वर्तमान लोगों और नीतियों के कारण मैंने भाजपा छोड़ा, मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा था: कांग्रेस में शामिल होने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा




औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के कुछ घंटे बाद, शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी और अमित शाह पर इशारों में निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि भाजपा के मौजूदा लोगों और नीतियों के कारण मुझे पार्टी छोड़नी पड़ी, मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

सिन्हा जो भाजपा के साथ सालों से जुड़े थे अपनी पुरानी पार्टी से विदा होने के बाद अपने कई ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा: “मैं भारी मन और अपार पीड़ा के साथ आखिरकार अपनी पुरानी पार्टी से 6 अप्रैल को विदा हो रहा हूं जो कि इसका संस्थापना दिवस है, कारण हम सबको अच्छी तरह पता है। मुझे अपने लोगों से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि वे मेरे परिवार की तरह थे. मैं भारत रत्न नानाजी देशमुख, दिवंगत और महान पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और निश्चित रूप से, हमारे मित्र, दार्शनिक, उत्कृष्ठ नेता और मार्गदर्शक जैसे दिग्गजों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के साथ इस पार्टी में तैयार हुआ था।

“मैं उन लोगों में से कुछ को शामिल करना चाहूंगा जो उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे, जो अन्याय और लोक शाही को ताना शाही में बदलने के लिए जिम्मेदार हैं। मैं क्षमा करता हूं और समय के इस पड़ाव पर उन्हें भूल जाना चाहता हूं। पार्टी के कुछ मौजूदा लोगों और नीतियों के साथ मेरे मतभेद रहे, उसके बाद मेरे पास कोई विकल्प नहीं था,  सिवाय इसके कि मैं इनसे जुदा हो जाऊं, ”उन्होंने अपने ट्वीट में आगे कहा।

कांग्रेस में शामिल होने पर उनहोंने कहा: “मुझे आशा है कि इस बेहद पुरानी राष्ट्रीय पार्टी, जिसमें मैं कदम रख रहा हूं, मुझे एकता, समृद्धि, प्रगति, विकास और महिमा के लिहाज से अपने लोगों, समाज और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगी। यह महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल और कई अन्य महान राष्ट्र निर्माताओं की पार्टी है। आज के और भविष्य के भारत के बहुत ही डायनामिक, सक्षम, आजमाए हुए, और सफल चेहरा, कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में, मैं आशा करता हूं, मेरी इच्छा है और मेरी प्रार्थना है कि मैं एक बेहतर दिशा में आगे बढूंगा। लोकतंत्र ज़िंदाबाद…. कांग्रेस पार्टी का लालू और तेजस्वी के राजद के साथ गठबंधन ज़िंदाबाद। हमारा महान भारत ज़िंदाबाद। जय हिन्द।“

शत्रुघ्न सिन्हा अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र पटना साहिब से महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, जहां वे लगातार दो बार भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जीतते रहे हैं। पटना साहिब बीजेपी का गढ़ है और यहाँ उनका सामना उनके पूर्व पार्टी के साथी रविशंकर प्रसाद से होगा।

लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अन्य जैसे कई दिग्गजों के साथ साथ शत्रुघ्न सिन्हा को भगवा पार्टी की मौजूदा नेतृत्व ने दरकिनार कर दिया था। बीजेपी के एक दिग्गज यशवंत सिन्हा और कई अन्य पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं।

ग़ौरतलब है कि लाल कृष्ण आडवाणी के राम मंदिर अभियान को उन कारणों में से एक माना जाता है जिसकी वजह से पार्टी आज सत्ता में है और उसी आडवाणी को इस बार उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया और अमित शाह ने गांधी नगर में उनकी जगह ली है जहाँ आडवाणी 1998 से चुनाव लड़ रहे हैं और लगातार पांच बार जीते हैं।

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