2019 के चुनाव से पहले देश के नक्शे पर सियासी तस्वीर का जोड़तोड़




नई दिल्ली : चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है क्यूंकि इस बार गठबंधन द्वारा विपक्ष पूरी तरह मोदी के खिलाफ मोर्चा बनाने में जुट चुकी है. एक नवंबर से लेकर नौ नवंबर की तारीख तक आधा दर्जन से ज्यादा विपक्षी नेताओं के साथ चंद्रबाबू नायडू दिख चुके हैं.

चेन्नई में डीएमके प्रमुख स्टालिन के साथ उनकी मुलाकात हुई तो कल वो बेंग्लूरु में जेडीएस के कुमारस्वामी और देवेगौड़ा से मिले थे. नौ दिनों से नायडू देश में मोदी के खिलाफ आमने सामने की सीधी लड़ाई का माहौल बना रहे हैं.

चुकी नायडू एनडीए में रह चुके हैं इसलिए यहां की रणनीति से वाकिफ हैं और इसी का फायदा उठाते हुए विपक्ष को गोलबंद करने में जुटे हैं. हर राज्य में एक तीसरी ताकत है जिसे नायडू कांग्रेस के साथ लाने की कोशिश में हैं. चंद्रबाबू नायडू की ये कोशिश कामयाब हो गई तो 2019 के चुनाव में बीजेपी को कम से कम दक्षिण के राज्यों में तो कड़ी चुनौती मिलेगी.

दक्षिण में केसीआर की टीआरएस, वाईएसआर, एआईएडीएमके इन जैसी पार्टियां बीजेपी की नई दोस्त बन सकती हैं. वैसे भी तेलंगाना में केसीआर की हालत कांग्रेस-नायडू की दोस्ती के बाद कमजोर हो चुकी है. आंध्र में भी नायडू कांग्रेस की दोस्ती जगनमोहन के लिए मुसीबत बन सकती है. बीजेपी हो या विपक्ष, गठबंधन की जरूरत दोनों तरफ की है. लिहाजा नायडू के चक्रव्यूह से निपटने के लिए दक्षिण में बीजेपी नए साथियों के साथ चुनाव मैदान में जाने की तैयारी कर सकती है.



यूपी में महागठबंधन का बन पाना आसान नहीं दिख रहा है क्योंकि एसपी-बीएसपी में सीटों को लेकर सहमति नहीं दिख रही है. वहीं पश्चिम बंगाल में ममता और लेफ्ट को साथ लाना आसान नहीं होगा तो महागठबंधन की सूरत फिलहाल तो कामयाब होती नहीं दिख रही है.

कुल मिलाकर देखें तो 2019 के चुनाव से पहले देश के नक्शे पर सियासी तस्वीर काफी कुछ बदलती हुई दिखेगी. अभी तमाम नेता विधानसभा चुनाव में व्य़स्त हैं और इस चुनाव के खत्म होने के बाद 2019 के लिए रणनीति बनने लगेगी.

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