‘चायवाला’ कहने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने चाय मज़दूरों के साथ किया वादाखिलाफ़ी




जैसे जैसे लोकसभा चुनाव करीब आते जा रहे हैं वैसे वैसे भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जिन विकास के वादों को भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल किया था वो अब पूरी तरह से विफल हो चुका है साथ ही जनता के सामने इसकी सचाई भी आने लगी है।

असम की सबसे बड़ी चाय संस्था ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राज्य के ‘चाय बागान मजदूरों की दुर्दशा पर ध्यान नहीं देने’ को लेकर निशाना साधा है।

असम चाह मजदूर संघ (एसीएमएस) के महासचिव रुपेश गोवाला ने कहा कि मोदी अक्सर खुद को ‘चायवाला’ कहते हैं जबकि उन्होंने राज्य के चाय बागानों में काम कर रहे 10 लाख मजदूरों से किए गए वादे को बीते चार साल में पूरा नहीं किया है।



उन्होंने कहा, ‘असम सरकार और एसीएमएस व अन्य चाय मजदूर इकाईयों के बीच मौजूदा मजदूरी समझौता 31 दिसंबर 2017 को समाप्त हो चुका है।’

गोवाला ने कहा कि असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी चाय बागानों की हालत और भी खराब है। उन्होंने कहा, ‘कंपनी के स्वामित्व वाले बागानों में मजदूरों को वर्तमान में 167 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं जबकि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली असम टी कंपनी लिमिटेड (एटीसीएल) के अंतर्गत 14 बागानों के 26 हजार मजदूरों को प्रतिदिन केवल 115 रुपये ही मिल रहे हैं।’

गोवाला ने कहा, ‘2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, मोदी ने असम में कई रैलियां संबोधित की थीं और चाय बागान मजदूरों को आश्वस्त किया था कि उन्हें प्रतिदिन कम से कम 350 रुपये का भुगतान किया जाएगा।’

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