श्रीलंकाई राष्ट्रपति का खुलासा ईस्टर बम धमाका के पीछे मुस्लिम आतंकवादी नहीं ड्रग माफिया

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रग माफिया ने यह हमले मुझे बदनाम करने और देश में ड्रग के खिलाफ मेरे अभियान को रोकने के उद्देश्य से किया था




श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेन (फाइल फोटो)

अंतर्राष्ट्रीय ड्रग माफिया ने श्रीलंका में ईस्टर रविवार (Srilanka Easter Bombings) को बम धमाका किया था, यह दावा किया गया है जबकि इससे पहले मुस्लिम आतंकवादियों पर इस बम धमाके का आरोप था.

यह बयान राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेन (Maithripala Sirisena) का तब आया है जब वह अपने देश में ड्रग माफिया पर शिकंजा कसने और उनके लिए मौत की सज़ा का प्रावधान तय करने में लगे हैं जिनका विरोध उनके ही सरकार के गठबंधन में बैठे लोग कर रहे हैं.

अधिकारीयों का कहना था कि जिहादी समूह नेशनल तौहीद जमात ईस्टर के दिन (National Thowheeth Jama’ath) चर्चों और होटलों में हुए आत्मघाती हमले के पीछे थे जिसमें कम से कम 258 लोगों की जान गयी थी

सिरिसेन कार्यालय ने हमले के बाद कहा था कि स्थानीय आतंकवादी और अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार थे.

लेकिन सोमवार (15 जुलाई) को उनके कार्यालय ने एक बयान जारी किया जिसमें सिरिसेन ने कहा कि “यह काम अंतर्राष्ट्रीय ड्रग कारोबारियों का है.”

“ड्रग माफिया ने यह हमले मुझे बदनाम करने और देश में ड्रग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को रोकने के लिए किया था. मैं इस से नहीं रूकने वाला,” उनहोंने कहा.

सिरिसेन श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं जबकि वहां गठबंधन की सरकार है. राष्ट्रपति सिरिसेन श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (Srilanka Freedom Party) के हैं जबकि प्रधानमंत्री यूनाइटेड नेशनल पार्टी (United National Party) के रानिल विक्रम सिंघे हैं. प्रधान मंत्री फांसी की सज़ा नहीं चाहते और संसद में इसको लेकर दोनों पार्टियों में मतभेद है जिसके खिलाफ सिरिसेन लड़ रहे हैं. फांसी का प्रावधान 1976 से ही सदन में स्थगन में है.

सिरिसेन ने मृत्यदंड के स्थगन को समाप्त करने के लिए जनता का समर्थन माँगा है. उनहोंने कहा कि फांसी गैर कानूनी ड्रग के व्यापार को रोकने में सहायक होगा.

“अगर सरकार मृत्यु दंड को समाप्त करने के लिए कोई कानून लाती है तो मैं इसके लिए एक दिन राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित करूंगा,” सिरिसेन ने अपने वक्तव्य में कहा. उनहोंने आगे कहा कि जनता की मांग है कि ऐसे जघन्य अपराधियों को फांसी होनी चाहिए.

उनहोंने कहा कि बौद्ध भिक्षु ओमाल्पे सोबिथा (Omalpe Sobitha) ने अपना समर्थन दिया है और कहा है कि फांसी की सज़ा को बहाल किया जाना चाहिए और नशीली दवाओं के कारोबार पर युद्ध जारी रहनी चाहिए.

श्रीलंकाई कोर्ट ड्रग अपराधियों, हत्यारों और बलात्कारियों को सज़ा ए मौत देती है लेकिन यह स्वतः ही आजीवन कारावास में बदल जाता है.

श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने के शुरू में चार ड्रग अपराधियों को फांसी देने के निर्णय को स्थगित कर दिया था. कोर्ट ने इसे तब तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया जब तक कि कानून के अनुसार यह तय न हो जाए कि फांसी देश के संविधान की अवहेलना नहीं है.

अक्टूबर में इसको लेकर अगली सुनवाई होने वाली है.

श्रीलंका के आखिरी जल्लाद 2014 में सेवानिवृत्त हो गए थे लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बहुत सारे उम्मीदवारों में से दो नए जल्लाद चुन लिए गए हैं.

स्रोत: AFP

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