ट्रिब्यून व संवाददाता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का विरोध




Image Courtesy: The Statesman

मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

चंडीगढ़, 8 जनवरी | पंजाब और चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा समाचार पत्र द ट्रिब्यून और इसकी संवाददाता के खिलाफ मामला दर्ज कराने के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया। अखबार और संवाददाता ने ‘आधार’ में दर्ज जानकारियों के अवैध तरीके से लीक होने की खबर की थी। प्रदर्शनों का आयोजन चंडीगढ़ प्रेस क्लब, जालंधर में पंजाब प्रेस क्लब और संगरूर प्रेस क्लब द्वारा किया गया।


चंडीगढ़ में पत्रकारों ने प्रेस क्लब से मार्च निकाला जोकि राज्य सरकार व केंद्र शासित चंडीगढ़ के प्रशासक वी.पी.सिंह बडनोर को ज्ञापन देने के लिए पंजाब राजभवन की तरफ रवाना हुआ।

चंडीगढ़ प्रेस क्लब के सचिव जनरल बरिंदर सिंह रावत ने ट्रिब्यून पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की निंदा की।

रावत ने एक बयान में कहा, “सरकारी एजेंसी ने डाटा अवैध रूप से जारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उस संवाददाता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को तरजीह दी जिसने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है।”

पंजाब और हरियाणा के कई और जगहों पर भी अखबार और संवाददाता के समर्थन में ऐसे ही प्रदर्शन हुए।

ट्रिब्यून अखबार ने 3 जनवरी को एक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें आधार डाटा की जानकारी आसानी से और अवैध रूप से उपलब्ध होने के बारे में बताया गया था। इसके बाद यूआईडीएआई ने अखबार और रिपोर्टर रचना खरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

यूआईडीएआई ने 4 जनवरी को कहा था कि शिकायत निवारण के लिए इसकी सर्च सुविधा का ‘गलत इस्तेमाल’ किया गया होगा लेकिन कोई आधार डाटा लीक नहीं हुआ है।

यूआईडीएआई के कदम का मीडिया जगत ने बड़े पैमाने पर विरोध किया है। पत्रकारों और एडिटर्स गिल्ड जैसी संस्थाओं ने द ट्रिब्यून और इसकी संवाददाता के खिलाफ मामले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

द ट्रिब्यून ने कहा है कि वह अपनी रिपोर्ट के साथ मजबूती से खड़ा है। अखबार ने यूआईडीएआई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ‘हमें ट्रिब्यून में इस बात का पक्का यकीन है कि हमारी खबरें वैधानिक पत्रकारिता के दायरे में आती हैं।’

ट्रिब्यून के एडिटर इन चीफ हरीश खरे ने कहा, “हमारी स्टोरी बेहद सार्वजनिक महत्व के मामले में नागरिकों द्वारा जताई जाने वाली वाजिब चिंताओं का नतीजा है। हमें अफसोस है कि अधिकारियों ने हमारी ईमानदार पत्रकारिता को गलत तरीके से लिया और मामले को उजागर करने वाले के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की शुरुआत कर दी। हम गंभीर खोजी पत्रकारिता की अपनी आजादी की रक्षा के लिए सभी कानूनी तरीके अपनाएंगे।”

–आईएएनएस

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