नतीजों ने सदमा पहुँचाया है. अब तक विधानसभा के उन चुनाव नतीजों पर उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी है. नतीजों के बाद उनका यही समाजवादी बयान सामने आया है. इनसे क्या निष्कर्ष निकलता है?

उन्होंने कहा कि नीतीश बहुत चतुर व्यक्ति हैं. एक दफ़ा आकलन करने में वे चूक कर गए हैं. नरेंद्र मोदी का राजनीतिक अवसान इतना जल्दी होगा यह इसका अनुमान वे नहीं लगा पाए थे. पाँच राज्यों के चुनाव नतीजों में उनको नरेंद्र मोदी की राजनीति का सूरज अस्त होता दिखाई दे रहा है. चूहे जब जहाज़ छोड़ने लगें तो उसके डूबने का अनुमान आप सहजता से लगा सकते है. नीतीश अब फिर अपनी राजनीति की चाल बदलने लगे हैं. अब भ्रष्टाचार नहीं कट्टर वाद उनको सताएगा. मुख्यमंत्री की कुर्सी की गारंटी मिल जाय तो लोकतंत्र बचाने के लिए पुनः पलटी मारने में नीतीश जी तनिक भी देर नहीं लगाएँगे.

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