बिहार चुनाव: गुप्तेश्वर पाण्डेय का घर भी गया और घाट भी, नहीं मिला अनार




पाण्डेय जी के इस फेसबुक प्रोफाइल से ही पता चलता है कि वह क्या चाहते थे

गुप्तेश्वर पाण्डेय ने जिस अनार के लिए पूरा मेवे का बाग़ छोड़ आए वह नहीं मिला. बिहार विधानसभा चुनाव में राज्य के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को जेडीयू ने अनार नहीं दिया है. उनके हिस्से का अनार भाजपा अपने किसी बीमार को देगी.

पांडेय हाल ही में डीजीपी पद छोड़कर जेडीयू में शामिल हुए थे. डीजीपी पद छोड़ने से पहले उनहोंने राजनीति में आने की तैयारी करने के लिए बिहार के रोबिनवुड भी बने. नेताजी वाला फ़ोटो खिंचा कर फेसबुक पर भी आए लेकिन अनार यानी टिकट नहीं मिलने पर वह कह रहे हैं कि वह कभी अनार के लिए बीमार ही नही हुए थे. ऐसे ही एक बार वह भाजपा की संसद का अनार खाने के लिए भी अपना पड़ छोड़े थे लेकिन इस बार तो एकदम से गाजे बाजे के साथ उनहोंने अपनी बगिया में आग लगा दिया.

खैर जद (यू) की सीट की घोषणा और उनके अपने फेसबुक पोस्ट से यह साफ़ हो गया कि वह न घर के रहे न घाट के. उनकी पार्टी ने अपने कोटे की सभी 115 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जिसमें उनका नाम ओ निशान नहीं है. बक्सर सीट गठबंधन समझौते के तहत बीजेपी के खाते में गई है. बीजेपी ने इस सीट से परशुराम चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाया है.

टिकट नहीं मिलने के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी और जेडीयू नेता गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा.

अब क्या बोलेंगे, सब तो पहले ही बोल दिया? खैर क्या बोल रहे हैं पढ़ लीजिए.

पांडेय ने फेसबुक पोस्ट लिखकर कहा, ”अपने अनेक शुभचिंतकों के फ़ोन से परेशान हूँ. मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूँ. मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूँगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें.”

उन्होंने कहा, ”मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूँगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन नहीं करे. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है. अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहाँ के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें !”

इसी लिए कहते हैं पाण्डेय जी उर्फ़ रोबिनहुड जी जल्दबाजी न किया कीजिए.

Liked it? Take a second to support द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी टीम on Patreon!